देश की सत्ता, नौटंकी के ज़ोकर के हाथों में : गंगेश मिश्र

गंगेश मिश्र , कपिलबस्तु, १२ मई |

मधेश में एक कहावत है, ” केका कही बड़ी जनी, केका कही छोटी जनी; घरा खाइन तीनों जनी।” बड़ा ही सान्दर्भिक है, नेपाल के परिप्रेक्ष में।
कोई किसीको कहने लायक नहीं है यहाँ, जिसे भी कुर्सी मिली, उसने जमकर लूटा।
खास कर उग्र राष्ट्रवादियों ने देशभक्ति की दुहाई दे, दे कर खूब मलाई काटी। सब की हवेली बन कर तैयार हो गई, देश की राजधानी काठमांडू में।
भ्रष्टाचार में लिप्त, ढोंगी राष्ट्रवादियों ने शासन में बने रहने के लिए, भारत के विरोध का ऐसा  तानाबाना बुना है, जो दोनों देशों के बीच के सम्बन्ध को कड़वाहटपूर्ण बना रहा है।

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चीन जैसे विस्तारवादी राष्ट्र से, नज़दीकी बढ़ाना; जिसका एक मात्र लक्ष्य भारत को नीचा दिखाना है, ये क्या दर्शाता है ? मधेश आन्दोलन को, भारतीय आन्दोलन बताना, अपने ही नागरिक मधेशियों को भारतीय कहना, बीमार मानसिकता का परिचायक नहीं तो और क्या है ? ऐसा लगता है जैसे, देश की सत्ता नौटंकी के ज़ोकर के हाथों में है, जिसका एक मात्र उद्देश्य है; देशवासियों का मनोरंजन करना।
भारत के लिए, नेपाली राजदूत को वापस बुलाना और सरकार को गिराने की साज़िश का बहाना बनाना, उपहास युक्त कदम है। सरकार में बने रहने की कोशिश में प्रधानमन्त्री जी बौराए से हैं।
भूकम्प पीड़ितों के पुनर्वास की योजना अभी भी अधर में लटका हुआ है, हाँ !  कालाबाज़ारी पूर्ववत् जारी है। बिना लाइन के ना तेल मिलता है, न गैस।।।।

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