टमाटर प्यारी राज दूलारी हो गई है : बिम्मी शर्मा

बिम्मी शर्मा, वीरगंज (व्यँग्य ) | देश में चुनाव का मौसम है और नेताओं की जगह पर टमाटर छाया हुआ है । ज्यों ज्यों टमाटर प्यारी का भाव बढ़ रहा है त्यों त्यों वह बाहुवली सिनेमा की तरह दिनाें दिन हिट होती जा रही है । टमाटर प्यारी के बिना तरकारी ही नहीं जीवन भी बेस्वाद और सूना सूना सा लग रहा है । ठण्ड के कारण किसी का गाल भी लाल हो जाए तो लाल लाल टमाटर प्यारी की याद आ जाती है । बेचारी इतनी महंगी हो गई है कि कोई भी इसको छू नहीं पा रहा है खरीदना तो दूर की बात है ।

कभी प्याज महंगा हो जाता है तो कभी टमाटर । इन्हे देख कर लगता है कि यह किसी बडेÞ बैंक का शेयर है जो हर दिन खेत से दुकान तक बढ्ती ही जा रही है । टमाटर प्यारी इसी तरह आसमान में बैठी रही तो वह दिन दूर नहीं जब लोग शादी, जनेऊ या मूंन्डन संस्कार में सगुन की जगह एक किलो टमाटर को गिफ्ट पैक कर के उपहार में देने न लग जाएं । एक किलो टमाटर में पूरे परिवार खाना खा कर तृप्त हो जाता है । अब लोग घर में नकली फूल की जगह टमाटर रख कर सजाने लगे हैं । जिसके पास जितना ज्यादा टमाटर वह समाज का उतना ही प्रतिष्ठित व्यक्ति । इसी लिए जिसको भी समाज में अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस लानी है झट से टमाटर खरीद लाए । जितनी ज्यादा संख्या में लाल टमाटर उतने ही ज्यादा सामाजिक मान, सम्मान ।

टमाटर प्यारी इतनी राज दूलारी हो गई है की सब्जी मंडी में इस को बेचने वाला खुद को सोने का व्यापारी समझ रहा है । अभी टमाटर प्यारी को सोनपरी का दर्जा हासिल है । जो भी इसे खरीदता है बगल में खड़ा आदमी या औरत उसे ऐसे घूरते हैं जैसे वह एक नबंर का भ्रष्टाचारी हो । यदि अख्तियार का कर्मचारी होगा तो जरुर उसे पकड़वा कर जेल में डाल दे । टमाटर बेचना ही नहीं खरीदना भी अभी जोखिम भरा काम है । टमाटर प्यारी भले ही आप का ‘स्टेट्स सिबंल’ बन गई हो पर यह घर मे रखे कीमती जेवर की तरह आप को खतरे में भी डाल सकती है ।

किसी एक के घर में टमाटर की चटनी धनियापत्ती डाल कर बनती है और उसके सुगंध से बगल वाले घर के लोग भरपेट खाना खा लेते हैं । दिखावा पसंद करनेवाले लोग सारी सब्जी खरीदने के बाद अंत में टमाटर प्यारी को खरीदते हैं और सब्जी के झोले में सबसे उपर रखते है ताकि महंगी टमाटर पिचके भी न और सब को दिखाई भी दे । टमाटर को घर ला कर ऐसे धो कर पोंछते हैं जैसे किसी नन्हे से बच्चे को नहला रहे हों । कहीं नाखून लग कर टमाटर बेचारी को कोई खंरोच न आ जाए । अभी टमाटर प्यारी नई नवेली दुल्हन की तरह छूईमूई हो गई है । जब यह सस्ती थी तब लोग इस का छिलका उतार कर खाते थे अब यह महंगी है तो लोग इस का छिलका भी खाने लगे हैं , टमाटर प्यारी की तरह केला और नारियल भी इसी तरह महंगी हो जाए तो लोग क्या करेगें ? छिलका सहित खाने के कारण लोगों का हाजमा ही कहीं गड़बड़ा न जाएं ।

घर में एक बित्ता जमीन नहीं छोड़ते । हर जगह खेत खलिहान में पीलर लगा कर घर बना रहे है । अन्न और सब्जी उगाने के लिए जमीन तो छोडा ही नहीं किसी ने । लोग यह भूल गए हैं कि घर बैठने के लिए वास तो दे सकता है पर ग्रास (अन्न और सब्जी ), सांस और आस नहीं दे सकता । इस के लिए तो भोजन ही चाहिए । आज टमाटर और प्याज महंगा है तो लोग रो रहे हैं । अगर लोगों का रवैया न बदला और वह नहीं चेते तो धीरे, धीरे इसी तरह बाँकी सब्जी और अन्न भी महंगे हो कर आसमान छूने लगेंगें तब क्या होगा ? कभी सोचा है । अभी तो टमाटर प्यारी बिचौलिए और दलालो के फंदे मे जकड़ी पड़ी हुई है जैसे मुबंई की कोठी में कोई लड़की दलाल के सिकंजे में पडी हो । अगर टमाटर प्यारी से इतनी ही मोहब्बत है तो इस को सर्वसुभ और सस्ता बनाने के लिए घर में थोड़ी सी जमीन खाली छोड़ो और इसको बोओ और उत्पादन करो । नहीं तो छत में छोटी सी क्यारी बना कर या गमला में बो कर भी टमाटर प्यारी का जीवन रक्षा करो । नहीं तो टमाटर प्यारी इतनी महंगी हो जाएगी की इस के दर्शन दुर्लभ हो जाएगें । और यह हम सभी के हाथों से निकल कर हमेशा के लिए ‘राम प्यारी’ हो जाएगी ।

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