Wed. Sep 19th, 2018

तरु पल्लव सी मैं : मनीषा गुप्ता

यूँही ✍✍✍तरु पल्लव सी मैं ❤

ह्म्म्म , यूँही चलते चलते कब थामा तुमने हाथ समझ ही न सकी बस महफूज़ करने लगी खुद को कब तुम दिन ब दिन
आदत बन गए कब बदल दी तुमने मेरे सोचने की राहें पता ही न चला बस सफर मैं और तुम जैसे किसी मंजिल की कोई तलाश ही नही बस एक विस्वास ताउम्र का रिश्ते का कोई बंधन ही नही बस समझना एक दूसरे के एहसास को न कोई चाहत न कोई शिकायत बस जिंदगी खूबसूरत सी हो गई मैं कहती तुम सुनते तुम कहते मैं सुनाती 😊 देखा आ गया न सच ह्म्म्म यही तो होता था मैं ही अक्सर सुनाती और तुम सिर्फ सुनते , सुनते मेरी बचकाना सी बाते  और हमेशा मुस्करा कर कह उठते बहुत ताने मारती हो तुम  , पर सच कहूँ यह सुनने के लिए मैं अक्सर एक छोटी सी बात को घुमा क्र कहती न जाने क्यों कभी सोच ही नही पाई की मेरा यह अपना पन कब अखरने लगेगा तुम्हे और मैं जाने अनजाने तुम्हारे एहसासो को अपनी वसीयत बना बैठी😢

पर पल्लव ✍✍✍

जब चलने की पहल की साथ तो कुछ पल रुक कर शिकायत भी कर लेते कम से कम कह पाती की एक विश्वास की वो डोर तुम संग बाँध ली थी जिसमे कभी कोई सीमा रेखा ही नही खींच पाई बस ठीक उसी तरह खुद को बच्चा समझने लगी और तुम्हे अपनी वो दिवार जो मेरी मासूमियत को हर एक नज़र से बचाएगी तुम कहते तो सही साथ चलने के लिए साथ हुआ था तुमने सोचा कैसे निभाउंगा तुम्हे , तो सुनो अपने अंदर की एक परिपक्व औरत को मरने नही दिया कभी मैंने बस एक एहसास जो छूट गया था कहि तुम संग जीने लगी ऐसा नही की तुम्हारे जाने से कोई खालीपन नही आया पर सच कहूँ तो खुश हूँ अब तुम्हे ताने नही सुनने पड़ेंगे कोई तुम्हे रोकेगा नहीं तू उस दुनिया के संग चल सकोगे जो तुम्हारे लिए बनी है

बस 😐

एक बार कर लेते उस सफ़र का यकीं और रुक कर धीरे से हाथ छुड़ा लेते तो तुम्हे जाते हुए देख पाती …✍✍

😐 कब साथ ताउम्र का
नसीब माना था …..

पल दो पल की खुशियो
को समेट एक खुबाब गाह
बना डाली थी…..

तेरे जाने के बाद जिना था जिन लम्हों को
उन लम्हों की एक वसीयत बना डाली थी …

की जर्रे जर्रे में बसाने लगी थी आहट तेरी
सुन तुझ संग जिंदगी यूँ गुजारी थी ……

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of