नकली नोट किंग फिर सलाखों के पीछ

विनय दीक्षित:भारतीय नकली नोट कारोबार करने के आरोप में सात साल कैद सजा के वाद भी अगर कोई व्यक्ति न सुधरे तो उसे कानून सातिर अपराधी मानता है। ३ महीने पहले ही जेल से मुक्त हुए युनूस अन्सारीको २६ जनवरी को फिर पुलिस ने नकली नोट कारोबार में संलग्नता के आधार पर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार जेल की सजा काट कर बाहर निकला युनूस अंसारी फर्जी पासपोर्ट के जरिये नेपाल से भागने की योजना में था।note

सूचना के मुताबिक लम्बे समय से जेल जीवन बिता रहा युनूस अन्सारी की आर्थिक स्थित कमजोर पडÞर् गई थी और उसे जल्द सुधार करनेका दूसरा रास्ता भी नजर नहीं आया। और उसने कुछ पाकिस्तानी अपराधियो के साथ मिलकर फिर पुराना धन्दा जारी रखने की योजना बनाई। नेपाल पुलिस ने युनूस को ३१ दिसंबर २००८ में ५० लाख के भारतीय नकली नोट सहित काठमाण्डू मंे पहली बार गिरफ्तार किया था। दो पाकिस्तानी नागरिक के साथ नकली नोट कारोबार के शिनाख्त पर पुलिस ने युनूसको काठमाण्डू स्थित होटल ब्लू बर्ड से गिरफ्तार किया था। नकली नोटका सम्बन्ध अगर भारत से था तो युनूस के पास से पुलिस ने बडी मात्रा म ंे डग््र स भी बरामद किया था। राजनीतिक पकड Þ आरै माआवे ादिया ंे क े साथ मिलिभगत क े कारण डग््र स क े मामल े म ंे उस पर किसी किसिमका केस फाइल नहीं हुआ। जाली नोट के कारोबार म ंे अदालत न े यनु सू का े ७ साल की सजा सनु ार्इ। नपे ाल म ंे दाउद इबा्र हिम का सबस े करीबी आरै नपे ाल म ंे फलै े उसक े अरबा ंे डालँ र क े काराबे ार का संचालन युनूस अंसारी ही करता आया था

। नेपाल सरकार इस कारण भी आवश्यक पहल नही ं करती कि एसे े काराबे ार म ंे सलं ग्न लागे ाकंे ा मिसन सिर्फभारत बिरोधी होता है, जो सिर्फनपे ाल की भू िम पय्र ागे करत े ह।ंै नपे ाल म ंे बठै कर भारत बिराधे ी याजे ना बनाए जात े ह,ैं आतकं आरै अपराध म ंे सलं ग्न लागे ा ंे का े छिपन े क े लिए नपे ाल को सुरक्षित जगह माना जाता है। नपे ाल म ंे पाकिस्तान स े आन े वाल े नकली भारतीय नाटे ा ंे क े काराबे ार का भी यनु सू मख्ु य सचं ालक था। पिछल े दिना,ंे यासिन भटकल, टण्ु डा और अफजल उस्मानी जैसे बडे आतंकवादी नेपाल से गिरफ्तार किए गए, जिस कारण भारतीय खुफिया एजेन्सियाँ नेपाल पर अपना निशाना तीखा कर रही ह।ंै पहली बार यनु सू का गिरफत् ार हाने ा भी भारतीय एजे िन्सया ंे की ही दने ह,ै भारतीय सटू रा ंे न े यनु सू का े मारन े का भी जाल बुना। कारणवश वह योजना सफल नहीं हइर्ुर् । कछु तत्वा ंे न े यह भी आरापे लगाया था कि युनूसकी हत्या भारतीय गुप्तचर एजेन्सियाँ कर वाना चाहती ह।ंै भारतीय सटू र न े ता े यह तक याजे ना बनार्इ की यनु सू जले क े किस कै िवन म ंे बन्द है और उसे मारने के दौरान यदि पकडे गए तो कानूनकी लडर्Þाई कैसे होगी, इसके लिए सूटर जसजीत सिंह ने अपने लिए वकिल भी नियुक्त कर रख्खा था।

लेकिन योजना सफल नहीं हर्ुइ आरै भारतीय सटू र जसजीत सिहं का े जल े म ंे बन्द युनूस पर गोली चालते समय पुलिस ने धर दबाचे ा। सटू र जसजीत सिहं न े पु िलस बयान म ंे खलु ासा किया कि उस े लखनऊ की जले म ंे बदं बब्लू श्रीवास्तव ने युनूस को मारने की सुपारी दी थी। सवाल कर्इ थ े कि आखिर क्या े जले म ंे बन्द एक कैदी दूसरे मुल्क के किसी कैदी के निशाने पर है – युनूस का रिस्ता लखनउ के बब्लु श्रीवास् तव से कैसा है – इनका कोई लेनदेनका मामला तो नहीं या एक बडÞी साजिस है – खैर तीन महीने पहले ही जेल की सजा काट कर बाहर आए युनूस अंसारी इस बार फर्जी पासपोर्ट के सहारे सिंगापुर होते हुए दर्ुबई और वहां से पाकिस् तान भागने की तयारी के साथ गिरफ्तार हुआ। इससे अपराध पर कुछ हदतक लगाम भी लगा। पहली बार की गिरफतारी म ंे यनु सू पर उसक े पिता नेपाल के पर्ूव केन्द्रीय मंत्री सलीम मिया अंसारी ने माओवादी के सहयोग से उसे ड्रग्स के केस से मुक्त करवा दिया था।

दबाव और प्रभावका असर केस पर तो हुआ लेकिन युनूस का ब्यवहार जैसा था वैसा ही रह गया। राजनीति म ंे अपनी पकड Þ बनाए रखन े क े लिए युनूस अंसारी ने पैसे देकर माओवादी पार्टर्ीीे ही अपनी छोटी बहन उषा किरण अंसारी को सांसद भी बनवाया। भरतीय एजेन्सियाँ तो दाउद इब्राहिम, आइएसआई और नेपाल के माओवादी क े बीच सम्बन्ध बनान े म ंे यनु सू असं ारी की अहम भू िमका बताती रही ह।ंै एजन्े सी अधिकारि या ंे का कहना ह ै कि भारत विराधे ी काम कर रही पाकिस्तानी गुप्तचर एजेन्सी ने युनूस को छुडÞाने के लिए पैसेको पानी की तरह बहाया। भारतीय खु िफया एजंेि सया ंे का े खबर मिली कि वह जल्द नपे ाल स े बाहर भागन े की याजे ना पर ह ै ता े नेपाल के गृह मंत्रालय को अनुरोध कर युनूस को उसके घर से हिरासत मे ले लिया गया। नपे ाल पुलिस क े स्पशे ल ब्यरू ा े न े काठमाडं ू म ंे रह े उसक े निवास का े चारा ंे आरे स े घरे लिया था। पुलिस ने सुबह करीब आठ बजे उसके घर पर छापामारी की और पुलिस ने बताया जिस समय उसे गिरफ् तार किया गया यस समय भी वह नकली नोट का ही हिसाब किताब कर रहा था। नाटे ा ंे क े बण्डल क े साथ पुलिस न े उस े हिरासत म ंे ल े लिया। पुलिस न े युनूस अंसारी के घर से ३५ लाख नकली नोट भी बरामद किए।

नेपाल पुलिस के प्रवक्ता गणेश केसी ने युनूस की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि वह अपराधका एक बडÞा पात्र है। भारतीय पक्ष बारबार आरोप लगा रहा था कि यनु सू भारतीय नकली नाटे क े काराबे ार म ंे संलग्न है लेकिन आरोप की पुष्टि करनेका भरपूर आधार नमिलने के कारण नेपाल पुलिस उस पर शिकन्जा नहीं कस पार ही थी। पहली बार युनूस से जुडे तार तब खुले जब २००९ सेप्टेम्बर म ंे भारत स्थित मध्यपद्र शे स े नकली नाटे सहित भारतीय पु िलस न े २ लागे ा ंे को गिरफ्तार किया। नेपाली नागरिक अतिक मोहम्मद और भारतीय नागरि क राजेश गुप्ता ने वह राज खोला जा े भारतीय सरु क्षा एजे िन्सया ंे का े हिला दने वे ाला था। भारतीय मिडिया न े पकड ेÞ गए लागे ा ंे क े बार े म ंे खलु ासा करत े हएु नकली नाटे काराबे ार म ंे सिर्फ यनु सू ही नहीं बल्कि पर्ूव युवराज पारस शाहका भी नाम जाडे ाÞ आरै परू े दशे म ंे हडकÞ म्प मच गया। पकड ेÞ गए लागे ा ंे क े बयान के आधार पर मध्य प्रदेश पुलिस ने भारत सरकारका े रिपार्टर्े सापंै ा आरै कन्े द ्र सरकार ने नेपाल स्थित युनूस अन्सारी पर नकली नोट काराबे ार म ंे सलं ग्नता सम्बन्ध म ंे अनसु न्धान जार ी करनेका आग्रह किया। नेपाल पुलिस ने युनूस पर अनुसन्धान शुरु किया और युनूस का इतिहास बाहर आने लगा। पुलिस ललितपुर ताछिखेल स् िथत यनु सू क े घर पहचँु ी आरै यनु सू का े गिरफतार कर अनुसन्धान के लिए काठमांडू नागपोखरी स् िथत एक गोप्य ठिकाने पर ले गई। पुलिस ने एक दिन युनूसको वहीं पर रख्खा और दूसरे दिन महानगरीय पुलिस परिसर काठमांडू को सापंै दिया

। काठमाडं ू पु िलस न े यनु सू पर पा्र रम्भि अनुसन्धान के आधार और प्रमाण सहित दूसरे दिन पत्रकार सम्मेलन कर र्सार्वजनिक किया। यनु सू पर डग््र स काराबे ार म ंे सलं ग्नता का भी पुलिस ने प्रमाण र्सार्वजनिक किया। युनूस के साथ उनके अंग रक्षक काशीराम अधिकारी, पाकिस् तानी नागरिक मोहम्मद इकबाल और मोहम्मद सज्जाद भी हिरासत म ंे थ।े सभी पर नकली नाटे और ड्रग कारोबार का आरोप था। घटना ने फिर मोडÞ ली, पौष १६ गते सुबह पाकिस्तानी एयर लाइन्स से एक पाकिस्तानी नागरिक काठमांडू स् िथत त्रिभवु न विमानस्थल पर उतरा आरै साथ म ंे था ३ सुटकेस। पाकिस्तान कराँची स्थित लानी कालोनी निवासी मोहम्मद इकबाल सुटकेस सहित एयरपोर्ट बाहर नहीं आना चाहा। सुटकेस म ंे कस्टम्स कर दने े लायक सामागी्र बतात े हएु उसन े भन्सार म ंे तीना ंे सटु कसे छाडे Þ दिया आरै खुद बाहर चला गया। इकबाल काठमांडू आने की खबर पहल े स े ही पु िलसका े थी। उसकी प्रि तक्षा म ंे पहले से ही एयर पोर्टपर नेपाली गुप्तचर मौजूद थे। इकबाल बाहर जाते समय पुलिस ने उसका पीछा किया और पता किया कि वह कहाँ जा रहा है और उसकी अगली योजना क्या है। इकबाल विमानस्थल से सीधा ठमेल स्थित प्लानेट गेस्ट हाउस पहचँु ा जहा ँ उसक े नाम स े पहल े ही कमरा बुक था- रुम नं. २०४। पुलिस ने निगरानी बनाए रख्खा और इकबाल के हर क्रियाकलाप पर नजर रखती रही, पुलिस को उसे अकेले गिरफ्तार नहीं करना था बल्कि उसके साथ अन्य सहयोगी तथा वारदात म ंे सलं ग्न लागे ा ंे का े भी पु िलस अपना निशाना बनाना चाहती थी। कहानी म ंे फिर नया रङ्ग आया, पौष १७ गते फिर कराँची का दूसरा पाकिस्तानी नागरिक काठमाडं ू पहचँु ा। वह भी सरासर प्लानटे गस्े ट हाउस पहचँु ा जिस क े लिए पहले ही ३०४ नं. रुम बुक था। पुलिस ने बताया कि माहे म्मद आरै इकबाल अलग अलग रुम म ंे हाते े हएु भी दाने ा ंे की टीम एक ही थी। काराबे ार क े बार े म ंे किसी का े भनक न लग,े इसक े लिए दोनो ने बहुत र्सतर्कता के साथ पाकिस्तान से आने का अलग-अलग समय और दिन प्रयोग किया था। पु िलस न े बताया- दाने ा ंे इस बात स े बेखबर थे कि पुलिस उनकी खबर रख रही है। पौष १७ गते ३ बजे इकबाल फिर विमानस्थल स्थित भन्सार कायार्ल य पहचँु ा आरै जा े पहल े स े वहाँ सुरक्षित रख्खा गया था, तीन सुटकेस उसने रिसिभ किया। पुलिस ने बताया, सुटकेस लेकर वह वापस गष्े ट हाउस आ गया, इस दारै ाना दाने ा ंे लोग कई बार नेपाल और पाकिस्तान फोन पर सर्म्पर्क कर रहे थे। करिब ४ बजे रुम नं.३०४ म ंे पहचँु े नपे ाली नागरिक काशीराम अधिकारी, सज्जाद स े गिफट् लने े हाटे ल पहचँु ।े काशीराम क े पास था नेपाली मोबाइलका सिम और १० हजार नेपाली नोट। काशीराम रात ११ बजे तक गेष्ट हाउस म ंे थ।े गष्े ट हाउस म ंे जात े समय काशीर ाम खाली हाथ था और बाहर आते समय उसके हाथ म ंे वही सटू कसे था, जा े इकबाल पाकिस्तान से लाया था। पुलिस ने आगे खुलासा किया- काशीराम सूटकेस लेकर त्रिपुरेश्वर स्थित ब्लर्ूबर्ड होटल के सामन े गाडीÞ स े उतरा आरै रुम न.ं ६११ म ंे जा पहचँु ा आरै पु िलस काशीराम का पीछा करत े हएु जा पहचँु ी, रुम म ंे सही सलामत काशीराम बठै भी नहीं पाया था कि अचान दरवाजा खुला और एक दजर्न सशस्त्र पु िलस न े रुम म ंे माजै दू सभी को घेर लिया। पुलिस ने बताया- काशीराम की बोल्ती बन्द हो गई। वह कुछ कहने लायक की स् िथति म ंे नही ं था। पु िलस न े काशीरामका सटू कसे उलटना सुरु किया और उसमे बनाया गया फल्स बटम -छिपाने की गोप्य जगह) दिखाई पडÞा और जब उसे पुलिस ने खोला तो मिला २५ लाख ४४ हजार ५ सौ भारतीय नकली नोट। पुलिस अधिकारी को लेकर रेडप्लानेट हाटे ल रुम न.ं ३०४ म ंे पहचँु ी, जहा ँ मौजूद थे सज्जाद और उनका सूटकेस, जिसे पुलिस ने अपने गिर फत् म ंे लिया आरै फिर अपरशे न शरुु हअु ा। सटू कसे म ंे स े पु िलस न े ३ किला े ७०० गा्र म हरे ाइे न बरामद किया। पुलिस ने फिर रुम न.ं २०४ म ंे धावा बाले ा आरै रुम खाली मिला, वहाँ इकबाल मौजूद नही ं था। पु िलसका े आशकं ा हर्इर्ु कि कही ं अपशे्र न का खुलासा तो नहीं हुआ। लेकिन जब काठमांडू क े ठमले स े इकबाल भी गिरफत् म ंे आया ता े पुलिस ने चैन की साँस ली। गिरफ्तार इन सभी से अलग-अलग पूछताछ हर्ुइ और सभी के तार जुडÞते गए युनूस अन्सारी अर्थात् नकली नोट किगं स।े काशीराम न े पु िलस बयान म ंे खलु ासा किया कि सटू कसे क े अन्दर क े बार े म ंे उस े कार्इर्े जानकारी नहीं है बल्कि उसे युनूस ने काम करने के लिए कहा था। तहकीकात से यह बात भी सामने आई कि काशीराम युनूसका बाडीगार्ड है। ब्लर्ूबर्ड होटल के सभी रुम को नेपाल कुस्ती संघ के नाम से बुक किया गया था जिसके अध्यक्ष थे युनूस अन्सारी। सन् २००८ डिसेम्बर १ से महीने का १० हजार भुक्तान के हिसाब से बुक किया गया रुम युनूस खुद भी प्रयोग करता था। शष्े ा ४५ पजे मंे गिरफ्तारी के पहले १२ घण्टे के अन्दर काशीराम अधिकारी के ९८४९३७७६३८ और युनूस के ९८५१११०४९२ मोबाइल नं. पर १४ बार फोन रेकार्ड पुलिसको प्राप्त हुआ, जो प्रमाण युनूसको जेल भेजने के लिए काफी था। दूसरे दिन ताछिखेल से युनूसको भी पुलिस ने गिरफ्तार कर

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