नव गठित नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी की ‘हाइकमाण्ड’ नहीं बन सका समावेशी

काठमांडू, १७ मई । नेकपा एमाले और माओवादी केन्द्र बीच पार्टी एकता हुई है । नवनिर्मित नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी संचालन के लिए ९ सदस्यीय हाइकाण्ड गठन किया गया है । नेताओं का कहना है कि पार्टी संचालन के लिए यह हाइकमाण्ड निर्णायक भूमिका निर्वाह करेगी । लेकिन समावेशी समानुपातिक दृष्टिकोण से ९ सदस्यीय हाइकमाण्ड कमजोर दिखाई दिया है ।
स्मरणीय बात तो यह है कि समावेशी समानुपातिक मुद्दा विशेषतः कम्युनिष्ट आन्दोलन की मुद्दा माना जाता है । लेकिन दो कम्युनिष्ट पार्टी की एकता प्रक्रिया में यही मुद्दा कार्यान्वयन में नहीं दिखाई दिया । अर्थात् समावेशी सहभागिता के बिना ही हाईकमाण्ड गठन किया गया है ।
हाइकमाण्ड में वरियता के अनुसार क्रमशः केपीशर्मा ओली, पुष्पकमल दाहाल, झलनाथ खनाल, माधवकुमार नेपाल, वामदेव गौतम, नारायणकाजी श्रेष्ठ, ईश्वर पोखरेल, रामबहादुर थापा और विष्णु पौडेल हैं । उल्लेखित हाइकमाण्ड में विष्णु पौडेल नवगठित पार्टी के लिए महासचिव रहेंगे और नारायणकाजी श्रेष्ठ को पार्टी प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी जाएगी ।

हाईकमाण्ड में नेकपा एमाले की ओर से ६ और माओवादी की ओर से ३ सदस्य हैं । लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि ९ सदस्यों में एक भी महिला नहीं है, सत प्रतिशत पुरुष हैं । माओवादी की ओर से महिला तो नहीं है, लेकिन जनजाति को अवसर दिया गया है । रामबहादुर थापा और नारायणकाजी श्रेष्ठ जनजाति की ओर से प्रतिनिधित्व करते हैं । लेकिन दोनों पार्टी की ओर से एक भी मधेशी को हाइकमाण्ड में शामील नहीं की गई है ।
हाइकमाण्ड को देखते हुए विश्लेषकों के बीच बहस होने लगा है कि वाम गठबंधन के नेता अपनी भाषण में समावेशी–समानुपातिक प्रतिनिधित्व की बात तो खूब करते हैं, लेकिन व्यवहारतः उसको कार्यान्वयन नहीं करते हैं । उन लोगों का कहना है कि कम्युनिष्ट आन्दोलन में महिला, मधेशी, जनजाति, थारु, मुस्मिल आदि सभी क्षेत्रों से समान योगदान रहा है, लेकिन नेतृत्व तह में अन्य जाति तथा समुदाय को अविश्वास करना आश्चर्य की बात है ।

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