…दिल से काले परदे को हटा कर तो देख : श्वेता दीप्ति

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श्वेता दीप्ति, काठमांडू ,२९ नवम्बर  |

गुजरता वक्त कहता है जरा हमें आजमा कर तो देख,
क्यों मायूस है दिल किसी को अपना बना कर तो देख ।
जाओ बख्श दिया तुम्हें , तुम भी कभी दोस्तों में शामिल थे,
याद तुम्हें भी होगा दिल से काले परदे को हटा कर तो देख ।
इल्जामों का दौर आजकल कभी खत्म होता ही नही
इस इल्जाम को कभी अपने गिरेवान पर लगा कर तो देख ।
बहुत आसान होता है दौरे वफ़ा में किसी को बेवफा कहना,
वफ़ा की राह पर यूँ ही खुद को दो कदम चला कर तो देख ।
मुश्किल नहीं है किसीं पर तोहमत लगाना मेरे दोस्त,
तन्हाई में कभी खुद को खुद से जरा मिला कर तो देख ।
जिंदगी यूँ ही गुलाबों की तरह काँटों में उलझी होती है
कभी बेवजह ही किसी की राहों के कांटे निकाल के तो देख ।

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