नई पहचान मिली ….

गंगेश मिश्रrajapa-6-leaders
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आख़िर, एक साथ आ ही गए; मधेश के रहनुमा; बधाई तो बनती है, बधाई हो, बधाई। एक साथ, एक मंच पर आने की; जो हिम्मत मधेशवादी नेताओं ने दिखाई है; निःसंदेह प्रसंशनीय है, ऐसा होना देश-मधेश के हित में भी है।
राष्ट्रीय जनता पार्टी के छाता तले, मधेश को ही नहीं,  पूरे देश को शीतलता मिलेगी; उम्मीद करनी चाहिए। आज मधेश के, करीब सभी कद्दावर नेता एक साथ, एक मंच पर आ गए हैं, एक नई पहचान के साथ; ” राष्ट्रीय जनता पार्टी ” के रूप में।
अब कुछ होगा ! जो होगा देश और मधेश के लिए भला होगा और होना भी चाहिए।
ऐसे मौके पर, स्व. गजेन्द्र बाबू की याद आ गई; हाफ़ बाँह का कुर्ता पहने, मुस्कुराते, हाथ हिलाते हुए; सबको एक साथ आने के लिए,  हाँक लगाते हुए। प्रजातंत्र के पश्चात् का, वह दौर जब कांग्रेस ….. कांग्रेस का कोहराम मचा था, कम्युनिस्टों का लाल पताका फहरा रहा था और मधेश अपनी दीनता पर आँसू बहा रहा था। तब उदय हुआ था, मधेश पुत्र स्व. गजेन्द्र नारायण सिंह का …….
” सो रहा मधेश था,
निस्तेज सा, बीमार था;
रास्ते सब बन्द थे,
निकले कहाँ, किस ओर से;
था दर्द का अहसास पर;
कहता कोई, कैसे-किसे ?
ऐसे में आया, एक दिन,
धरती पे देवदूत बन;
सिंह सा दहाड़ता,
गजेन्द्र सिंह !
गजेन्द्र सिंह ! ”
वो भी यही चाहते थे, उन्होंने ही मधेश के हक़ की लड़ाई की नींव रखी; एक अलग धार की पार्टी का उदय हुआ, नाम था ” नेपाल सद्भावना पार्टी “। इस पार्टी को उस समय लोग अछूत मानते थे; यह कहते हुए कि ये पार्टी मधेशी और पहाड़ी के बीच विभेद करवा रही है; नाम सुनना नहीं चाहते थे। भई ! तथाकथित राष्ट्रवादियों की कमी, तो थी नहीं कभी यहाँ; लेकिन तब भी कुछ लोग थे, जो जुड़े मधेश की पहचान और अधिकार की लड़ाई के साथ, कुछ निरन्तर लगे रहे, कुछ अलग हुए ।
और आज इस मोड़ पर, मधेश मुद्दे को सर्वप्रथम उठाने वाली पार्टी ” नेपाल सद्भावना पार्टी ” का अस्तित्व मधेश के लिए ही समाप्त हो गया।
” साथ छूटा, हाथ का;
हाथ छूटा, हाथ से ।”
” सुबह का भूला, शाम को यदि घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते ” इस कहावत को चरितार्थ करना तथा एकजुट होकर मधेश के हक़ की लड़ाई को बुलन्दियों पर पहँचाने की जिम्मेदारी;  इमानदारी पूर्वक इन मधेशी नेताओं को उठानी ही चाहिए। लोग वही हैं,  समस्या वही है; जिससे पार पाने के लिए पूरी निष्ठा और नैतिकता की आवश्यकता है। मधेशी आवाम को बड़ी उम्मीद है, जिस पर ख़रा उतरना आसान नहीं होगा।
अंत में, स्व. गजेन्द्र नारायण सिंह को हार्दिक श्रद्धान्जलि देते हुए, बस ! एक ही बात कहनी है, आपको मधेश और मधेशी जनमानस सदैव याद करेगा।
☆☆☆ जय मातृभूमि ☆☆☆

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