नव वर्षमनाने का अलग अलग नजरिया आपकी नजर में नव वर्षकैसा हो

नव वर्षतो नयँा ही होता है लेकिन नव वर्षनेपाल व विहार में विक्रम सम्वत् के अनुसार वैशाख माह -अप्रैल) में मनाया जाता था। जो प्रकृति के साथ यानी जिस समय वृक्ष में नव पल्लव -पता) खिलता है नयाँ अन्न -चनाका सतु, चना का वेशन नया गेहूं की पूडÞी, आम की चटनी ) के साथ भोजन करके मिटी पानी का मिश्रण -कीचडÞ के साथ खेलकूद कर मनाया जाता है। जो फिलहाल औपचारिक मात्र रह गया है। अब तो बदलती दुनियां के साथ पूरा विश्वर् इस्वी तारीख यानी १ जनवरी को नव वर्षके रूप में मना रहे हैं। जिसमें खान पान के रूप में माँस मछली एवं मदिराका विशेष समावेश रहता है।

जिस के बारे मंे कुछ प्रमुख लोगो के विचार इस प्रकार हैंः- हम लोगों की जो परम्परा है, उसको तो मना ही रहे हैं। साथ ही विश्व के अन्य देशों के साथ आगे बढÞने के लिए इस्वी का नयाँ वर्षभी मनाने का प्रचलन बढÞ रहा है। वैसे देश के हर सरकारी एवं निजी काम काज इसी इस्वी तारीख से होता आ रहा है। सिर्फअच्छा खाना पिना से ही नया साल नही मनाना चाहिए। बल्की नये संकल्पर् नई योजना नया कुछ कर दिखाने की विश्वास के इस पर्व को मनाना चाहिए। वैसे हमारी सर कार -जदयु ने विहार के विकास के लिए अच्छे काम किए हैं। साथ ही आने वाली लोक सभा में विकास-मुखी सरकार एवं हर सुख सुविधा देने वाली एवं आपसी भाईचारा सद्भाव कायम र खने वाली सरकार को चुनंे। साथ ही नेपाल में अधूरी संविधान पूरी हो, यही नव वर्षकी शुभकामनाएं हैं। देवेश चन्द्र ठाकुर – सदस्य विहार विधान परिषद् विक्रम सम्वत हम लोगों की संस्कृति की उपज है तो इस्वी सम्वत विश्व संस्कृति की उपज है। दोनो नव वर्षहमारे लिए बराबर ही हैं। खानपीन में माँस मछली या अच्छा शाकाहारी भोजन कर लेने को ही नया साल के रूप मंे नहीं मनाना चाहिए।

बल्की अच्छे खानपीन के साथ अच्छी चींजों को अपनाते हुए बुरी चीजों को छोडÞ देनेका संकल्प लेना चाहिए। वेसे देश में नई लोक सभा चुनाव में भ्रष्टाचार मुक्त, विकास मुखी, आतंकवाद विरोधी सरकारको चुनें और नेपाल भारत के सम्बन्ध पहले से अच्छा बने और जल्द वहां जनता के हित में संविधान निर्माण हो। यही नव वर्षकी शुभकामना है। -सीताराम यादव -पर्ूव सांसद, सीतामढी सन ् २०१४ क े पथ्र म दिवस क े उपलक्ष्य म ंे हादिर्क शभु कामना इस उम्मीद तथा इच्छा स े पे्र्रि षत कर रहा ह ंू कि भारत की तरह नपे ाल भी आपसी समन्वय एव ं पभ्र ाव स े नतू न वषर् म ंे नतू न सं िवधान का निमार्ण् ा कर जनता तथा दशे का े चहमु खु ी विकाश कर।ंे ताकि पडाÞ से ी खशु ता े हम सब भारतीय भी खसु । हमार े पडाÞ से म ंे एे ितहासिक जीत दजर् करन े वाल े स्वतन्त्र सभासद ् चन्दश्े वर झा की विजय यात्रा स े सन्तष्ु ट एव ं पभ्र ावित हाके र लाखा ंे आशर्ीव ाद द े रहा ह ंू कि य े अपन े कतर्व् य एव ं दायित्व का े परू ा कर।ंे -जगदीश पाठक, भूतपर्ूव सैनिक, मलाही, सुरसण्ड नव वर्षहम लोग तो परम्परा के अनुसार वैशाख १ गत े का े ही मानत े ह ै क्या ंे कि हमार े दशे का हर सरकार ी एवं निजी काम-काज इसी विक्रम सम्वत् से चलता है।

वैसे १ जनवरी को देश-विदेश र्सवत्र विशेष खानपीन कर नयाँ वर्षका स्वागत किया जाता है। लोग पहले की अपेक्षा शिक्षित आरै सम्पन्न हएु ह।ंै इसीलिए किसी शभु अवसर क े बहान े पार्टर्ी करत े ह ंै आरै अपनी मित्रता का े पग्र ाढ Þ करत े ह।ंै नया ँ वषर् म ंे भी यही हाते ा ह।ै वसै े खानपीन क े साथ साथ गावं समाज दशे क े विकास क े लिए सकं ल्प ल ंे ता े इस े नव वर्षकी विशेष उपलब्धि मानी जाएगी। हर्रि्रसाद मंडल, अध्यक्ष -महोत्तरी नेपाल पत्रकार महासंघ हम लोगों का नव वर्षवैशाख महीना वाला ही था जो मूल रूपसे प्रकृति से जुडÞा हुवा था। लेकिन बदलते परिवेश में इस्वी तारीख यानी १ जनवरी को भी नयाँ वर्षमना लेता हूं। रही बात खानपान की तो इस अवसर पर कुछ विशेष तो हो ही जाता है लेकिन नई सोच एवं नई उम्मीद के लिए र्सवव्यापी अभियान चलाना ही होगा न कि सिर्फनव वर्षकी शुभकामना देने से काम चलेगा। -डा. अजित मेहता – सुरसण्ड मेरी नजर में नया साल बैशाख १ गतेको ही मानता हूं। क्योंकि हमारी सँस्कृति एवं प्रकृति के साथ देशका सभी कामकाज विक्रम सम्वत् के अनुसार ही चलता आ रहा है। वैसे १ जनवरी को पूरा विश्व नया साल के रूप में मनाता है, वह अलग वात है। उस में ज्यादातर लोग खानपीन में माँस मछली मदिरा का प्रयोग कर ते हैं, जिससे अनेक विवाद और लफडÞा होता रहता है। जो नहीं होना चाहिए। नव वर्षएक नया सन्देश, एक नई आशा, भाई चारा सद्भाव बनाने का संकल्प लेकर मनाना चाहिए। यही शुभकामनाएं हैं। -चन्देश्वर झा – स्वतन्त्र सभासद महोत्तरी क्षेत्र नं. ४, नेपाल प्रस्तुतिः नवीन कुमार नवल सीतामढी -विहार) नववषर् हम लागे बशै ाख महीना म ंे मनात े ह।ंै लेकिन बदले परिवेश के अनुसार नव वर्ष२०१४ खानपान से हटकर नई सोच नई उम्मीद के साथ कुछ कर दिखाने के लिए होना चाहिए। -सुरेन्द्र राय प्रखण्ड भाजपा अध्यक्ष , सुरसण्ड नव वर्षमें सिर्फखानपान का महत्व नहीं होता। बल्कि नव वर्षमे विश्व की समृद्धि एवं शान्ति का मार्ग प्रशस्त होना चाहिए। -रामकृपाल बैठा, सुरसण्ड चौक

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