तमलोपा वैचारिक क्रांति हेतु पूर्णतः मधेश में केन्द्रित अभियान चला रही हैं : डॉ.सुरेन्द्र झा

डॉ. सुरेन्द्र कुमार झा, काठमांडू , ६ माघ | मधेश में बृहत् राजनीतिक शक्ति का निर्माण हो एवं सत्ता नहीं, प्रभु सत्ता की प्राप्ति इन्हीं बुनियादी उद्देश्यों पर केन्द्रित तराई मधेश लोकतांत्रिक पार्टी की स्थापना २०६४ पौष १३ गते हुई । बृहत् राजनीतिक शक्ति का निर्माण का आशय यह है कि मधेश एक पुराना समाज है और इसकी वजह से यहां वैचारिक, साँस्कृतिक, राजनैतिक, धार्मिक एवं क्षेत्रीय विविधताएं देखने को मिलती है । इन सारी विविधताओं को गोलबंद कर मधेश में एक बृहत् राजनीतिक शक्ति का निर्माण हो । इसी प्रकार सत्ता नहीं, प्रभु सत्ता का आशय यह है कि मधेशी को अपनी धरती, अपना आकाश, जल, जंगल आदि प्राकृतिक स्रोतों पर अपना स्वशासन कायम हो । इसकी प्राप्ति हेतु संघीयता ही एक मॉडल हो सकती है । और इसी के जरिये हम प्रभु सत्ता या पूर्ण अधिकार प्राप्त कर सकते हैं । इन्हीं बुनियादी बिचारों की प्राप्ति हेतु हमलोग आरम्भ से ही आंदोलनरत हैं । अभी तीसरा आंदोलन जारी हैं । हमलोग बिगत चार महीने से वार्ता के जरिये संसदीय खेल में उलझे हुए हैं । संसद में हमारा प्रतिनिधित्व जितना होना चाहिए था, उतना नहीं हो सका । इसी रस्साकशी में हमे बलिदानी भी देनी पड़ी । छह दर्जन से अधिक मधेशियों को शहादत देनी पड़ी । हजारों नेता तथा कार्यकर्ता घायल हुए और अभी भी तीन सौ से अधिक नेता तथा कार्यकर्ता जेल में हैं ।

डॉ. सुरेन्द्र कुमार झा

वार्ता के क्रम में हमलोग काठमांडू केन्द्रित हो गए जिससे मधेश में राजनीतिक शून्यता की अवस्था आ गयी । आंदोलन के दौरान तत्कालीन सरकार द्वारा मधेशियों पर नृशंस रुप से दमन किया गया, हत्या की गयी । इस स्थिति में जनता में निराशा की भावना पैदा हुई । उस पीड़ा को बांटने के लिए मधेशी जनता के बीच जाने का दायित्व बोध हुआ । दूसरी तरफ मधेश बिरोधी पार्टीयां मधेश में प्रवेश करने लगी और मधेशियों को वर्गलाने का प्रयत्न किया । इनमें सबसे आगे एमाले पार्टी ही रही हैं । इसको भंडाफोड़ करने की आवश्यकता महसूस हुई । इन्हीं लक्ष्यों पर केन्द्रित मेची से महकाली तक के २४ जिलों के जिलाध्यक्ष, पदाधिकारी एवं सदस्य सम्मिलित पार्टी मूख्यालय में दो दिवसीय बैठक हुई । बैठक से पार्टी को एक बृहत् राजनीतिक अभियान लेकर मधेशी जनता के बीच र समीप जाने का निर्णय हुआ । इसी अभियान के तहत पार्टी अभी पूर्णतः मधेश में केन्द्रित हैं । अगहन एक गते से पौष पन्द्रह गते तक यह अभियान संचालन करने का तय हुआ था । अभी पुनः एक महीने के लिए इजाफा किया गया हैं ।
इसी अभियान के तहत मधेश में प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है । प्रशिक्षण में खासकर वार्ता के क्रम में पार्टी की क्या भूमिका रही रु पार्टी की क्या क्या रणनीतियां है रु आदि सवालो पर यह प्रशिक्षण केन्द्रित है । इसी प्रकार मधेशी समाज में विद्यमान कुरीतियों एवं बिसंगतियों को हटाने लिए पार्टी की भूमिका क्या हो सकती है रु पार्टी के जरिये इन्हें कैसे उन्मूलन किया जा सकता है रु इसलिए मधेशी, दलित आदिवासी जनजाति, पिछड़ावर्ग, सीमांतकृत, अल्पसंख्यक के साथ साथ मजदूर, किसान, युवा, महिला एवं बुद्विजीवियों को प्रशिक्षण के जरिये पार्टी मधेश में वैचारिक क्रांति लाने हेतु प्रयत्नशील हैं ।
हमे खुशी इस बात का है कि आज मधेश जाग्रत हो गया है । मधेश को कोई बर्गला नहीं सकता है । मधेशी जनता ने ९ महीने तक जो शांतिपूर्ण रुप से आंदोलन किया, उन्हें कतई पश्चाताप नहीं हैं । उनका एक ही उद्देश्य रहा है कि किसी से कहने से हम अलग होने वाले नहीं हैं । हमारी भूमि, हमारी संस्कृति, हमारी सभ्यता एवं हमारी भाषा, ये सारी निधियां हमारी हैं । देश हमारा है और रहेगा । देश कि शासन सत्ता में अपनी भागीदारी एवं समानता के अधिकार की प्राप्ति हेतु हम सदैव संघर्ष करने के लिए तैयार हैं और रहेगें । मधेश में जारी अभियान के दौरान यही मनोवृत्ति देखी गई ।

मधेश में जारी अभियान के तहत यह भी देखा गया कि खून से खून का रिश्ता जोड़ो, तमलोपा से रिश्ता जोड़ो । कांग्रेस, एमाले से रिश्ता तोड़ो, तमलोपा से रिश्ता जोड़ो । यह वहां की जनता के स्वघोषित नारा है । यह नारा मेची से महाकाली तक गुंजायमान् हो रहा है । ज्यादा तादाद में लोग तमलोपा से जुड़ रहे हैं । हमारे अध्यक्ष जी की स्वच्छ छवि एवं उनकी ईमानदारी का प्रतिफल आज पार्टी को मिल रहा हैं ।
(डॉ. सुरेन्द्र कुमार झा तराई मधेश लोकतांत्रिक पार्टी के केन्द्रीय सदस्य तथा लोकतांत्रिक बुद्विजीबी संघ के महासचिव हैं ।)

 

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