धनुषा चुनाव का दंगल : एक नजर

अछूतम कुमार अनन्त
 आंदोलन और चुनाव दो अलग चीज है । जरूरी नही कि आप आंदोलनकारी है तो चुनाव में आपको ही वोट मिलेगा । खोजने पर आपको उदाहरण बहुत सारे मिल जाएगा । एक उदाहरण भारत के मणिपुर राज्य के इरोम शर्मिला है । जिन्होंने १६ साल तक अनशन किया । पर जब चुनाव लड़ी तो सिर्फ ९० वोट हासिल हुआ । कल मधेश में भी प्रतिनिधिसभा और प्रदेशसभा का चुनाव होने जा रहा है । चुनाव में आज कल पैसा,बाहुबल,जात, धर्म आदि हावी है । साथ में व्यक्ति का व्यक्तित्व भी काम आता है । खास कर धनुषा जिला को देखे तो राजपा और संघीय समाजवादी फोरम का जीतना लोहे चबाने जैसा है । कुछ महीने पहले स्थानीय चुनाव का मत देखे तो टक्कर काँग्रेस और बाम गठबंधन के बीच का लग रहा है । पर जैसा कि मैंने ऊपर लिखा है, पैसा,जात,बाहुबल,धर्म और व्यक्तित्व ही चुनाव का रुख मोड़ सकता है । प्रतिनिधि सभा के लिए धनुषा ३ का चुनाव देखने लायक होगा । जहाँ टक्कर बिमलेन्द्र निधि और राजेन्द्र महतो के बीच में है । दोनों उम्दमीवार पूर्व मंत्री है और अपने पार्टी का बड़े नेता भी । धन बल में दोनों एक दूसरे से कम नही । दोनों ने चुनाव प्रचार प्रसार में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था । दोनों के समर्थक सोशल साइट्स पे एक दूसरे पे आरोप प्रत्यारोप लगा रहे थे । पर सोशल साइट्स पे महतो के पक्ष में ज्यादा लोग थे ।धनुषा ३ में हार जीत का अंतर १००० से नीचे ही होगा । अब प्रतिनिधि सभा के लिए धनुषा १ की बात । यहाँ से बाम गठबंधन के तरफ से मातृका यादव, राजपा और ससफो के तरफ से दीपक कार्की और काँग्रेस से आनन्द ढुंगाना है । यादव और ढुंगाना दोनों पूर्व मंत्री है । स्थानीय निकाय के वोट प्रतिशत देखे तो यहाँ बाम गठबंधन आगे है । यादव अपने मंत्री काल मे भ्रष्टाचारी बिरोधी के कारण जनता के बीच बहुत लोकप्रिय है । वहीं ढुंगाना पुराने नेता है और कांग्रेस के जाने माने व्यक्तित्व भी । यहाँ पे दीपक कार्की बहुत पीछे है । ढुंगाना और कार्की पहाड़ी समुदाय से है और इस क्षेत्र में उक्त समुदाय बहुत ज्यादा संख्या में है । दोनों के बीच पहाड़ी समुदाय के बीच वोट बट जाने से मातृका बहुत आगे है । पर एमाले नेता योगनारायण यादव के जेल से बाहर आने से चुनाव रोमांचक हो गया है । क्योंकि योगनारायण और मातृका के बीच दुश्मनी बहुत पुरानी है । धनुषा २ की बात की जाए तो यहाँ भी टक्कर काँग्रेस और बाम गठबंधन के बीच ही दिखाई देता है । बाम गठबंधन से रामचन्द्र झा और काँग्रेस से रामकृष्ण यादव मैदान में है । और राजपा और सँसफो से उमाशंकर अरगरिया है । अरगरिया इन दोनों से बहुत पीछे है । झा और यादव दोनों ही पूर्व मंत्री और इसी क्षेत्र से चुनाव जीते हुए है । स्थानीय चुनाव के नतीजे देखा जाए तो रामचन्द्र झा आगे है । पर रामकृष्ण यादव वर्तमान में नेपाल सरकार के कृषि मंत्री है । यहाँ भी लड़ाई बहुत नजदीकी होने वाला है । धनुषा ४ में लड़ाई त्रिकोणीय लग रहा है । बाम के रघुबीर महासेठ, काँग्रेस से महेंद्र यादव और राजपा/ सँसफो से महाजन यादव इस क्षेत्र से लड़ रहा है । महेन्द्र यादव वर्तमान नेपाल सरकार में मंत्री है और महासेठ पूर्व मंत्री । महाजन यादव भले इन दोनों के बीच नयाँ है । परंतु टक्कर दोनों को दे रहा है । यादव और महतो इस क्षेत्र में बहुत ज्यादा संख्या में है । यहाँ से महासेठ आगे चल रहा है । पर महेन्द्र यादव और महाजन यादव महासेठ के बहुत नजदीक है । बाकी चुनाव के बाद ।

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