दूर्भाग्य है कि आलु मंत्री दूसरे गृह मंत्री को स्पेस ही नहीं दे रहा है : बिम्मी शर्मा

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बिम्मी शर्मा , वीरगंज, ११ अप्रिल | (व्यग्ँय)

आलु को हम सभी ने देखा, खरीदा और खाया ही है । बिना आलु के सब्जी सब्जी जैसी नहीं हो पाती । आलु खुद ही एक सब्जी जैसा ही है । आलु के बिना सब्जी का महत्व घट जाता है । इस निगोड़े आलु की विशेषता यही है कि इस में कोई विशेषता नहीं । नेपाल के नेतागण भी आलू जैसे ही हैं । जो जरुरी तो है पर न होने पर भी कुछ फर्क नहीं पड़ता । हमारे पड़ोसी देश भारत के बिहार राज्य में आलु जैसा ही एक नेता हैं जिसे वहां पर लालू यादव कहा जाता है । हमारे यहां भी आलु और लालु के स्वभाव को मिक्स कर के कुछ नेता बने हैं जो बिना किसी विशेषता के आलु की तरह फलफूल रहे हैं । यह नेता हरेक मंत्री मंडल में शामिल हो कर आलु जगत की शोभा बढ़ा

यह आलु दिखने में कमल की तरह आकर्षक है, कमल तो कीचड़ के उपर खिला रहता है पर यह अपने राजनीतिक दावपेंच के कारण कीचड़ के अंदर ही धंसता जा रहा है । इसीलिए तो मान न मान मैं तेरा मेंहमान की तरह बदबूदार कीचड़ को भी अत्तर छिड़क कर सुगन्धित बनाना चाहता है । यह आलु खुद को वरिष्ठ मानता है इसीलिए मंत्री मंडल बाद में शामिल हो कर भी उप प्रधान मंत्री के वरीयता क्रम में खुद को वरिष्ठ माने जाने के आकांक्षी हैं । मीठा बोल कर यह राजनीति के दरिया में अपने नाव के खेवैया बने रहना चाहता हैं । इस के राजनीति और पार्टी के नाव में बार–बार छेद होता है तब यह नाव को टालने की बजाय दूसरा नाव ही खरीद लेता है ।

राजतंत्र से ले प्रजातंत्र और लोकतंत्र मे कमाए हुए पैसे का खजाना है इस के पास । यह आलू की तरह हर तंत्र मे खुद की गोटी बिठा लेता है और मंत्री बन कर मालामाल होता है । ०६३ साल के आंदोलन मे यह खुद मंत्री था और तत्कालीन राजा ज्ञानेन्द्र का कंधे का बन्दूक बन कर गोली चलाने का आदेश देता था । यह इस देश का दूर्भाग्य ही है कि यह आलु मंत्री दूसरे गृह मंत्री को स्पेस नहीं दे रहा है । संविधान सभा चुनाव में चौथे नंबर में आने पर भी यह पहले नबंर मे आने वाला पेड़ से खुद की बराबरी करता है । कहां हरा भरा पेड़ और कहां कीचड़ मे खिलने वाला कमल ? कोई जोड़ ही नहीं है । पर इस देश के बुद्धि वेता जो खुद के फायदे के लिए गलत जोड़ घटाउ कर के इस आलू को सिर पर बिठा रहे हैं । क्योंकि यह पहाड़ी आलु है । जिस का मकवानपुर जिलें में उत्पादन हुआ है ।

वैसे भी मकवानपुर जिले का टिस्टूगं आर पालुं आलू उत्पादन के लिए देश भर प्रसिद्ध है । यह आलु भी वहीं का है तो इस का भी विख्यात होना लाजिम है । इसी लिए हरेक सरकार में या हरेक मंत्री मंडल में यह वरिष्ठ मंत्री या उप प्रधान मंत्री बन जाता है । यह पहाड़ी आलू राष्ट्रीय पोशाक पहन कर पहाड़ी नागरिकों के मन में अपने लिए सहानुभूति और सम्मान हासिल कर लेता है । जैसे आलू छिलते हैं यह भी बार, बार छिला जाता है और हरेक तंत्र में एक नयां मंत्र के साथ हाजिर हो जाता है । कभी राजतंत्र सहित का प्रजातंत्र का मंत्र जाप करता है तो कभी हिन्दू राष्ट्र सहित का गणतंत्र का मंत्र अलापता है । अभी कुछ दिनों से यह राजतंत्र और हिन्दू राष्ट्र का मंत्र को परित्याग कर अब संवैधानिक गणतंत्र का चोला पहन कर अपना उल्लू सीधा कर रहा है ।

यह आलु उप प्रधान मंत्री मधेश और मधेशी का घोर विरोधी है । ईसी लिए तो ओली के प्रधान मंत्रित्व काल में मधेशी से वार्ता के लिए गठन हुए समीति में मधेश की मागों पर कोई ध्यान नहीं देता था । तब यह आलू संघीयता का घोर विरोधी था । उस समय भी यह आलू उप प्रधान मंत्री था और अब भी उप प्रधान मंत्री ही है । न यह उप से उपर जा सकता है न उप से नीचे आ सकता है । वैसे इस की भीतरी ईच्छा तो देश का प्रधान मंत्री बनने की है पर बेचारा बन नहीं पाया और त्रिशंकू की तरह उप में लटका रह जाता है । मधेश और मधेश विरोधी होने के कारण ही यह मधेशी गृह मंत्री को बर्दास्त नहीं कर पा रहा है । यह आलु खुद के पद की कड़ाही को बचाने के लिए दूसरे सब्जी जैसे मंत्रियों का अचार और भुजिया बना डालता है । यह तो खुद आलू है हर सब्जी, अचार और भुजिया में फिट होने वाला । आलु है इसी लिए तो एक जगह टिक कर नहीं रहता हमेशा ही लुढ्कता ही रहता है ।

नेपाल में आलु का अचार बहुत ही फेमश है । हर चाड, पर्व और शुभ अशुभ कार्य में आलू का अचार बनता ही है । ०४६ साल के पहले जन आंदोलन में भी यह तत्कालीन राजतंत्र और मंत्री मंडल में यह आलू शामिल था । उस समय भी इस ने जूल्म ढाए, ०६३ साल में भी पुलिस को जनता पर गोली दाग्ने का आदेश दे कर उन पर जूल्म ढाए । अब लोकतंत्र में भी खुद को आलू की तरह धो, छिल, छाल कर फिर से मंत्री बनने आ गया ।इस आलू का इसी के तरह का एक भाई है प्याज जैसा । दूसरों के आंख मे आंसू देने वाले प्याज की तरह इस आलू के भाई ने खेलकूद परिषद का सचिव बन कर खुब लूटा । खेलकुद परिषद में धांधली कर के इस ने ५८ करोड का घोटाला किया और साथ ही साथ मैच फिक्सिगं में हिस्सा ले कर देश के खिलाड़ियों और खेल का मान घटाया और खिलाड़ियों को प्याज की तरह रुलाया । इस के ५८ करोड़ के घपले को भी बडे भाई आलू नें अपनी आलूगिरी से बडी चालाकी से बचा लिया । आखिर में आलू और प्याज का बिरुवा देखने में एक जैसा ही होता है । तो देखा आपने आपके रसोई में मौजूद आलू की तरह देश की रसोई यानी कि मंत्री मंडल में यह आलू किसी भी सब्जी से मिलने के लिए तैयार है |

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