दीवार गिराने आए थे आप दीवार उठाते चले गए

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माथवर सिंह बस्नेत
वरिष्ठ पत्रकार

माथवर सिंह बस्नेत, हम सभी जानते हैं कि भारत में बारह सूत्रीय समझौता हुआ जिसके फलस्वरूप माओवादी मूलधार में आए और यहाँ लोकतंत्र स्थापित हुआ । माओवादी भी अब तो लोकतंत्र कहने लगे जबकि वो इसके विरोधी थे । इस सन्दर्भ में मैं दुष्यन्त कुमार की एक पंक्ति कहना चाहुँगा, आप दीवार गिराने आए थे आप दीवार उठाते चले गए । जहाँ तक संविधान सभा की बात है तो संविधान सभा तो यहाँ है और बकायदा चल रहा है । परन्तु यह माओवादी या और किन्हीं को गँवारा नहीं हुआ । जिसकी वजह से यह संविधान सभा का एजेन्डा आया । पर जिसने इसे लाया वह भी नहीं जानते कि उन्हें कौन सी व्यवस्था चाहिए । यहाँ जो संसदीय व्यवस्था है उसे उन लोगों ने ध्वस्त करने की कोशिश की । मैं अगर स्पष्ट तौर पर कहूँ तो मैं यह कहूँगा कि संविधान नहीं बनने वाला है । जबकि संविधान निर्माण का कार्य ९९ प्रतिशत तक हो चुका है, परन्तु जो एक प्रतिशत बचा है वही इसे नहीं बनने देगा । यह मेरा विश्वास है । यहाँ प्रक्रिया को मानने में इनकार है एक पक्ष का मानना है कि सहमति से संविधान बने । परन्तु जनता ने जो बहुमत दिया उससे तो सत्ता पक्ष को यह अधिकार प्राप्त है और उसे संविधान बना लेना चाहिए । पर न वो संविधान बना रहे हैं और ना विपक्ष बनाने दे DSC_0017 DSC_0010रहा है । शायद उन्हें लगता है कि अभी संविधान बनने का समय नहीं आया है । तो आन्दोलन तो बदस्तूर जारी है और हालात यह है कि यह होता रहेगा ।

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