देवीमाया की दुखभरी कहानी

देवीमाया -बदला हुआ नाम) पर्ूर्वी नेपाल की रहने वाली है । देवीमाया और उसके पति कुवैत और सउदी अरब में नौकरी करते थे । २००८ में देवीमाया के साथ बलात्कार हुआ । वह गर्भवती हो गई । वहां से नेपाल लौटने के बाद उसने एक विकलांग बच्ची को जन्म दिया ।

देवीमाया की कहानी सुनिए उसकी ही जुबानीः
मैंने बलात्कार के बारे में अपने पति को फोन पर बताया । वे उस समय सउदी अरब में थे । उन्होंने मुझे सांत्वना दी और कहा कि मुझे चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है । उन्होंने कहा कि वे इस घटना के बारे में नेपाल में अपने माता-पिता से बात करेंगे । उन्हें मनाने की कोशिश करेंगे कि वे मेरे प्रति कोई दर्ुभावना न रखें । क्योंकि जो हुआ इसमें मेरी कोई गलती नहीं थी । मैं बहुत असहाय महसूस कर रही थी और घर लौटने के लिए बेचैन थी ।alone-sad-girl)
कुवैत में यह मामला पुलिस में दर्ज नहीं हो सका क्योंकि मेरे साथ बलात्कार करने वाले को मैं नहीं जानती थी । मैं यह भी नहीं जानती थी कि संबंधित अधिकारियों से कैसे मदद ली जाए । मैं कुवैत के एक घर में आया का काम कर रही थी । वहां की भाषा या स्थानीय तौर-तरीकों की मुझे कोई जानकारी नहीं थी । मदद के लिए किसे कहना है और कहां जाना है, यह भी मालूम नहीं था । मेरे मालिक मदद करने वालों में से नहीं थे ।
घर वापस जाने के लिए दो महीने तक उनसे मिन्नतें करती रही, लेकिन उन्होंने मेरी एक न सुनी । जब उन्हें पता चला कि मैं पेट से हूं यानी गर्भवती हूँ, तब जाकर उन्होंने मुझे छोडÞा ।
कुवैत से लौटने के बाद मैंने एक बच्ची को जन्म दिया, वह जन्म से विकलांग है । अब वह करीब तीन साल की है ।
वापस घर आने के बाद मेरे मां-बाप ने मेरे ससुराल वालों से बात की । उन्होंने उनसे पूछा कि क्या वे मुझे फिर से अपनाना चाहते हैं । उन्होंने मेरे पति से भी बात की । मेरे गर्भ के नौ महीने पूरे होने वाले थे । मेरे पति ने अपने मां-बाप को बताया कि वे मेरे बच्चे को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं । वे मान गए और अपने साथ रहने की इजाजत दे दी । मैं उन्हें कुवैत से पैसे भेजा करती थी ।
मगर तीन-चार दिन बीतते ही अचानक उनका रवैया बदलने लगा । उन लोगों ने बातचीत करनी बंद कर दी और मेरे साथ गाली-गलौज करने लगे । यही नहीं, उन्होंने मुझे मारना-पीटना भी शुरू कर दिया । वे चाहते थे कि मैं उनके घर से चली जाऊं, मगर मैंने इनकार कर दिया ।
इसके बाद उन्होंने घर का सारा सामान समेटा और निकल गए । आजकल वे कहीं और रह रहे हैं, मुझे नहीं पता कि कहां । हमारे आठ साल के बेटे को भी वे अपने साथ ले गए । तब से मेरे पति ने भी फोन करना बंद कर दिया । मुझे मालूम है कि वे मुझे अब प्यार नहीं करते । मेरे ससुराल वाले इस घर को बेचने की धमकी दे रहे हैं । मगर मैंने भी कानून की मदद ली । एक गैर सरकारी संस्था की मदद से अपने घर को बिकने से बचा लिया ।
जब लोगों को पता चला कि मेरे साथ बलात्कार हुआ है तो अधिकांश लोगों का मेरे प्रति व्यवहार बदल गया । उन लोगों ने मुझे काम देना बंद कर दिया । वे यह कह कर ताने देने लगे हैं कि मैं अपने साथ एक ‘मुसलमान बच्चा’ ले आई हूं । लोगों के इसी रवैये के चलते मैंने वहां से बहुत दूर जाकर काम करना शुरू कर दिया, जहां मेरे अतीत के बारे में कोई नहीं जानता ।
जीवन बेहद कठिन हो गया है, मगर जब तक मौत नहीं आती मुझे जीना होगा, चलते रहना होगा । मैंने अपने भाग्य को स्वीकार कर लिया है । मेरे घर वाले गरीब हैं, वे मेरा मनोबल बनाये रखने के अलावा मेरी किसी और तरह से मदद नहीं कर सकते ।
मेरे पति के कुछ दूर के रिश्तेदार हैं, जो बडÞे दयालु हैं । वे मेरे साथ सहानुभूति रखते हैं । उन्होंने अपनी जमीन के एक टुकडÞे पर मुझे काम करने की इजाजत दे दी है । इस तरह मैं अपना और अपनी बच्ची का पेट पालने की कोशिश कर रही हूं ।

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