दबंग खरेल का रूतबा:-

जीतेश जीतू

पिछले महीने नेपाल में पुलिस अधिकारी सुडान घोटाला की वजह से चर्चा में रहे। इस घोटाला में नेपाल पुलिस के तीन पर्ूव प्रमुख सहित तीन दर्जन अधिकारी फंसे हैं। लेकिन इन सबके बीच नेपाल पुलिस का ही एक ऐसा अधिकारी जो कि हमेशा से अपनी कार्यशैली के लिए जाना जाता है, अपनी इमान्दार छवि के लिए जाना जाता है, जिसका नाम सुनकर ही अपराधी गुमनाम हो जाते हैं, पुलिस अधिकारी भी जिनका नाम सुनकर ही थर्रर्ाा हैं, पुलिस के दलाल पुलिस चौकी के आसपास भी नहीं फटकते, और नेता जिसे फोन पर बात करने से भी घबराते हैं ऐसा है उस एसपी का रूतबा।
जी हां हम बात कर रहे हैं नेपाल पुलिस के सबसे चर्चित पुलिस अधिकारी रमेश खरेल का। इस समय पर्सर्ााजला के एसपी रहे खरेल की दबर्ंगई से उस क्षेत्र ही नहीं बल्कि आसपास के सभी असामाजिक तत्व या तो अण्डरग्राऊण्ड हो गए हैं या फिर पुलिस हिरासत में डाल दिए गए हैं। जिस दिन सरकार ने रमेश खरेल को वीरगंज भेजने का फैसला किया उसी दिन से वहां ५० प्रतिशत अपराध और अपराधी खुद ही कम हो गए हैं। उस जिले के पुलिस वाले जो कि मोटी मोटी रकम देकर अपना पोष्टिंग सीमावर्ती क्षेत्र में किया हुआ था वो सभी अपना खैर मनाने लगे।
खरेल की एक खास बात यह है कि वह अपराधी और असामाजिक तत्वों को ठीक करने से पहले पुलिस वालों को अपनी ड्यूटी इमान्दारी के साथ निभाने को कहते हैं। पर्सर्ााहुंचते ही खरेल ने सबसे पहले वहां पुलिस वालों को हिदायत दी कि वो अपना काम इमान्दारी से करें। ना सिर्फहिदायत दी बल्कि कुछ पुलिस अधिकारियों को उन्होंने रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए पकडा तो तुरन्त ही उसे हिरासत में लेकर सस्पेंड कर दिया। वीरगंज के सीमावर्ती इनर्वा पुलिस चेक पोष्ट के इंचार्ज इसका ताजा उदाहरण है।
खरेल के पर्सर्ाााने से उस क्षेत्र के नेताओं को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पडÞ रहा है। अब तक अपने सभासद और मंत्री होने के रूतबे से अपना धौंस जमाकर कोई भी छुटभैया नेता एसपी से कह कर किसी को भी छुडÞा लेता था लेकिन अब उनकी एक भी नहीं चलती। इस संबंध में वीरगंज के कुछ रोचक प्रसंग हैं। पुलिस हिरासत में रहे एक आदमी को छुडÞाने के लिए एक पर्ूव मंत्री ने खरेल को फोन किया तो खरेल ने कहा कि वो उस आदमी को छोडने के लिए तैयार है बशर्ते उसके बदले आपको हिरासत में रहना होगा। इतना ही नहीं अपने एक कार्यकर्ता जो कि पुलिस हिरासत में था उसे छुडाने के लिए कांग्रेस के दो सभासद जिला पुलिस मुख्यालय पहुंचे। खरेल ने कहा कि वह उनके कार्यकर्ता को छोडने को तैयार है लेकिन उसकी एक शर्त है कि आप दोनों सभासदों में से किसी एक को पुलिस हिरासत में रहना होगा।      ऐसी कई बाते हैं जिससे खरेल अन्य पुलिस अधिकारियों से अलग हैं जिस कारण वहां की आम जनता में उनकी छवि दबंग और सिंहम पुलिस अधिकारी के रूप में हो रही है। एक बार खरेल अपनी पत्नी और दोनों बच्चों के साथ वीरगंज स्थित घडिअर्वा पार्क में घुमने गए। वहां मौजूद कर्मचारी बताते हैं कि खरेल पहले पुलिस अधिकारी हैं जो कि टिकट लेकर अन्दर घुसं। एक आम नागरिक के तरह उन्होंने पैसे देकर बोटिंग भी की और बिना किसी प्रकार का बखेडÞा किए चलते बने। इस दौरान उनके सारे सुरक्षा गार्ड को उन्होंने बाहर ही रहने को कहा था।
ऐसी कई छोटी छोटी घटनाएं हैं जिससे खरेल को काफी लोकप्रियता मिली है। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब वह किसी कार्यक्रम में सिरकत करने पहुंचते हैं तो लोगों की इतनी भीड उन्हें देखने के लिए लग जाती है जैसे कि वो बाँलीवुड के कोई सितारे हों। और यह सच्चाई भी है। वीरगंज में उन्होंने कई ऐसे कारनामे किए हैं जिसकी उम्मीद वहां की जनता ने कभी नहीं की थी। किसी भी सिमावर्ती जिले में जब अपराध बढता है तो वहां मौजूद पुलिस अधिकारी के पास एक रटा रटाया जवाब रहता है-भारतीय क्षेत्र में अपराधियों को पनाह दी जाती है उन्हें हथियार मुहैया कराया जाता है।  हम कुछ नहीं कर सकते हैं यह दो देशों का मामला है। यह सब बात कह कर दूसरे पुलिस वाले अपनी कमजोरी को छुपाते नजर आते हैं। लेकिन खरेल ने यह साबित कर दिया है कि यदि आप इमान्दारी के साथ किसी काम में लगे तो आपको कोई सीमा नहीं रोक सकती है।
भारत में छुपकर बैठे अपराधी और सशस्त्र समूह के नेताओं को कैसे बिल से बाहर निकलवाया है। खरेल ने सीमावर्ती देश के पुलिस अधिकारी से अपराधी को पकडÞने की मदत मांगी तो ना सिर्फमदत मिली बल्कि भारतीय सीमा में जाकर उस अपराधी को पकडने में वो सफल भी रहें। भारतीय सीमा में रहकर नेपाल में आपराधिक गैंग चलाने वाले को भी खरेल ने अपनी पूरी प्लानिंग के साथ पकडÞा।  इसके लिए उन्होंने कभी यह बहाना नहीं बनाया कि अपराधी भारत में छुप कर बैठा है तो उसे कैसे पकडेंÞ।
वीरगंज में पोष्टिंग पाने वाले अन्य पुलिस अधिकारी किस तरह वहां अपनी पोष्टिंग करते हैं यह अच्छी तरह सभी जानते हैं। इसलिए जब उनको वहां नजराना मिलता है तो अपराध बढेगा ही। अपराधी खुलेआम घुमेंगे ही। और तब कोई घटना होती है तो ऐसे ही भ्रष्ट पुलिस अधिकारी किसी ना किसी तरह का बहाना बनाते नजर आते हैं लेकिन खरेल के साथ ऐसा कुछ नहीं है। उनकी सूझबूझ और प्लानिंग की वजह से कई अपराधी पकडे गए हैं।
खरेल पर कई तरह के आरोप उनके आलोचक लगाते हैं। जैसे कि अच्छे अच्छे लोग खरेल पर माओवादी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हैं लेकिन जिस दिन खरेल ने हत्या और कई संगीन जर्ुम में फंसे माओवादी केन्द्रीय सल्लाहकार जालिम मियां को धर दबोचा तब जाकर उनके आलोचक भी शान्त हुए। कई हत्या में वांछित जालिम मियां को छोडने के लिए भी माओवादी हेडक्वार्टर से कई फोन गए। लेकिन खरेल ने एक ना सुनी। उन्हें लग रह था कि जालिम को छुडाने के लिए गृह मंत्रालय से भी दबाब पडÞ सकता है तो फटाफट उसे अदालत ले जाकर न्यायिक हिरासत में भिजवा दिया।
खरेल की एक और कारनामें का लोग कायल है। तर्राई में सशस्त्र समूह चलाने वाले एक गिरोह जिसका अधिकांश जिलों में प्रभाव था और सरकार के साथ वार्ता में आने के बावजूद वह समूह फिर से भूमिगत हो गया था। खरेल ने उस समूह के मुखिया को पकडÞने के लिए उसके बेटे को ही पकड लिया और उसे मारने की धम्की दी। आखिर कार बेटे के मोह में सशस्त्र समूह के मुखिया ने तुरन्त युद्धविराम की घोषणा करते हुए वार्ता कमिटी बनाई। भूमिगत जीवन से बाहर आए और सरकार से वार्ता भी की।
खरेल के इन कारनामों से यह बात तय है कि यदि पुलिस वाले इमान्दारिता से अपनी ड्यूटी को अंजाम दे तो कुछ भी असंभव नहीं है। और खरेल ने यह कर दिखाया है। चाहे वो पोखरा में रहे हों या काठमाण्डू में या फिर अभी पर्सर्ााें हर जगह उन्होंने अपना लोहा मनवाया है। किसी भी काम के लिए उन्होंने कभी भी बहाने नहीं बनाए बल्कि अपनी सूझबूझ से उसे अंजाम तक पहुंचाया।

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