तराई -मधेश में चुनाव होना नामुमकिन है : परमानन्द सिंह थारू (मुफस्सल की आवाज)

परमानंद सिंह थारू तेरहौता, सप्तरी गांव इकाई कमेटी के नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष हैं

परमानंद सिंह थारू तेरहौता, सप्तरी गांव इकाई कमेटी के नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष हैं

राजविराज , २४ मार्च | लोकतंत्र को व्यापक रूप से संस्थापित करने का तात्पर्य यह है कि देश की शासन व्यवस्था से एक भी नागरिक अपने को अलग महसूस न करे । नागरिक अधिकार की बहाली देश के कोने–कोने में बसे मधेशी, थारू, दलित, अल्पसंख्यक, पिछड़ावर्ग आदि समुदायों के लिए समान रूप में हो । राष्ट्रीय पटल पर मधेशी, थारू आदि समुदायों की पहचान हो और उनकी भाषा, संस्कृति, परम्परा व वेशभूषा को सम्मान मिले । कोई भी जाति, समुदाय शासित और शोषित जिन्दगी जीना पसंद नहीं करना चाहते । सरकार को यह बात अच्छी तरह से समझ लेनी चाहिए कि इक्कीसवीं सदी के मानव को चाहिए स्वतंत्रता । वे स्वतंत्रता हैं — वैयक्तिक स्वतंत्रता, राजनीतिक स्वतंत्रता, आर्थिक स्वतंत्रता, सामाजिक स्वतंत्रता, भाषिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक स्वतंत्रता, क्षेत्रीय स्वतंत्रता आदि ।
सदियों से नेपाल में ब्राह्मण, क्षत्रिय और नेवार समुदायों का शासन रहा है । ये समुदाय सदियों से मधेशी , थारू, दलित आदि समुदायों को दबाकर रखती आयी र्है । जबकि आज मधेशी, थारू, दलित किसी भी कीमत पर किसी खास जाति विशेष, वर्ग या समुदाय के प्रभुत्व को स्वीकार नहीं करते । देश में व्याप्त आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषिक, एवं राजनीतिक शोषण एवं विभेद को अंत कर शासन व्यवस्था के संचालन में सभी जाति, वर्ग, समुदाय की भागीदारी ही वर्तमान समय की मांग है, तराई–मधेश जनआंदोलन का ध्येय है ।
जहां तक सवाल है चुनाव का तो, मेरे ख्याल से संविधान संशोधन होने से पूर्व मधेश में चुनाव होना नामुमकिन है । अगर पंजीकृत संविधान संशोधन विधेयक को दरकिनार कर तराई–मधेश में चुनाव करवाया जाता है, तो देश में पुनः द्वन्द्व होगा । बहरहाल यह जरुरी है कि सियासी पार्टी मधेशी एवं जनजाति पार्टियों की मांगें पूरी करे ।

(परमानंद सिंह थारू तेरहौता, सप्तरी गांव इकाई कमेटी के नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष हैं ।)

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