दो दिवसीय मैथिली महासम्मेलन सम्पन्न

राजबिराज   सम्वाददाता
उती बिहार के मिथिला क्षेत्र को अलग राज्य घोषित कने की मांग एक बा फि आगा से उठी है। मैथिली संस् कृति बचाने का भी आह्वान किया गया है।
यमुना पा स् िथत जगदंबा ड्रि्री काँलेज में अर्ंताष्ट्रीय मैथिल पषिद का दो दिवसीय सम्मेलन शुक्रबा से शुरु हुआ। सम्मेलन का शुभांभ अर्ंताष्ट्रीय अध्यक्ष डाँ. कमलकांत झा ने किया। उन्होंने कहा कि मिथिला देश की स् थापना ाजा जनकने की थी। यह शुरु से ही अलग ाज्य हा है। सन् १३२६ तक मिथिला स् वतंत्र देश था। ग्यासुद्दीन तुगलक के आक्रमण के बाद वह गुलाम हो गया। आजादी के बाद बिहा के उत्ती भाग में समा गया। मांग की जा ही है कि बिहा के २४ जिले औ झाखंड के ६ जिले मिलाक मिथिला ाज्य स् थापित किया जाए।
अर्ंताष्ट्रीय महासचिव प्रेमकांत झा ने कहा कि बिहा में ५ कोड औ उत्त प्रदेश मं १० लाख मैथिल ब्राह्मण हैं। इसके बावजूद उनकी स् िथति दयनीय है। सका उनकी उपेक्षा क ही है। अध्यक्षता विद्यााम आर्य ने की।
उन्होने मैथिली हस् तशिल्प मधुबनी आर्ट के लुप्त होने प चिंता व्यक्त की। विशिष्ट अतिथियों में शैलेन्द्रमोहन झा, सुेंद्र पाठक, प्रो. उदयशंक मिश्रा, करुणा झा, शैल झा, कृष्ण नाायण पांडेय, बीएस मिश्रा आदि थे। अतिथियों का स् वागत पश्चिमी उत्त प्रदेश के अध्यक्ष पं. जगदीशचंद्र शर्मा ने किया।
अर्ंताष्ट्रीय सम्मेलन के दूसे दिन मैथिल समाज की पंपाओं औ संस् कृति प चर्चा की गयी। अर्ंताष्ट्रीय मैथिल पषिद द्वाा जगदंबा ड्रि्री काँलेज फाउंड्री नग में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन शनिवा को संपन्न हो गया। अर्ंताष्ट्रीय अध्यक्ष डाँ. कमलकांत झा ने कहा, भात में मैथिल संस् कृति का विशेष स् थान है, प सका की उपेक्षा से पर्याप्त स् थान नहीं मिल हा है।
नेपाल से आयी सामाजिक कार्यकर्ता करुणा झा का कहना था कि महिलाओं की उपेक्षा कने बाला समाज कभी तक्की नहीं क सकता। यूथ आँफ मिथिला के अध्यक्ष भवेश नंदन झा ने चिंता व्यक्त की, मिथिला संस् कृति लुप्त होती जा ही है। अमिताभ भूषण, मिथिलांचल संर्घष्ा समिति के संयोजक प्रो. अमेंद्र झा, नेपाल के शैलेंद्र मोहन झा, ाष्ट्रीय महासचिव बीएस मिश्रा, अर्न्ताष्ट्रिीय प्रेमकांत झा आदि ने भी विचा व्यक्त किये। संचालन किया महासचिव कृपानंद झा ने। कार्यक्रम संयोजक पं. जगदीशचंद शर्मा ने आभा व्यक्त किया। व्यवस् था में सहयोग किया ज्ञान प्रकाश, डीडी शर्मा, दिनेश उपाध्याय, कालीचन शर्मा, ऋषि शर्मा, एमपी शर्मा, सतीशचंद शर्मा आदि ने।   ±±±

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