नारीवाद की महिमा अपरम्पार

 

बिम्मी शर्मा

बिम्मी शर्मा

हमारे देश में जिस तरह से नारीवाद फल–फूल रहा है वह दिन दूर नहीं जब सड़क से लेकर संसद तक नारी ही नारी दिखे । यह “नारी बिच सारी है कि सारी बिच नारी है” जैसा नजारा नहीं होगा । यह तो स्कार्फ और शर्म का नारी से कोई नाता है की नही इस तरह से दिखाई देगा । अब तो महिलाओं के पहने जाने वाले कपडेÞ कुछ साल बाद म्यूजियम में ही दिखाई देंगे । नारीवाद का परचम हिलाकर नेपाल की महिला सरकार से दो शादी करने का कानून बनाने के लिए माँग कर रही हैं । उनका मत है कि जैसी पुरुषों को छूट है वैसी ही छूट समाज में और कानून में उन्हें भी मिलना चाहिए ।  जब यह दो शादी की माँग सरकार से कर रही तब इन्हें इस बात का इल्म नहीं है कि दो शादी करना दो नाव में पाँव रखने जैसा ही है । दो पति रखने के साथ ही उन्हें घर भी दो लेने पडेÞंगे । अभी एक ही पति होने से एक माँग बनाकर उसमे थोड़ा सा सिन्दूर लगाकर काम चल जाता था । जब दो पति होंगे तो दो माँग दोनाें कान के उपर बनाकर सिन्दूर भी दो जगह लगाना पड़ा न ? और गले में तिलहरी या मंगलसूत्र भी दो लटकाने पडेंÞगे ।
यहाँ पर नारीवाद की महिमा इतनी अपरम्पार है कि महिलाएँ यहाँ पर खुले आम कहती हैं कि वह शादी नहीं करना चाहती पर बच्चे जरुर पैदा करना चाहती हंै । इस के लिए वह अपनी सहेली के पतिदेव को एक हपm्ते के लिए उधार माँगने से नहीं डरती । यह ‘सरोगेट पिता’ की अवधारणा ला कर सारे संसार  में नेपाल का नाम रोशन करेगीं । बेचारा पुरुष (पिता,पति व प्रेमी) भविष्य में बस एक बीज बन कर रह जाएगा । सूखा पड़ने पर बीज के रूप में काम आनेवाला अनाज जैसा होगा इन पुरुषों का काम महिलाओं के लिए ।
प्रतिस्पद्र्धा में इतनी आगे बढ़ चुकी हैं कि उनकी गतिविधि देख कर अच्छा भला इन्सान भी माथा पीट ले । गलत काम मर्द करें या औरत गलत ही है । पर यह औंरते अपने पति, प्रेमी व अन्य रिश्तेदार मर्द को तो सुधार नहीं सकी, अब खुद ही उन के जैसा बरताव कर रहीं हंै । मर्द दिन में एक डिब्बा सिगरेट पिएगा तो नारीवाद से ग्रस्त औरत दो डिब्बा पिएँगी । मर्द चार पैग शराब पिएगा तो औरत उससे पीछे क्याें रहें ? आखिर नारीवाद से ग्रस्त औरत हैं आठ पेग शराब पीकर ढुलमुल हो जाएगी । अगर पति या प्रेमी का और भी महिलाओं से सम्बन्ध है तो वह भी पीछे क्यों रहे ?औरत भी मर्द की तरह उसके दो प्रेमिका है तो अपने लिए चार प्रेमी या पुरुष साथी बनाएगीं ।
है न मजेदार और अपरम्पार नारीवाद की महिमा ? जब मर्द हाफ पैण्ट, जंघिया पहन कर या तौलिया लपेटकर बाहर घूम सकता हैं तो नारीवाद से ग्रस्त औरत इस में भी पीछे क्यो रहें ? वह भी कपड़े का छोटा सा चिथड़ा पहन कर या सर्वागं हो कर शान से बाहर निकलती हैं । अब कोई माई का लाल उन्हें साफ करके माँस के दुकान मे लटकाया गया ब्रोअइलर चिकन या मटन समझता है तो यह उसकी गलती है । औरत तो आजाद है शरीर में पहने हुए कपड़े से भी और दिमाग से भी ।
नारीवाद से ग्रस्त औरत को पति भी फस्र्ट हैण्ड पसन्द नहीं हैं । उन्हें तो अनुभवी, दो चार बच्चे का बाप किसी दूसरी औरत का पति ही पसन्द आता है । इसीलिए मञ्च में तो नारीवाद से ग्रस्त औरतें नारीवाद का जोरदार भाषण देती है और व्यवहार में किसी दूसरी औरत के पति को झपटकर अपना घर और जीवन आवाद करती हैं । विश्वास नहीं है तो खुद जा कर देखिए ‘अक्यूपाई बालुवाटार’ में जोर, जोर से नारा लगाने वाली नारीवाद से ग्रस्त औरतों का निजी जीवन । जब एक औरत अपने जैसी ही दुसरी औरत का दुख नहीं समझती है । उसको दहेज न लाने व कम लाने के कारण ताने देती हैं, जलाती हैं तब उनका नारीवाद कहाँ जाता है ? जब किसी गाँव में एक बूढ़ी और अकेली औरत को डायन का आरोप लगाकर पैखाना उसके मुँह मे जबरदस्ती डाला जाता है और उसको अपने गाँव से बेदखल किया जाता है तब यह नारीवाद कहाँ गुम हो जाता हैं ? जब एक लडकी या बच्ची का ‘रेप’ किया जाता है तब इनका नारीवाद शर्म से पानी पानी नहीं होता ?
संविधान में दो शादी या दो पति की माँग  करने वाली इन नारीवाद से ग्रस्त औरतों  ने ‘रेप’, महिला हिंसा, दहेज कम लाने के कारण औरतों को जलाये जाने पर और डायन का आरोप लगाकर गाँव से निकाले जाने के विरोध मे सख्त कानून या सजाय ए मौत की माँग क्यों नहीं की  सरकार से । लेकिन नहीं इन्हें तो बस नारीवाद के नाम पर अपनी मौज मस्ती की पडी हैं । बाकी समाज और महिलाएँ जाएँ भाड़ में । नारीवाद के नाम पर एनजिओ और आइएनजिओ चलाने वाली यह औरतें महीने में लाखों कमाती हैं । उसको क्लबों में जुआ, शराब और अपने प्रेमी पर उड़ाती हैं । इनमें से ज्यादातर औरतों का घर उजड़ा हुआ है । न इन्हें अपने परिवार की,  न समाज की ही फिक्र है ।
नारीवाद की गुहार लगाने वाली औरतें दूसरी औरत के सर पर सौतन बन कर नाचती हैं । क्योंकि इन्होंने नारीवाद के नाम पर यही सीखा और जाना है । और अपने जैसी दूसरी औरतों को भी यही सिखा रही हैं । सावन का महीना है । हरी चूड़ी और मेहंदी मे सजी औरतें हर तरफ दिखाई देती हैं । ‘अब सावन के अन्धे को हर जगह हरा ही दिखाई देगा न ?’ इसलिए यह औरतें अपना और अपने देश का हरापन कायम रखना चाहती हैं । इसीलिए दो शादी या दो पति रखने के लिए कानूनी नियम बन जाए तो यह कभी विधवा नहीं होगी । एक पति मरा या उस से तलाक हो गया तो दूसरा है न ?
उसी पति के नाम पर सिन्दूर लगाएँगीं, सावन में हरी चूड़ी और मेंहदी भी लगा कर सरकार का हरित क्रान्ति का सपना पूरा कर देगी । सरकार इतने सालों से कृषि में हरित क्रान्ति के लिए अर्बो का बजट स्वाहा कर रही है । पर परिणाम शून्य है । इससे अच्छा तो सरकार कृषि को आवंटन किया गया बजट औंरतो को दे दे । कम से कम अपने श्रृंगार, हरी चूड़ी और मेंहंदी में सरकारी पैसे का सदुपयोग कर के इस सावन महीने को हरित क्रान्ति में बदल कर यह औरतें अपना और  सरकार का सपना तो पूरा कर देगी ।
पुराने जमाने में पति के मरने पर पत्नी उस के साथ चिता मे बैठ कर सती हो जाती थी । अब उसी के तर्ज पर ‘सताप्रथा’ (सती प्रथा का पुलिगं स्वरूप) को संविधान मे माँग करना चाहिए । उसी हिसाब से कानून बनेगा तो पत्नी के मरने पर पति ‘सता’ हो जाएगा  नहीं तो फिर पत्नी के मरने के बाद वह दूसरी औरतों के साथ मस्ती कर सकता है । हो सकता है वह दूसरी शादी ही कर ले ? इस से परलोक सिधार चूकी नारीवाद की हिमायती उन पत्नियों  की आत्मा कितनी दुखी होगी ?
जिस तरह कभी शराब, शबाब और कबाब मे एकक्षत्र राज करने वाले पुरुषों की दुनिया में यह नारीवादी औरतें सेंध लगा कर कब्जा कर चुकी हैं । उसी तरह सतीप्रथा जो नारियों के लिए बनाया गया था उस में अब पुरुषों का एकाधिकार करवाने और कानून बनाने के लिए सरकार से इन नारीवादियों को जोरदार माँग  करनी चाहिए । यह २१ वीं शताब्दी है । अब यहाँ की औरतें चाहे कुछ बने न बने नारीवादी जरुर बनती है । इक छोटी सी बच्ची बड़ी हो कर डाक्टर, इन्जीनियर, सीए, शिक्षिका, नेता या अच्छी इन्सान बने न बने पर नारीवादी जरुर बन जाती है । क्योंकि उसे नारीवाद घुट्टी में पिलाया जा रहा है । जैसे माकर््सवाद, साम्यवाद और समाजवाद या फासीवाद है उसी तरह नारीवाद भी एक वाद है ।  इसीलिए नारीवाद की महिमा अपरम्पार है ।
जय हो नारीवादकी !

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