नई पीढी का शैक्षिक पलायन

मालिनी मिश्र, काठमाण्डू २ जून
शिक्षा इन्सान को योग्य बनाता है, परन्तु यदि शिक्षा का माध्यम ही सही न हो तो योग्यता को अयोग्यता में बदलने में देर नहीं लगती है ।

मालिनी मिश्र,

मालिनी मिश्र,

कुछ ऐसा ही आजकल यहाँ भी हो रहा है । सबसे पहले तो बाध्यता वश या कहें तो अपने देश से बाहर जाकर पढ़ना फैशन हो गया है । इसमें हमारे एजुकेशन कंसल्टेन्सी बहुत अच्छी भूमिका निभा रहे हैं । इनमें से तो कुछ ऐसे हैं जो प्रत्यक्ष रूप से शिक्षा मंत्रालय से जुड़े हुए हैं व अनैतिक तरीके से विधार्थियों को बाहर भेज रहे हैं । इसी क्रम में बंगला देश जाने वालों के बारे में पता चला है जो डाक्टरी की पढ़ाई के लिए जाते हैं । यद्यपि सरकार ने कोटा निश्चित किया है परन्तु अनैतिक तरीके से जाकर डिग्री लेना कहां तक उचित है ? इन भावी डाक्टरों को हम किस तरह आँकें ? क्या ये हमारे लिए सही डाक्टर होंगे ?
सूत्रों के मुताबिक पता चला है कि नकली प्रमाण पत्र से छात्रवृत्ती पाकर लोग डाक्टरी की डिग्री भी ले रहें हैं । यहाँ तक कि शिक्षा मंत्रालय के नकली छाप व सरकारी अधिकारी के हस्ताक्षर का प्रयोग भी किया गया है और हम यहाँ देश के उज्जवल भविष्य की कल्पना कर रहे हैं ।

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