नया शक्ति मधेश के साथ हर कदम पर है ।डा.प्रवीण मिश्रा

 

dr mishraजनकपुर ४ गते ।(१६ फरवरी)
संविधान निर्माण में बाबुराम भट्राई की एक प्रमुख और सक्रिय भूमिका रही है । किन्तु संविधान जारी होने के साथ ही उन्होंने अपनी असंतुष्टि जताई और एक नई सोच के साथ आगे आने की घोषणा की और नया शक्ति का निर्माण किया । बाबुराम भट्राई एक कुशल राजनीतिज्ञ की तरह यह समझ गए थे कि इस संविधान का हर क्षेत्र में स्वागत नहीं किया जाएगा खास कर मधेश में और इसी के तहत उन्होंने अपनी नई रणनीति का निर्माण किया है । पर सवाल ये है कि इस नई शक्ति में भी तकरीबन वही लोग हैं जो पुरानी सोच के साथ थे ऐसे में सिर्फ नाम बदल देने से क्या नई सोच और नई शक्ति का निर्माण सम्भव है ? यह सवाल आम जनता के दिलो दिमाग में है । अभी नया शक्ति पूरे जोर शोर से अपनी पार्टी के प्रचार प्रसार में लगी हुई है । इसी सन्दर्भ में नया शक्ति से आबद्ध नया शक्ति के केन्द्रीय सदस्य डा. प्रवीण मिश्रा से बातचीत का सार यहाँ प्रस्तुत है—
—आप अभी मधेश में हैं, क्या इसकी कोई खास वजह है ?
जी मैं अभी नया शक्ति के प्रादेशिक सभा जो आज होना है उसी के सिलसिले में जनकपुर आया हुआ हूँ । यह सभा मुख्यतः इस विषय पर आधारित होगी कि हम नया शक्ति को कैसे इस क्षेत्र में आगे बढाएँ और जनता से जुड़ें । यह हमारी यहाँ की जनता से पहली औपचारिक मुलाकात भी होगी जो नया शक्ति के मंच से होगी ।
—कहीं ना कहीं मधेशी जनता संविधान निर्माण को लेकर बाबुराम भट्राई से भी असंतुष्ट है, ऐसे में आपको क्या लगता है कि यहाँ आपकी पार्टी को समर्थन प्राप्त होगा ?
हमने तो अभी पार्टी की घोषणा ही की है और अंतरिम कमिटी का गठन ही किया है ऐसे में इस शुरुआत में ही हम देख रहे हैं कि जनता उत्सुक है और हमसे जुड़ भी रही है उनका उत्साह हममें यह विश्वास पैदा कर रहा है कि हमारी पार्टी को जनता अपना समर्थन अवश्य देगी । लोगों में चाहत है हमसे जुड़ने की, मैं जबसे यहाँ आया हूँ तब से ही लोग हमसे मिलने आ रहे हैं । दरअसल लोग आज की परिस्थिति में परिवर्तन चाह रहे हैं और इसलिए नई सोच के साथ हमसे सम्बद्ध होना चाहते हैं और हम उनकी इसी परिवर्तन और नई सोच के साथ उनका साथ देना चाह रहे हैं ।
—आप अभी जिस जगह हैं वह नेपाली काँग्रेस का और मधेशी पार्टियों की धरती है यहाँ हमेशा इनका बोलवाला रहा है ऐसे में बाबुराम की नई पार्टी यहाँ अपना अस्तित्व कैसे कायम कर पाएगी ?
देखिए समय परिवर्तनशील होता है । पिछले समय में नेपाली काँग्रेस, एमाले माओवादी ये सभी पार्टी जिसतरह से मधेश की जनता के सामने आई है और मधेश के लिए जिस बर्बरतापूर्ण रुख को उन्होंने दिखाया है वह काफी है यहाँ की जनता के मोह को भंग करने के लिए । मधेश आन्दोलन में पचास से अधिक लोगों ने अपनी जानें गँवाई है और वह भी इस बड़ी पर्टियों के संरक्षण में तो क्या यहाँ की जनता यह विश्लेषण नहीं करेगी कि अब उन्हें कौन सा रास्ता चुनना चाहिए ? इतनी हिंसा और गैरसंवैधानिक, गैरव्यवहारिक व्यवहार ने जरुर जनता को अहसास दिला दिया होगा कि अब उन्हें क्या करना है । उनकी एकात्मक सोच और तानाशाही सोच ने इतने लोगों की हत्या कराई है क्या जनता इसे भुला पाएगी ? अधिकार की माग् को दमन से दबाने की कोशिश की गई है । जहाँ तक मधेशी पार्टी का सवाल है तो ये आपस में ही विभाजित है और इनके पास कोई निश्चित सोच नहीं है कि मधेश को कैसे अधिकार दिलाना है और मधेश को कैसे आगे ले जाना है । मधेशी पार्टी ने आजतक मधेश की जनता को सत्ता तक पहुँचने की सीढी बनाया है । जब सत्ता में पहुँच जाते हैं तो यहाँ की जनता और इनकी माँग को भूल जाते हैं । इस परिस्थिति में हमारी नई शक्ति ने तराई, पहाड़ और हिमाल को एक साथ और समानता के साथ ले जाने की जो नीति का निर्धारण किया है वही इसे यहाँ स्थापित करेगी । नई शक्ति क्षेत्रीय और केन्द्रीय दोनों जगह समानता के साथ चलने की नीति के साथ आगे बढ रही है । प्रतिनिधित्व की संवैधानिक व्यवस्था पार्टी के अन्दर होने जा रही है ये मधेशियों के हक हित और अधिकार को सुरक्षित करेगी और आगामी दिनों में विकास के लिए यह बड़ी उपलब्धि होगी । इन्ही सब बातों के लिए राष्ट्रीय स्तर की पार्टी की खोज जनता कर रही है । जो लोग काँग्रेस, एमाले और माओवादी साथ ही मधेशी पार्टी से नहीं सम्बद्ध होना चाह रहे वो हमारी नई शक्ति के साथ होंगे और ऐसे लोगों की लम्बी कतार है । मैं भी इसी राष्ट्रीय नीति के तहत मधेशी होते हुए भी इस नई शक्ति से जुड़ा हूँ ताकि इस पार्टी के द्वारा मधेश के अधिकार और पहचान को दिलाया जा सके । यह पार्टी कभी इस बात को विस्मृत नहीं कर सकती । मधेश, जनजाति, दलित, मुस्लिम इन सबका अधिकार दिलाने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं ।
—आप कह रहे हैं कि मधेश के साथ आपकी पार्टी है, परन्तु पिछले दिनों में मधेश जिस दौर से गुजरा आप उसमें मधेश के साथ नहीं थे और आज नाका खुलने के बाद मधेश की जनता जिस तरह निराश है उसमें आप क्या करने जा रहे हैं या आपकी क्या नीति है ?
ऐसा नहीं है कि हम मधेश के साथ नहीं थे हम जनता के साथ थे हम ही नहीं इसमें पुराने काँग्रेसी नेता भी थे क्योंकि यह आन्दोलन मधेशी मोर्चा का नहीं था बल्कि मधेश की जनता का था । आन्दोलन के शुरुआत में कोई दल इस आन्दोलन से आबद्ध नहीं थे, तीन चार हफ्ते के बाद अन्य दल इससे जुड़ने लगे । नई शक्ति अभी अपने शुरुआती दौर में है और यह चाहती है कि अंतरिम संविधान में जो अधिकार यहाँ की जनता को मिला था वो उन्हें प्राप्त हो । यह नाकाबन्दी भारतीय नाकाबन्दी नहीं थी यह हम हमेशा कहते आए हैं सरकार ने इसका गलत प्रचार किया । मधेशी जनता ने यह कदम उठाया था किन्तु इसका परिणाम जो आया वो सबके सामने है । मधेशी जनता ही सबसे ज्यादा पीड़ित हुई है ।
जहाँ तक आन्दोलन के शिथिल होने की बात है तो आन्दोलन एक पे्रशर कुकर की तरह होता है, जिसतरह अत्यधिक दबाब के बाद जो आवाज निकलती है उसी तरह दबाब ही आन्दोलन को जन्म देती है । इसी दवाब के तहत यह कम या ज्यादा होती है पर यह नहीं कहा जा सकता कि कम होना आन्दोलन का खत्म होना है । यह तब तक लोगों के अन्दर जीवित रहेगी जब तक उन्हें अधिकार नहीं मिल जाएगा । अभी यह कुछ कम हुआ है क्योंकि सरकार भी प्रयत्न कर रही है । संविधान संशोधन एक अछी पहल है जिसमें तीन माँगों पर सकारात्मक पहल हुआ है तीसरे माँग का भी निष्कर्ष अवश्य निकलेगा इसके लिए हम आशावादी हैं । हमारी पार्टी मधेशियों के माँग के साथ है और हम उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे ।
हमारी शुभकामनाएँ आपके और आपकी पार्टी के साथ है । समय देने के लिए धन्यवाद ।
आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद ।

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