थम नहीं रहा, वन माफिया का कहर :विनय दीक्षित

विनय दीक्षित

विनय दीक्षित

वैसे तो कहने को तराई क्षेत्र में राष्ट्रपति चुरे वन संरक्षण योजना चल रही है, जिस योजना में वन क्षेत्र से बालु, गिट्टी, काठ, वनपैदावार, जड़ी–बुटी आदि का दोहन वर्जित बताया गया है । वन कार्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन भी कागजों में सीमित रहता है, जिसका फायदा वन माफिया खुले आम लेते हुए नजर आते हैं ।
पिछले एक दशक से जिले में बढ़ रहे कटान पटान और बाढ़ की समस्या के कारण विस्थापित होने वालों की तादाद ज्यादा है, जिले का होलिया गाबिस पूर्ण रूप से विस्थापित क्षेत्र के रूप में माना जाता है, ८ हजार जनसंख्या वाला यह गाबिस एक दशक से क्रमिक रूप से विस्थापन की ओर है । पिछले दिनो जो तथ्याँक सामने आया, उससे यह भी पाया गया कि क्रमिक रूप से बाढ़ प्रभावित गाबिस का भी तथ्याँक बढ़ता जा रहा है । हाल फत्तेपुर, गंगापुर, कम्दी, बनकट्टी, मटेहिया, बेतहनी क्षेत्र से लोगों के विस्थापित होने और वन क्षेत्र में अवैध रूप से स्थापित होने का क्रम तीब्र है ।For Binay Dichit (2) For Binay Dichit (1)
गत श्रावण २९ गते गते जिले में आई भीषण बाढ़ के कारण पूरा जिला प्रभावित  हुआ, जिले के प्रशासनिक निकाय ने तत्कालीन स्थिति सम्हालने के लिए प्रमुख जिला अधिकारी जीवन वली ने सामुदायिक वन में शरण लेने की बात कही, बस यही वजह है कि बाढ़ के नाम पर सामुदायिक ही नहीं राष्ट्रीय वन क्षेत्र का दायरा भी माफिया के नियन्त्रण में आ गया ।
२०७१ साल में जिला वन कार्यालय ने जिले में अवैध वन कब्जा हटाने का अभियान संचालन किया । ३ हजार अवैध कब्जा करने वाले वन माफिया को वन कार्यालय ने जंगल क्षेत्र से हटाया लेकिन वह दशा में सुधार नहीं आया जो निरन्तर जारी है । पुलिस तथ्याँक में हर दिन राप्ती नदी तथा जंगल क्षेत्र से, करीब ४ सौ ट्राली बालु, मोरंग, और पत्थर अवैध रूप से नेपालगन्ज पहुँचाया जाता है । जिला ट्राफिक कार्यालय बाँके के अनुसार कृषि कार्य के लिए दर्ता टैक्टर सिर्फ ढुवानी सम्बन्धी काम करते हैं । ट्राफिक प्रमुख गणेश मेहता के अनुसार वन पैदावार चेक करने का काम बन कार्यालय का है, उन्हाेंने कहा हमारा काम सिर्फ ट्राफिक व्यवस्थापन का है, इससे कौन क्या लेकर आता यह मेरा विषय नहीं है ।
पुनरावेदन अदालत नेपालगन्ज ने जब आदेश दिया कि वन सुरक्षा बढ़ाना जरुरी है तो वन फौरन हरकत में आया और जिले भर में वन माफिया को हटाने का अभियान संचालन किया । वन अतिक्रमण नियन्त्रण रणनीति २०६८ के अनुसार वन कार्यालय ने अतिक्रमित क्षेत्र में अभियान तो चलाया लेकिन लोग अभी भी कारवाही से असन्तुष्ट हैं । बाँके बैजापुर, कोहलपुर, कुसुम, फत्तेपुर, गंगापुर, मटेहिया, नरैनापुर, कालाफाँटा, लक्ष्मणपुर और कटकुईंया गाबिस में १ हजार ८ सय ३६ हेक्टर वनक्षेत्र अभी भी कब्जा में है । वन माफिया का एक समूह जो हमेशा वन क्षेत्र के जमीन पर नजर रखता है । गंगापुर निवासी सुभाष कुमार धोबी ने बताया कि वन क्षेत्र में प्लाटिंग कर जमीन बिक्री की जा रही है । वन क्षेत्र में हुए माफियाकरण के विषय में धोबी ने वन कार्यालय बाँके और जिला प्रशासन में कारवाही भी आगे बढाई । धोबी के अनुसार १७ कठ्ठा जमीन गंगापुर क्षेत्र में प्लाटिंग कर बिक्री की गई है । स्थानीय कुछ लोगों ने वन क्षेत्र के बदले अपनी निजी जमीन भी अदला बदली की ।
कैसे बढ़ी समस्या ?
२०७० श्रावण २९ गते के बाढ़ के बाद अचानक लोगों का अक्रोश बढ़ा और हजारों लोगों ने वन क्षेत्र को अपना आश्रय स्थल बनाया ।
बाढ़ से २ हजार ६ सौ ६ घर परिवार वन क्षेत्र में थे । जिला वन कार्यालय के अनुसार बाढ़ के उस संख्या में १ हजार १ सौ २३ और बढ़ गए । गैर बाढ़ पीडि़त की जो तादाद बढ़ी उससे और ज्यादा समस्या हो गयी जिला वन कार्यालय बाँके के वन अधिकृत बद्दरुदीन खाँ ने कहा, हम फिर से तैयारी कर रहे हैं माफियाकरण के खिलाफ ऑपरेशन चलाने का । अभी हम सिर्फ काठ तस्करी के अभियान में हैं उन्होंने कहा, पिछले दिनों भारी भरकम रूप से लोगों को गिरफ्तार किया गया है ।
५ वर्ष उसी क्षेत्र के इलाका प्रहरी कार्यालय भगवानपुर के इन्चार्ज रह चुके गोपाल धमला का भी काठ वन कार्यालय ने बरामद किया । गंगापुर गाबिस निवासी केशवराम गोडिया, मटेहिया–२ निवासी वित्तन खा, मटेहिया–३ के नन्के नाउ, मेराज और करिम नाउ, को वन कार्यालय के अधिकारियों ने ६८ थान चिरान काठ सहित पिछले हप्ते गिरफ्तार किया ।
फत्तेपुर गाबिस ६ निवासी हरिराम शर्मा का टैक्टर और ३८ क्युफिट अवैध काठ सहित जिला वन की टीम ने गिरफ्तार किया । तत्काल ही इलाका प्रहरी कार्यालय भगवानपुर ने १७ गिण्डा बरामद कर जिला वन कार्यालय को सौंपा । सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण नेपाल में ही नहीं भारतीय भारतीय क्षेत्र में काठ तस्करी होती दूसरे वन अधिकृत अनिरुद्ध यादव ने बताया तस्करी का माहोल बहुत ही तीब्र रूप से बढ़ा है ।
फत्तेपुर, बिनौना और गंगापुर में १० सामुदायिक वन क्षेत्र में १ हजार १ सय २३ घर परिवार ने १ सय २२ हेक्टर वन क्षेत्र कब्जा किया है । यादव ने बताया समस्या समाधान के लिए वन कार्यालय पूर्ण रूप से लगा हुआ है ।
बनकटवा में ९ हेक्टर, कम्दी में ८.३, कोहलपुर में २, सितापुर में २, मटेहिया में ५०, लक्ष्मणपुर में २० सहित वन ने १ सौ ७५.८ हेक्टर   वन कब्जा हटाया । यादव ने कहा कब्जा के अनुपात में यह बहुत कम है लेकिन शुरुआत सही है । आर्थिक वर्ष २०७०,०७१ में वन चोरी शिकारी, तस्करी सम्बन्धी २३ मुद्दा कार्यालय में और १४ मुद्दा जिला अदालत बाँके में दर्ता हुए । विभिन्न मुद्दों में १ सौ ३२ लोगो पर वन कार्यालय ने कारवाही चलाया । २०७१,०७२ में १३ मुद्दा दर्ता और ६४ लोगों पर कारवाही हुई है ।

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