धनतेरस के दिन लक्ष्मी गणेश कुबेर के पूजन के साथ साथ मृत्यु के देवता यम के पूजा का भी विधान है

धनआचार्य राधाकान्त शास्त्री, धतेरस 2017 :-
यह पर्व प्रति वर्ष कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है । धनतेरस के दिन धन्वन्तरी देवता के साथ , माता लक्ष्मी गणेश इंद्र और धन के देवता कुबेर की विशेष पूजा का महत्व और विधान है इसलिए इस दिन भी दीपावली के भांति इन सब की पूजा की जाती है।

धनतेरस के दिन लक्ष्मी गणेश कुबेर के पूजन के साथ साथ मृत्यु के देवता यम के पूजा का भी विधान है। धनतेरस के दिन यम की पूजा के विषय में मान्यता है कि इनकी पूजा से घर में असमय मौत का भय नहीं रहता है।

पूजन का शुभ मुहूर्त :-
इस साल धनतेरस 17 अक्टूबर (मंगलवार) को मनाया जाएगा। धनतेरस की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त में
घर के पूजन एवं ख़रीदारी के लिए –
स्थिर लग्न :-
वृश्चिक लग्न :-
प्रातः 8:15 से 10:35 तक ।
कुम्भ लग्न :-
दिन 2:25 से 3:56 तक ।
वृष लग्न :-
शाम 07:03 से रात्रि 9 बजे तक ।
सिंह लग्न :-
रात्रि 1:31 से 3:45 तक रहेगा।
जबकि व्यसायिक स्थलों दुकानों एवं शैक्षिणिक प्रतिष्ठानों के लिए द्विस्वभाव लग्न में पूजा करना अधिक श्रेष्ठ एवं महत्वपूर्ण होता है ।
द्विस्वभाव लग्न :-
धनु लग्न :-
सुबह 10:35 से 12:40 तक।
मीन लग्न:-
दिन 3:58 से 5:24 तक ।
मिथुन लग्न :-
रात्रि 9 बजे से 11:13 तक ।
इस शुभ मुहूर्त में पूजा करने से धन, स्वास्थ्य और आयु बढ़ती है। इस मुहूर्त में
खरीदारी भी करना शुभद होगा ।

ये खरीदना है अशुभ

1.शीशा खरीदना ज्योतिष के अनुसार अशुभ माना गया है। इसका कारण है की शीशा का संबंध राहु से है इसलिए शीशे से बनी वस्तुओं की खरीदारी से बचना चाहिए। अगर शीशा खरीदना बाध्यता है तो ध्यान रखना चाहिए कि धुंधला और पारदर्शी ना हो।

2. अल्युमिनियम के खरीदारी भी ज्योतिषियों ने खराब माना है। क्योकि सभी शुभ ग्रह इस धातु से प्रभावित होते हैं। इसके अलावे वास्तु के दृष्टि से भी अल्युमिनियम को अच्छा नहीं माना गया है।

3 धनतेरस के दिन किचन के काम में आने वाली नुकीली वस्तुएं जैसे चाकू और लोहे की वस्तुएं और बर्तन नहीं खरीदना चाहिए
धनतेरस में खरीदारी की परंपरा और मान्यता दोनों ही हैं। इस दिन मान्यता है कि जैसे माता लक्ष्मी समुद्र मंथन से उत्त्पन्न हुई थीं ठीक उसी प्रकार भगवान धन्वंतरी भी समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए थी। जब धन्वंतरी देव समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए थे तब उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था। इसलिए इस दिन सोना,चांदी,तांबा और पीतल के समान एवं बर्तन खरीदने की परंपरा शास्त्रों के अनुसार सदियों से चली आ रही है।
धनतेरस के दिन आमतौर सोने-चांदी बर्तन, सिक्के और आभूषण खरीदने की परंपरा रही है। सोना खरीदना जहां सौन्दर्य वृद्धि करता है वहीं सिंचित धन के रूप में भी काम आता है। धनतेरस के दिन सोने-चांदी की खरीदारी को शुभ शगुन भी मानते हैं। धनतेरस के दिन खरीदारी से जुड़ी एक अन्य मान्यता यह भी है कि इस दिन खरीदारी करने से धन तेरह गुना बढ़ जाता है। इनमे से कुछ खरीदारी कर लेने के बाद गाड़ी, या उपकरण एवं अन्य उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी भी शुभद होती है ।

आप सब पर इस धनतेरस से श्री लक्ष्मी गणेश इंद्र कुबेर एवं श्री धन्वंतरि जी महाराज की असीम कृपा बनी रहे एवं सबके घर मे धन धान्य, सुख समृद्धि सम्पूर्ण सौभाग्य बनी रहे ,

आचार्य राधाकान्त शास्त्री

आचार्य राधाकान्त शास्त्री ।।

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