ट्रम्प नीति का असर

 trump
एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक पिछले दिनों ट्रंप के आदेशों को लेकर हवाई के जज ने भी साफतौर पर कहा था कि इन प्रतिबंधों का असर देश के यूनिवर्सिटी सिस्टम पर भी देखने को मिलेगा और देश को आर्थिक हानि झेलनी पड़ेगी। ग्रेजुएशन के लिए यहां आने वाले छात्रों की संख्‍या में ट्रंप के आदेश के बाद करीब 50 फीसद तक गिरावट दर्ज की गई है। इससे उन विषयों को लेकर चिंता बढ़ गई है जो सिर्फ अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पढ़ाई जाती है। अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स अमेरिका की अर्थव्यवस्था में हर साल 32 अरब डॉलर का योगदान देते हैं। गत दशक में अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स की आवक देश में बढ़ी थी और पिछले साल ही यह आंकड़ा एक 10 लाख को पार कर गया था।

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया और नॉर्थ-ईस्टर्न यूनिवर्सिटी का कहना है कि उनके यहां विदेशी स्टूडेंट्स की संख्या ज्यादा रही है। इधर, पोर्टलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष विम विवेल ने कहा कि पिछले सप्ताह हैदराबाद के 10 संभावित स्टूडेंट्स से उन्होंने मुलाकात की, लेकिन काउंसलिंग सेशन के दौरान अमेरिका में रहने को लेकर उनके अंदर डर दिखाई दिया। एक मुस्लिम स्टूडेंट ने कहा कि उसके पिता अमेरिका और इसके मुस्लिम विरोधी रवैये को लेकर डरे हुए हैं।

ओहियो यूनिवर्सिटी में आवेदकों की संख्या में 8.4 फीसदी की गिरावट आई है। आवेदक में चीनी स्टूडेंट्स की संख्या सबसे कम पाई गई है जो कि ट्रंप इफेक्ट को समर्थन नहीं देते। वहीं कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की फ्रांसिस लेसली की चिंता अब यह है कि आवेदकों में से कितने स्टूडेंट वास्तव में ऐडमिशन लेंगे, क्योंकि कई यूनिवर्सिटी की डेडलाइन तब खत्म हुई थी जब ट्रंप का ट्रैवल बैन ऑर्डर नहीं आया था।

ओरेगन यूनिवर्सिटी में इस साल बेहद कम अंतरराष्ट्रीय स्टूडेंट्स ने आवेदन दिया है। विवेल हालांकि, यह भी कहते हैं कि नई दिल्ली और बेंगलुरु के स्टूडेंट्स की चिंता पढ़ाई में आने वाला खर्च है जो कि नोटबंदी का सीधा असर है। वहीं, काउंसल ऑफ ग्रैजुएट स्कूल की अध्यक्ष सुसेन ओर्टेगा कहती हैं कि इसके लिए अन्य आर्थिक वजह जैसे सऊदी अरब में कच्चे तेलों की कीमत का कम होना और एच-1बी वीजा को लेकर अमेरिकी अनिश्चितता भी है।

साभार, जागरण

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

avatar
  Subscribe  
Notify of
%d bloggers like this: