धर्म के लिफापे मे देहसत का धन्धा : रणधीर चौधरी

रणधीर चौधरी, विराटनगर | भारत के हिरियाणा प्रदेश के पंचकुला मे अदालत से एक निर्णय क्या आया भारत के पाँच प्रदेश आतंकित हो गये । एक्कतिस लोगो की जान चली गई । शहर का शहर जल कर राख हो गया । कितना सरकारी सम्पती जलाया गया इसका अभीतक यकिन नही है ।
जी हाँ यह घटना हुवा है शान्ति के दुत कहलाने बाले बाबा गुरमित राम रहिम को जब २००२ मे उनको एक बलात्कार के घटणा मे आरोपित किया गया था और २४ अग्सत को उनको पंचकुला अदालत से दोसी ठहराया गया । बाबा के रुप मे एसे कारनामा करने मे लगे रहिम के समर्थको ने पंचकुला को धव्सत तो किया ही साथ साथ यह भी प्रमाणित कर दिया की धर्म वास्तव मे एक अफिम ही है ।
बडा सबाल यह है की जब सब को पता था की २५ अग्सत को रहिम के कारनामा के उपर फैसला आने बाला है तो क्या हरियाणा के प्रदेश को पेहले से तयारी नही करनी थी ? गौरतलब है की हरियाण प्रदेश ‘यूनियन टेरिटरी’ है । याने के केन्द्र के छत्रछाया मे चलने बाला प्रदेश । तो फिर अगर कोई केन्द्र सरकार अर्थात एनडिए सरकार ने अपना जिम्मेवारी क्यों नही निभाया?
भारत जैसे लोकतन्त्र का हिमायती कहलाने बाले देश में एसी घटना लोकतन्त्र पे काला धब्बा है । वर्तमान अवस्था में जिस तरह से हिन्दुवादी और धर्मनिरपेक्षता को मुद्दा बना के राजनीति की जा रही है वह बिल्कुल गलत है । खास कर जबसे एनडिए पावर मै आइ है तब से हिन्दुधर्म से जुडे मुद्दे की आड मे हिंसात्मक घटणा मे बढोतरी आइ है कहना गलत नही होगा । उत्तर प्रदेश लगायत कई राज्यो मे जिस तरह से गौ रक्षा के नाम पे लोगो की हत्या तथा मारपिट किया जा रहा है वो भर्तसना योग्य है ।
कहा जाता है की २००२ मे बालात्कार के आरोपित राम रहिम ही हरियाणा पे अघोषित साशन चलाते आ रहे थे । पिछले लोकसभा के चुनाव हो या फिर प्रदेश सभा की भारतीय जनता पार्टी और पार्टी के स्वघोषित ‘चाणक्य’ रहिम जैसे हैवान के सरन मे जा भाजपा के पक्ष मे चुनावी माहोल बना देने के लिए गिरगिराया था । उस के बाध से रहिम के गुण्डागर्दी का रफतार और बढ्ने लगा था । सिर्फ डेरा सच्चे सौदा के मालिक रहिम का मनोबल नही बढा बल्की हिन्दुवादी ताकतो का सत्ता मे पहुच के बाध बाबजी लोग खुल के राजनितीक बिष वमण करना सुरु करते दिख रहा है । तभी तो बालात्कारी रहिम के पक्ष मे साक्षी महराज जैसे गेरुवा वस्त्र धारी खुलेआम अनाप सनाप बोलने से पिछे नही हट रहे । साक्षी महराज का कहना की सिबिआई अदालत को फैसला सुनाने से पेहले रहिम के लाखो समर्थको की उपस्थिति को नजरअन्दाज नही करना चाहिये था । क्या ये महज अहम नही है की केन्द्र मे हिन्दुवादियो की सरकार है । और गेरुवा वस्त्र धारी लोग कुछ भी कर सकते हौ, कुछ भी बयान दे सकते है ।
कहा जाता है की जब धर्म की राजनिती के गोलचक्कर मे सियासत फस जाती है तो कुछ भी हो सकता है । सियासी से ज्यादा धर्म का समानान्तर सियासत चलाने लगते है । आज भारत मे वही हो रहा है । नरेन्द्र मोदी सरकार के नेतृत्व मे भारत के लोकतन्त्र और वहुआयामिक पक्षो मे तिब्रता आता दिख रहा था परन्तु रहिम और साक्षी महराज जैसे बाबाओ के कारण मोदी सरकर सायद कुछ भी नया नही कर पाएंगे ।
अतः सबसे यही अनुरोध है की कृपया परमात्मा पे अगर विश्वास करते है तो सिधा परमात्मा से सम्पर्क बनाने मे लगे । सच्ची कर्म करे । जनहितकारी कार्यो मे विश्वास रखे । परमात्मा के नाम पर दलाली और बलात्कारियो को माध्यम न बनाए । नही तो आशाराम बापु और राम रहिम जैसे गुरुओ के कारण आप को सर छुपाने के लिये छत ढुंढना परेगा ।
अन्त मे भगवान न करे की धर्मो के नाम पर विश्व मे कही और एसी घटणा घटे । इसी लिए नेपाल और भारत जैसे देशो मे धर्म की राजनिती तत्काल बन्द होनी चाहिए । और सभी को एक मन्त्र पे विश्वास करनी चाहिए की ‘धर्म की राजनिती नही, राजनिती मे धर्म पैदा करनी चाहिए’ ।

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