तेरी यादों का साथ

-किशोर विश्वकर्मा

कुछ दूर ही सही
तेरे साथ चलने की
तमन्ना थी मेरी ।
कुछ पल ही सही
तेरे साथ जीने की
तमन्ना थी मेरी
कुछ रात ही सही
तेरा साथ पाने की
तमन्ना थी मेरी
ख्वाबों में ही सही
तेरे साथ मरने की
तमन्ना थी मेरी
मगर जिन्दगी
अपनी हो न सकी
तुम्हारी याद
बहुत सताती है
तुम्हारी साथ
बहुत याद आती है
तेरे न होने का एहसास
बहुत रुलाती है मुझे
जुदाई नसीब है मेरा
पर काफी है जीने के लिए
कुछ पल का साथ ही
हालः राउण्ड रक, अमेरिका

 

Tagged with
loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz