तुम सिर्फ करते रहो करने की बातें (कविता) : पुजा गुप्ता

 
पुजा गुप्ता

पुजा गुप्ता  (दुहवी)

तुम सिर्फ करते रहो करने की बातें
 
तुम सिर्फ करते रहो करने की बाते,मैं बिना कहे सच करके दिखाउंगा।
तुम स्वप्न सजाते रहो सुनहले आसमान का,मैं धरा पर इन्द्रधनुष लाउंगा ।।
बगियन के फूल चुनते हैं सभी या टहल मार कर निकलते हैं,
शायद ही कोई ऐसा होता है,जो इस जग को महकाने के लिए पुष्प बन खिलते हैं।
तुम सिर्फ करते रहो गुल गुलशन की बातें, मैं खुशबू बनकर हर दिल में बस जाऊँगा ।।
तुम सिर्फ करते रहो…………………………………………………………..।
रास्ते के पत्थर को सभी ठोकर मार कर निकलते हैं, पर ऐसे हर पत्थर को अपनी
मंजिल तक पहुंचाउंगा ।
तुम फंसे रहो जाति, धर्म,समप्रदाय के चक्कर में,मै सबके मन से संकुचित धारणा
को निकाल कर भाईचारा लाउंगा ।
भले ही मेरे पास तेल,दिया ,या बाती नही हैं तो क्या हुआ ,मैं अपने साहस के दम पर सबके मन में ढाई अक्षर का पे्रम दीपक को पुनः जलाऊँगा ।
तुम करते रहो……………………………………………।
तुम हमेशा करते रहे अवसर की बातें, मैं चुनौंतियों में भी अवसर को ढूँढ कर लाउंmगा।
तुमने हमेशा करते हो कल करुँगा , कल करुँगा, करने की बातें,
तुम चले भी जाओगे सिर्फ सोचते… सोचते,
तुमने सिर्फ देखा हैं अपने अभावों को पर मैं अपने त्याग और आत्मविश्वास के दम पर असंभव को भी संभव करके दिखाऊंगा ।
तुम पलटते रहो इतिहास के पन्नों को, मैं लोगो के दिलो में अमर बनकर इतिहास के पन्नों पर लिखा जाऊंगा ।तुम र्सिफ करते रहो …………………………..।
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