दिल्ली की पारवहन क्रान्तिः मेट्रो ट्रेन

बिम्मी शर्मा:नेपाल के प्रधानमंत्री श्री केपी शर्मा ओली ने ५ साल के अंदर देश (राजधानी) में मेट्रो ट्रेन दौड़ाने की बात कही थी । पर क्या जीभ की तरह तीव्र गति से नेपाल में मेट्रो ट्रेन दौड पाएगी ? शायद नहीं, पिछले सप्ताह भारतीय विदेश मंत्रालय के निमंत्रण में नेपाल के विभिन्न मीडिया में काम करने वाले हम १५ पत्रकारों को दिल्ली और मुंबई का भ्रमण कराया गया । इस भ्रमण के तहत दिल्ली मेट्रो का अवलोकन भी शामिल था । भारत सरकार द्वारा ४५ साल पहले देखे गए सपने को दिल्ली की छाती में मेट्रो के रूप में सांप की तरह सरपट दौड़ते हुए देखना अपने आप में अदभुत अनुभव था । भारतीय इन्जीनियर ई. श्रीधरन ने ईस्वी सन १९७० में भारत में मेट्रो ट्रेन को शुरुआत करने के सपने देखे थे । सबसे पहले श्रीधरन को कोलकात्ता शहर का भूमिगत मेट्रो रेलवे का काम भारत सरकार की तरफ से सौंपा गया था । उस के बाद श्रीधरन को कोकंण मे रेल निर्माण का काम मिला । इस के बाद श्री मदभागवत गीता को अपना मार्ग दर्शक और प्रेरणा मानने वाले श्रीधरन ने दिल्ली मेट्रो का सपना साकार किया “मेट्रो मेन”उपनाम से प्रख्यात हुए श्रीधरन के इस सपने के साकार होने से लाखों दिल्लीवासियों के आशाओं को पूरा किया है ।111

 

इस्वी सन २००२ के दिसंबर २५ से शुरु हुआ दिल्ली मेट्रो का सफर अनवरत जारी है । कई लोग जुड़ रहे हैं तो कहीं ट्रेन का डिब्बा जोड़ा जा रहा है तो कहीं नएं नएं प्लेटफार्म और ट्रेन का निर्माण किया जा रहा है । दिल्ली मेट्रो अब दिल्लीवासियों की लाईफ लाईन बन गई है । मेट्रो के कारण सडक में जाम बहुत कम है । जिन के पास अपने वाहन हैं वह भी ट्रैफिक से निजात पाने के लिए मेट्रो ट्रेन में ही सफर करते हैं । दिल्ली सरकार द्धारा लगायी गई आड, ईभन के दिनों में भी मेट्रो ट्रेन दिल्लीवासियों के लिए सबसे सुगम और भरोसेमंद यातायात के रूप में उपलब्ध था । छुट्टी के दिनों को छोड कर अफिस आवर में प्रत्येक दिन दिल्ली मेट्रो से २७ लाख लोग यात्रा करते हैं ।

दिल्ली मेट्रो मे कार्यरत असिस्टेंट मैनेजर निखिल आनन्दगिरी ने नेपाल से गए हुए हम १५ पत्रकारों को मेट्रो ट्रेन घुमाते और उस का म्यूजियम दिखाते हुए यह जानकारी दी । गिरी ने बताया कि त्योहारों के दिन मेट्रो मे सफर करने वाले लोगों की यह संख्या बढ कर ३० लाख तक पंहुच जाती है । दिल्ली मेट्रो को हर दिन ३० करोड़ आम्दानी होती है जो नाफा या नुक्सान से अलग खर्च और आम्दानी के बराबर है । दिल्ली में आए दिन महिलाओं के साथ छेड़–छाड़, रेप या हिंसा होती ही रहती है । इसी बात को मध्यनजर कर दिल्ली मेट्रो ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए हरेक ट्रेन में एक अलग बोगी बनाई है । जिस में सिर्फ महिलाएं ही यात्रा करती हैं ।

उसमें पुरुष को यात्रा करना निषिद्ध है । गिरी बताते हैं कि दिल्ली मेट्रो के आरक्षित बोगी के कारण भी अपराध में कमी आई है । भारत सरकार और दिल्ली राज्य सरकार के संयुक्त उपक«म के रूप में दिल्ली मेट्रो का निर्माण किया गया है । जिसमें भारतीय रेलवे की कोई भूमिका नहीं है । यह एक अलग दिल्ली मेट्रो रेल कर्पोरेशन (डिएमआरसी) के तहत अपना काम करती है । गिरी ने बताया कि दिल्ली मेट्रो के एक फेज के निर्माण में लगभग ५ सौ करोड़ भारतीय रुपए का खर्च आता है । जो नेपाली में आठ अरब रुपया होता है । दिल्ली मेट्रो बनाने की शुरुआत इसवी सन १९८४ से हुई थी । विश्व के बड़े मेट्रो स्टोशनों मे १२वें नंबर के बड़े मेट्रो में शुमार है दिल्ली मेट्रो ।

२१३ किलोमीटर लंबे दिल्ली मेट्रो ट्रेन के पहले फेज में ६५ और दूसरे फेज में १६५ किलोमीटर सहित अभी तक १९० किलोमीटर मेट्रो ट्रेन और लीक का निर्माण किया जा चुका है । तीसरा फेज चालू है । तीसरे और चौथे फेज का निर्माण २०१६ से २०२१ तक करने की योजना है । गिरी ने बताया कि“दिल्ली मेट्रो में १० हजार कर्मचारी कार्यरत है जिसमे महिलाओं की संख्या ३० प्रतिशत यानी ३ हजार के आसपास है ।” जब इसवी सन २०१२ में दिल्ली मेट्रो की शुरुआत हुई थी उस समय दिल्ली मेट्रो ट्रेन की चालक महिला थी जो अब भी वहां कार्यरत है । ६ रंगों मे चलने वाली इन दिल्ली मेट्रो ट्रेनो की संख्या २१६ है । १० टर्मिनल और १०३ स्टेशनों से हो कर गुजरने वाली दिल्ली मेट्रो वास्तव में दिल्लीवासियों का दिल बन चुकी है । जो दिल की तरह धड़कता है और जैसे नस धमनियों में रक्त दौड़ता है उसी तरह अपनी पटरी पर यह दिल्ली मेट्रो भी रक्त की तरह अपने यात्रियों को ले कर दौड़ती है और उन्हें अपने ठिकाने पर सुरक्षित पहुंचाती है । दिल्ली मेट्रो का महत्व और सफलता के बाद चेन्नई, जयपुर में भी मेट्रो ट्रेन की शुरुआत की जा चुकी है । आर्थिक नगरी मुंबई मे भी मेट्रो ट्रेन का कार्य निर्माणाधीन है । व्

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