डॉन ‘चरी’ के नाम में एमाले द्वारा संसद में हंगामा

लीलानाथ गौतम , काठमांडू ,श्रवण 22 : सुरक्षा निकाय हो या व्यावसायिक वृत्त, राजनीतिक जगत हो या सामाजिक क्षेत्र, हर ओर चरी उपनाम से परिचित दिनेश अधिकारी का आतंक और गुण्डागर्दी चिर–परिचित है । वर्षों से जारी उसका यह आतंक इसलिए नियन्त्रण नहीं हो पा रहा था कि वह एक बडे पार्टी के बड़े ही नेताओं के संरक्षण में रह कर अपना धन्दा करता था । लेकिन गत बुधबार नेपाल पुलिस के इन्काउन्टर में जब एक गोली चरी के सीने से पार हो गयी तो अपने आतंक के साथ वह इस दुनिया से विदा हो गया ।
चारी के मौत से उसchari 2के परिवार को दुख तो अवश्य हुआ होगा । लेकिन सार्वसाधारण पुलिस के इस इन्काउन्टर से खुश नजर आ रहे हैं । उनका कहना है कि बुरे कर्म का नतीजा ऐसा ही होता है ।
लेकिन इसी घटना को लेकर नेकपा एमाले ने व्यवस्थापिका संसद में हंगामा शुरु किया है । गुरुबार की व्यस्थापिका संसद में सम्बोधन करते  हुए कुछ एमाले सभासदों ने दावा किया है कि चरी का इन्काउन्टर नहीं हत्या किया गया है । एमाले सभासद राजेन्द्र पाण्डे ने आक्रोशित होकर संसद में कहा है– ‘किसी भी व्यक्ति को अपराधी के नाम में हत्या कर पुलिस संगठित अपराध कर रहा है । ऐसी ही अपराध करना है तो सभी जेल में रहे अपराधी को गोलि मार कर जेल खाली करना चाहिए ।’ पाण्डेका कहना है कि चरी को काठमांडू चक्रपथ में हत्या करके पुलिस ने भीमढुंगा पहुँचाया है । इसीतरह उन्होंने घटना में संलग्न एसएसपी पुष्कर कार्की और कुमुन्द ढुंगेल को निलम्बन कर अनुसन्धान आगे बढाने के लिए भी अनुरोध किया है । उन्होंने कहा– अगर सरकार ऐसा नहीं करेगा तो संसद की कारवाही आगे नहीं बढ़ पाएगा और संसद अवरुद्ध हो जाएगा ।
जानकारों का मानना है कि पुलिस के मोस्टवान्डेट सूची में रहे चरी लम्बे समय से विदेश में था । नेकपा एमाले धादिङ जिला क्षेत्र नं. १ का पूर्व उपाध्यक्ष रह चुका चरी  एमाले के नवें महाधिवेशन में क्षेत्रीय उपाध्यक्ष के रूप में प्रतिनिधित्व किया था । जानकारों का मानना है कि एमाले के नवें महाधिवेशन के अवसर में वह नेपाल आकर पुलिस की नजरों से छुपता नजर आ रहे था ।

लेकिन बुधबार काठमांडू और धादिङ के सीमा क्षेत्र भीमढुंगा में चरी पुलिस के एन्काउन्टर में पड़ गया । पुलिस का कहना है कि गुन्डानायके दिनेश अधिकारी उर्फ चरी और पुलिस के बीच दो तरफा फायरिङ हुआ है । कोई अपरिचित व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी कि कोई व्यक्ति मोटरसाइकिल में हथियार के साथ सवार है । उसके बाद पुलिस ने उसका पीछा किया । पुलिस का कहना है कि जब चरी को लगा कि पुलिस उसका पीछा कर रही है, तब उसने पुलिस के ऊपर फायरिङ किया । उसी क्रम में पुलिस ने जवाबी फायरिङ किया, उसी क्रम में उसकी घटनास्थल में ही मौत हो गई । गुन्डागर्दी के अभियोग में चरी इससे पहले भी ६ बार गिरफतार हो चुका था । लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण वह ज्यादा दिन पुलिस हिरासत में नहीं रह पाया था ।
चरी का शव पोस्टमार्टम के लिए त्रि वी शिक्षण अस्पताल में रखा गया है । लेकिन पारिवारिक अवरोध के कारण अभी तक पोस्टमार्टम नहीं हो पाया है । चरी की प्रेमिका खुश्वु ओली और परिवार सम्वद्ध सदस्य का कहना है कि इन्काउन्टर सिर्फ बहाना है, चरी की हत्या की गई है । इस दावी को लेकर चरी की प्रेमिका खुश्बु ओली, कुछ परिवारिक सदस्य तथा नेकपा एमाले के कुछ सभासद ने गृहमन्त्री वामदेव गौतम का ध्यानाकर्षण भी करवाया है । बिहीबार मन्त्री निवास पुल्चोक पहुँच कर उन लोगों ने छानबीन की मांग की है । समाचार स्रोत का कहना है– गृहमन्त्री गौतम छानबीन के लिए तैयार हैं । समाज में गुण्डा नायके के रुप में परिचित चरी का बचाव करते हुए गृहमन्त्री तक पहुँचने वाले नेताओं में एमाले धादिङ क्षेत्र नं. ३ के सभासद राजेन्द्र पाण्डे, दूसरे नेता गंगालाल तुलाधर, धादिङ क्षेत्र नम्बर १ के सभासद घनवहादुर घले, क्षेत्र नम्बर २ के सभासद गुरु बुर्लाकोटी, पार्टी केन्द्रीय सदस्य खेम लोहनी, जिल्ला अध्यक्ष भूमी त्रिपाठी आदि हैं ।
कौन है चरी ?
धादिङ जिला मूल निवासी चरी गुण्डागर्दी क्षेत्र में परिचित नाम है । वि.सं. २०६० साल से उसने इस क्षेत्र में प्रवेश किया है । उस समय चरी चर्चित गुण्डा नायके कुमार घैंटे के साथ रह कर काम करत था । घैंटे नेपाली कांग्रेस के नेताओं की संरक्षण में रह कर अपने धन्दा चलाता था । जब चरी अपने आप में ही परिपक्व होता गया तब उन्होंने घैंटे का साथ छोड़ दिया और अपने ही नेतृत्व में एक अलग समूह गठन किया । उसके कुछ समय बाद वह एमाले पार्टी के सम्पर्क में पहुँचा और एमाले ने भी उसको संरक्षण दिया । चरी का मुख्य कार्यक्षेत्र ठमेल, बालाजु और नयाँ बजार माना जाता है । धादिङ में भी वह अपना धन्दा चलाता था । एमाले नेता राजेन्द्रप्रसाद पाण्डे की संरक्षण में धादिङ में वह ठेक्का पट्टा का काम करता था । यार्सागुम्बा तस्करी, अपहरण, चन्दा वसूली आदि कार्य भी उसकी प्राथमिकता में थे । जानकारों का मानना है कि काठमांडू के क्यासिनो भेनस में भी उसने निवेश किया है ।
वि.सं. २०७० साल में गैंडा की खाल तस्करी में संलग्न रहते समय पुलिस ने चरी को पकड़ा था । लेकिन एमाले पार्टी के दबाव में आकर पुलिस उनको छोड़ने के लिए बाध्य हुई । उस समय एमाले के वर्तमान अध्यक्ष केपी ओली ने चरी का बचाव किया था । जिसके कारण पार्टी के बहुत सदस्यों ने पार्टी में डॉनवाद हावी कराने का आरोप भी ओली के ऊपर लगाते हैं । लेकिन ओली का कहना कुछ और ही है । उनका मानना है कि समाज में आतंक मचा रहे कुछ गुण्डा को सुधार कर समाज सेवा के लिए पार्टी में प्रवेश दिया है । चरी का संरक्षण सिर्फ ओली ने ही नहीं किया है । पूर्व अध्यक्ष झलनाथ खनाल, नेता राजेन्द्र पाण्डे का हाथ भी उन के सर पर था ।
चरी वि.सं. २०६८ वैशाख १३ गते गिरफ्तार हुआ था । उस समय एमाले तत्कालीन अध्यक्ष झलनाथ खनाल प्रधानमन्त्री थे । चरी गिरफतार के विरोध में जब एमाले भातृ संगठन ने आन्दोलन शुरु किया तो प्रधानमन्त्री खनाल के अप्रत्यक्ष मिलभगत में ही चरी उस समय पुलिस हिरासत से बाहर होने में सफल हुआ था । उस समय चरी के ऊपर यह आरोप था कि १७ करोड़ की ठेक्का में उन्होंने ५१ लाख फिरौती लिया है । उक्त रकम सहित काठमांडू आ रहे चरी को बीच रास्ते में ही पुलिस ने गिरफ्तार किया था । उनके समूह में रहे अन्य ११ एमाले कार्यकर्ता भी गिरफ्तार होने के कारण धादिङ एमाले ने पुलिस के विरुद्ध सडक अवरुद्ध करते हुए आन्दोलन शुरु किया था ।chari
चरी के ऊपर २०७० आषाढ २२ में गोली प्रहार हुआ । जो उनके ही समूह से अलग हुए राधे नाकक समूह नामक समूह था । उस समय गोली से घायल चरी अस्पताल भर्ती हो गया । लेकिन पुलिस से बचने के लिए वह अस्पताल से ही फरार हो गए थे । उस से पहले वह पुलिस हिरासत से ही फरार होने में सफल हुआ था । चरी के ऊपर अपने ही पार्टी नेता तथा तत्कालीन ऊर्जामन्त्री गोकर्ण विष्ट के ऊपर आक्रमण कराने का आरोप भी लगा है । पार्टी के भीतर हो रहे डॉन राजनीति के विरुद्ध में बोलने के कारण उनके ऊपर आक्रमण हुआ था ।
इसके अलवा मोडल खुश्बु ओली के साथ जारी प्रेम और रोमान्स के कारण भी चरी चर्चा में था । जानकारों का मानना है कि बहुत बार प्रेमिका ओली ने ही चरी को पुलिस से बचाया है । ओली और चरी जल्द ही विवाह करने वाले थे, लेकिन पुलिस ही उनके लिए बाधक बनते आ रहे थे । मोडल ओली सन् २००५ में पहली बार मिस टीन में सहभागी हुई थी । लेकिन उन्होंने दूसरी बार सन् २००६ में उपाधि अपने हाथ लिया । वही मोडल ओली के कारण भी डॉन चरी के शव पोस्टमार्टम नहीं हो पा रहा है । उनका कहना है कि कुछ गुण्डा के कहने पर ही पुलिस ने चरी की हत्या की है ।

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