नयी संविधानसभा:आसमान से गिरी खजूर पर लटकी

कञ्चना झा:भय और त्रास के बीच जब मंसिर ४ गते को संविधान सभा सदस्य के लिए मतदान सम्पन्न हुआ तो आम जनता ने चैन की सँास ली। नेकपा माओवादी सहित कुछ छोटे दलों ने चुनाव का बहिष्कार किया था और चुनाव को विफल बनाने के लिए वे लोग कुछ भी करने को तैयार थे। सडकों पे बम, बसों में बम, मतदान केन्द्र में बम और चार तरफ बन्द हडताल की श्रृंखला चल रही थी, लोग भयभीत थे। ऐसा लगता था- मानो चुनाव नहीं देश में कोई बडा युद्ध होने जा र हा है। मंसिर चार गते की शाम को मतदान का समय खत्म होते ही निर्वाचन आयोग ने पत्रकार सम्मेलन बुलाया और जानकारी दी कि मतदान शान्तिपर्ूण्ा और स्वच्छ रुप से सम्पन्न हो गया। sambidhan_sabha nepal 2013

उसने ये भी जानकारी दी कि लगभग ६५ प्रतिशत मतदाता ने अपना मत का उपयोग किया। ये अलग बात है- समानुपातिक की गणना खत्म होने के बाद प्रमुख निर्वाचन आयुक्त निलकण्ठ उप्रती ने दाबा किया कि प्रत्यक्ष तरफ लगभग ७८ प्रतिशत मतदान हुआ। निर्वाचन का परिणाम आ गया है। प्रत्यक्ष तरफ २ सय ४० मंे से नेपाली काँग्रेस १ सय ५ सीट ला कर सब से बडी पार्टर्ीीन गई है। नेकपा एमाले ९१ और एकीकृत माओवादी २६ सीट ला कर त्रमशः दूसरा और तीसरा दल बना। मधेश हक हित का नारा लगाने वाली तर्राई मधेश लोकतान्त्रिक पार्टर्ीी, मधेशी जनाधिकार फोरम लोकताँत्रिक ४ सीट पर सिमट कर रह गई है।

राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टर्ीी, मधेशी जनाधिकार फोर म नेपाल २, स्वतन्त्र २ और नेपाल मजदूर किसान पार्टर्ीीसदभावना और तर्राई मधेश सदभावना पार्टर्ीीे १-१ स् थान पर विजय हासिल की। वैसै ही समानुपातिक की ओर कुल ३ सय ३५ सीट में से नेपाली काँगे्रस को ९१, नेकपा एमाले को ८४ और एकीकृत माओवादी को ५४ सीट मिला है। इसी तरह र ाज संस्था और हिन्दू धर्मका नारा लेकर चुनावी मैदान में उतरे कमल थापा नेतृत्व के राष्ट्रीय प्रजातनत्र पार्टर्ीीे २४ स्थान मिले हैं। गौरतलब बात यह है कि इस पार्टर्ीीे प्रत्यक्ष के तरफ एक भी सीट पर विजय हासिल नहीं कर सकी।

समानुपातिक के तर फ मधेशी जनाधिकार फोरम लोकताँत्रिक को १०, राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टर्ीीो १०, मधेशी जनाधिकार फोरम नेपाल को ८ और तर्राई मधेश लोकताँत्रिक पार्टर्ीीो ७ स्थान मिला है। इसी परिणाम के साथ इस संविधान सभा में कुल दलों की संख्या ३० हो गयी है, जो पिछले संविधान सभा के तुलना में ५ ज्यादा है। और इसी परिणाम ने एक बार फिर अनिश्चितता को बढÞा दिया, वैसे तो मंसिर पाँच गते को ही जब कुछ ही सिटो की गणना हो रही थी तो परिणाम का संकेत दिख रहा था। बहुत सारी सिटों पर काँग्रेस अग्रस्थान में था और बाँकी बचे सीट पर एमाले। एकीकृत माओवादी को लग गया कि निर्वाचन का परि णाम अपने पक्ष में नहीं आने वाला है और उसी रात कर ीब दो बजे उसने पार्टर्ीीी आकस्मिक बैठक बुलायी और कहा कि निर्वाचन में ब्यापक धाँधली हर्ुइ है।

उसने मतगणना बहिष्कार करते हुए अपने प्रतिनिधियों को मत गणना स्थल छोडÞ देने को कहा। दूसरी तरफ मधेशवादी दलों की स्थिति भी कुछ वैसी ही थी। दूसरे दिन अधिकाँश मधेशवादी कञ्चना झा @ आसमान से गिरीे खजूर पर लटकी नयी संविधानसभा ः सत्य जो भी हो लेकिन एकीकृत माओवादी और मधेशवादी दल संघीयता, जातीय पहचान, धर्म निर पेक्षता के पक्षधर परिर् वर्तनकारी दल के रुप में जाने जाते हैं। और ये दानो शक्ति की लज्जाजनक पर ाजय एक बार फिर देश को अनिश्चितता की ओर धकेल दिया है। हिमालिनी l दिसम्बर/२०१३ ज्ञठ दल ने निर्वाचन में धाँधली का आरोप लगाते हुए मत गणना बहिष्कार करने लगे। सत्य जो भी हो लेकिन एकीकृत माओवादी और मधेशवादी दल संघीयता, जातीय पहचान,र् धर्म निरपेक्षता के पक्षधर परिवर्तनकारी दल के रुप में जाने जाते हैं।

और ये दानो शक्ति की लज्जाजनक पराजय एक बार फिर देश को अनिश्चितता की ओर धकेल दिया है। जैसा कि बुद्धिजीवी माने जानेवाले तरर् ाई मधेस लोकताँत्रिक पार्टर्ीीेन्द्रिय सम्पादन समिति के सदस्य डाक्टर विजयकुमार सिंह कहतें है- मतदान गणना प्रक्रिया में ब्यापक धाँधली हर्ुइ है और ये योजनाबद्ध रुप से हर्ुइ है। उनका कहना है कि मतदान समाप्ति के बाद मत केन्द्र से मत पेटिका ढुवानी, मतपेटिका भण्डारण और फिर भण्डार स्थल से मत गणना केन्द्र ले जाते समय में धाँधली हर्ुइ है। उनका कहना है कि मधेशवादी दल के नेताओं को भी योजनाबद्ध ढंग से हराया गया है। मधेशवादी दल को एक जगह नहीं होने देना और मधेशवादी नेता को भष्ट्राचारी के रुप में सञ्चार माध्यम का सहयोग लेकर अतिरंजित प्रचार किया जाना योजना के तहत होने का उनका दाबा है।

नेता सिंह के विश्लेषण में कितनी सत्यता है ये तो प्रमाण मिलने पर ही पता चलेगा लेकिन मधेश के लोगों ने मधेशवादी दल को वोट नहीं दिया ये बात नहीं। एजेन्डा एक ही, लेकिन टुकडे- टुक्रडे होकर चुनावी मैदान में उतरने के कार ण मधेशवादी दलों को बहुत बडÞा झटका लगा है इसमे कोई दो मत नहीं। और पहली संविधान सभा में जो एक बडÞी शक्ति थी मधेश वादी दल दूसरे संविधान सभा में उनके अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लग गया है।

सदभावना पार्टर्ीीे अध्यक्ष राजेन्द्र महतो हा ंे या मधशे ी जनाधिकार फारे म नपे ाल क े अध्यक्ष उपेन्द्र यादव सभी का यही मानना है कि स्वदेशी विदेशी ताकत परिवर्तनकारी शक्ति को जान बुझ कर हराया है। एकीकृत माओवादी तो निर्वाचन परिणाम को मानने को बिल्कुल तैयार नहीं। उसने स्पष्ट रुप से कह दिया ह ै कि निवार्च न म ंे हर्इर्ु  धाधँ ली की छानबीन के लिए उच्च स्तरिय समिति की गठन हाने ी चाहिए। अगर उनकी मागं ा ंे का े गम्भीर ता के साथ नहीं लिया गया तो संविधानसभा म ें सहभागी नही ं हागंे ।े चनु ाव क े परिणाम आत े ही एकीकृत माओवादी ने चुनावी धाँधली के छानवीन के लिए एक समीति का गठन किया था और सात दिन के बाद अर्थात मंसिर १९ को उस समिति ने अपना प्रतिवेदन पेश किया ह।

एकीकतृ माआवेदी क प्रि तवदे न म ंे स्पष्ट रुप स े कहा गया ह ै कि निवार्च न म व्यापक धाँधली हर्ुइ है। एकीकृत माओवादी ने पत्रकार सम्मेलन के जरिए यह आरोप लगाया है कि राज्य क े पत््र यक्ष सहभागिता म ंे धाधँ ली हर्इर्ु  ह।ै प्रि तवदे न म ंे कहा गया ह ै कि नीतिगत रुप म,ंे संरचनात्कमक रुप से और प्रक्रियागत ढंग से धाधँ ली हर्इर्ु  ह।ै कर्इ  स्थाना ंे पर मतदान क े सिर्फ  तथ्यांक में दूसरा संविधानसभा निर्वाचन निर्वाचन घोषणा ः

२०७० जेठ ३० गते निर्वाचन तालिका प्रकाशन ः असार ४ गते कार्यतालिका स्वीकृत ः असार २६ गते आचार संहिता जारी ः सावन ७ गते कुल मतदाता ः १ करोड २१ लाख ४७ हजार ८ सौ ६५ महिला मतदाता ः ६१ लाख ६६ हजार ८ सौ २९ पुरुष मतदाता ः ५९ लाख ८० हजार ८ सौ ८१ तीसरी लिंगी ः १५५ सबसे ज्यादा मतदाता ः काठमाडौ क्षेत्र नम्बर १० -५,३२,११०) सबसे कम मतदाता ः मनाङ -४७९५) क्षेत्रगत हिसाब से ज्यादा मतदाता ः भक्तपुर २ -८२,२१८) मतदान स्थल ः १०,०१३ मतदान केन्द्र ः १८,४५७ अपाँगमैत्री मतदान केन्द्र ः १५ जिल्ला में ४९ केन्द्र अस्थायी मतदान स्थल ः ३०० महिला कर्मचारीवाला मतदान केन्द्र ः ४१ जिल्ल्ाा में ८० बृद्धाश्रम अस्थायी मतदान केन्द्र ः ५० -पहली बार ) मतदान केन्द्र में कर्मचारी ः १ लाख २५ हजार ८ सौ ५८ मतदान केन्द्र में स्वयंसेवक ः ८८ हजार ९ सौ ४४ नेपाली सेना ः ६२ हजार नेपाल प्रहरी ः ४८ हजार म्यादी प्रहरी ः ४५ हजार सशस्त्र प्रहरी ः ३२ हजार अनुसन्धान प्रहरी ः ४ हजार निर्वाचन खर्च ः ७ अर्ब ७५ करोड विदेशी सहयोग ः ४ अर्ब ७५ करोड नेपाल सरकार ः ३ अर्ब जापान सहयोग ः २० करोड के निर्वाचन सामग्री चीन सहयोग ः १६ करोड भारत सहयोग ः ७१६ गाडी दर्ता हर्ुइ दल ः १३० समानुपातिक में दर्ता ः १२२ समानुपातिक कुल सीट ः ३३५ समानुपातिक उम्मीदवार ः १० हजार ७ सौ ९ समानुपातिक पुरुष ः ५ हजार ४ सौ ४८ समानुपातिक महिला ः ५ हजार २ सौ ९१ प्रत्यक्ष तरफ सीट ः २४० प्रत्यक्ष तरफ उम्मीदवार ः ६ हजार १ सौ २८ पुरुष उम्मीदवार ः ५ हजार ४ सौ ५९ महिला उम्मीदवार ः ६६८

तीसरा लिंगी उम्मीदवार ः १र् पर्यवेक्षण संस्था ः ५४ स्वदेशी छपे हुए मतपत्र प्रत्यक्ष ः १ करोड ४९ लाख ५२ हजार -हल्का नीला) छपे हुए मतपत्र समानुपातिक ः १ करोड ४९ लाख ५२ हजार -हल्का लाल) विचार ज्ञड हिमालिनी

l दिसम्बर/२०१३ एक दिन पहले मतदाता परिचय पत्र वितर ण करना, एक ही व्यक्ति का दो परिचय पत्र मिलना, मतपेटिका संकलन और भण्डारण का जिम्मा नेपाली सेनाको देना, देरी से मतगणना शुरु करना ये सब सुनियोजित प्रक्रिया थी। निर्वाचन आयोग ने सूचना नहीं देकर धाँधली छानबीन के लिए गठित एकीकृत माओवादी के समिति को भी सहयोग नहीं करने का आर ोप भी लगाया है। एकीकृत माओवादी सरकार, निर्वाचन आयोग और सेना सभी को धाँधली के लिए जिम्मवे ार मानत ंे ह।ै दूसरी तरफ अनिश्चितता से भरी नेपाल क े वतर्म ान राजनीति म ंे भी आम जनता नया ँ सं िवधान की आशा कर रही ह।ंै ले िकन संविधानसभा सदस्य जिसे जनता ने संविधान निर्माण के लिए भेजा है वो संविधान निर्माण क े बजाय सत्ता क े बार े म ंे साचे साचे कर महत्वपर्ूण्ा समय गवाँ रही है। अगर संविधान सभा के परिणाम का विश्लेषण किया जाय तो जनता ने किसी भी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया।

मतलब साफ है कि जनता चाहती ह ै सभी दल मिलजलु कर सरकार बनाय ंे आरै जनभावना क े अनरुु प सं िवधान निमार्ण् ा म ंे आग े बढे। जैसा की वरिष्ठ सञ्चारकर्मी गोपाल झा कहत ंे ह-ै नते ाआ ंे का े चाहिए की एक वषर्  क े भीतर दशे का े नया ँ सं िवधान द।ंे झा आग े कहत ंे ह ै कि सं िवधान म ंे आम जनता की भावनाआ ंे को समेटा जाना चाहिए ये नहीं कि दो दल या चार दल कहीं बैठ गये और अपने सुविधानुसार सं िवधान तयै ार कर द।े बहस सं िवधानसभा म ंे हा े आरै एक मके ानिज्म क े तहत सं िवधान बन ंे उनका कहना है। सञ्चारकर्मी झा इस बार सं िवधान निश्चित रुप स े बनन े की आशा रखत ंे ह ै क्यांेि क उनका मानना ह ै कि राजनीतिक दला ंे के लिए भी यह आखिरी मौका है। राजनीतिक विश्लेषक तुलानारायण शाह का भी कहना यही है- नयाँ संविधान सभा से जनता बहुत आश लगाकर बैठी हैं। शाह कहतें है कि आगामी संविधानसभा आम जनताको पहचान सहित की संघियता, धर्म निरपेक्षता, गणताँत्रिक लोकतन्त्र की ग्यारेन्टी सहित का संविधान दे। लेकिन राजनीतक दल में अभी भी यह सोच नहीं आई।

विभिन्न दल के नेता अभी सरकार का नेतृत्व, मन्त्रालय के भागवण्डा के बारे में सोच रहें है और देश की राजनीति अगर इसी तरह आगे बढी तो इस बार भी जनता को निराशा के अलावा कुछ हाथ नहीं आने वाला। नेपाल में दूसरी बार हर्ुइ संविधानसभा के निर्वाचन के परिणाम ने अगर किसी को सबसे ज्यादा निराश किया है तो वो है महिला। विभिन्न राजनीतिक दल से जुडे महिला नेतृत्व की संस्था अन्तरपार्टर्ीीहिला सञ्जाल ने भी खुल कर कह दिया है कि नीति निर्माण की तह पर महिला नहीं आये, यह सोचकर योनाबद्ध रुप से महिला को मौका नहीं दिया गया है। सञ्जाल के लोगों ने स्पष्ट कह दिया है कि अगर समानुपातिक तरफ उनको ज्यादा से ज्यादा स्थान नहीं मिला तो वो सडÞक आन्दोलन में जायेगें। वैसी भी कुल २ सय ४० निर्वाचन क्षेत्र में सिर्फ१० महिला जीत दर्ज करा सकी। प्रतिशत के आधार पर देखा जाय तो यह सिर्फ४ दश्मलव ५८ प्रतिशत है। स् मरण रहे, पिछली संविधानसभा में प्रत्यक्ष तर फ लगभग १२ प्रतिशत सीट महिला ने प्राप्त की थी। संविधानसभा में महिला प्रतिनिधि कि न्यून उपस्थिति को लेकर आम महिला नाखुश है। काठमांडू स्थित बुढानीलकण्ठ स्कुल में समाज शास्त्र की शिक्षिका

रमा सिंह निराशा प्रकट करती हर्ुइ कहती है कि ऐसी संविधान सभा से क्या अपेक्षा – सिंह के हिसाब से जानबूझ कर महिला को जगह नहीं दिया गया है। सभी जातजाती, धर्म, भाषा, लिंग की बात संविधान में समाहित किया जा सके इसिलिए संविधानसभा बनाने की जरुरत पडी लेकिन यहाँ तो गणितीय हिसाब से संविधान लिखने की साजिश हो रही है। सिंह अभी भी शसंकित है कि यह संविधान सभा भी संविधान दे पायेगी या नहीं। यह धारणा सिर्फसिंह की नहीं। नेपाल के पौने तीन करोडÞ जनसंख्या में अधिकाँश लोगों की सोच कुछ ऐसी ही है। इसे दर्ुभाग्य ही कहना चाहिए, क्योंकि निर्वाचन के नाम पर करिब अबोर्ंर् खर्च तो स्पष्ट दिख रहा है। सभासद बनने के लिए जो उम्मीदवार ने खर्च किया है उसे भी जोडÞा जाय तो ये खर्च लगभग ७० अर्ब के आसपास पहँुच जाती है। एक ऐसा देश जहाँ की जनता दो शाम खाना को लाले हों, लाखों युवा रोजगार के लिए पलयान हो रहे हों, उद्योग धन्दा कल कारखाना बिल्कुल बन्द अवस्था में हों, शिक्षा, स्वास्थ्य और भौतिक पर्ूवाधार नगण्य हों वहाँ इतनी बडÞी खर्च क्यों – राजनीति अस्थिर क्यों – जनता यही कहती है कि अब पानी सर से ऊपर बहने लगा, नेता को सदबुद्धि आये और देश को संविधान देकर हमें चैन से जीने दें।

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz