‘नारी तुम अब गढ़ लो एक नयी कहानी

विनोद कुमार विश्वकर्मा विमल
काठमान्डौ

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हिन्दू समाज में दहेज प्रथा एक महान कलंक है, यह एक ऐसा दानव है जो गरीब कन्याओं को जीते जी मार डालता है ।
पूर्व समय में, समाज में दहेज नामक कोइृ वस्तु थी ही नहीं । पिता अपनी पुत्री के विवाह में और विवाह के बाद भी दानस्वरूप या अपनी प्रतिष्ठा व सम्मान के लिए उपहार देता था । जब जब पुत्री पिता के घर आती थी तो पिता उसे कुछ न कुछ देकर विदा करता था, जो उस समय स्नेह का प्रतीक था । धीरे धीरे लोगों की धारणा बदलती गई और वह स्नेह लोभ में परिवर्तित हो गया । अब तो पिता को अपनी पूत्री के विवाह के लिए अपना सब कुछ बेचना पडता है । तब कर्ही जाकर वह अपनी पूत्री का विवाह कर पाता है । इसके बाद भी आए दिन दहेज के लोभी अपनी बहुओं को मार रहे हैं ।
जिनके पास कुछ नहीं होता वो भी बड़ी बड़ी माँगें करते हैं और जिनके पास सब होता है उनकी तो पूछिए ही मत । उनका मुख तो और भी सुरसा के समान फैला होता है । यही वजह है कि बेटियों के प्रदा होने पर घरवालों के मन उदास हो जाते हैं । वहाँ खुशियों के गीत नहीं गाए जाते हैं । कई जगहों में तो आज भी बेटियों को पैदा होते ही मार दिया जाता है । इतना ही नहीं बेटियों को कोख में ही मार देने का तो फैशन ही हो गया है । विडम्बना है कि जहाँ नारियों को देवी, अन्नपूर्णा, गृहलक्ष्मी आलि उपनामों से पुकारा जाता है, ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ कहा जाता था वहीं अब उसे कुलटा, चुडैल आदि कह कर पुकारा जाता है ।
आजकल नेपाल में एक हलचल मची हुई है । नारी मंच, नारी मुक्ति मंच आदि द्वारा नारी की स्थिति में परिवत्र्तन लाने के लिए कुछ जागरुक नारियाँ अथक परिश्रम कर रही हैं, किन्तु नारी अधिकारों के लिए व्यवस्थापिका संसद में बैठी महिलाएँ एक दो को छोड़कर कितनी मुखर हैं ? नारी मुक्ति मंच का क्या अभिप्राय है ? समाज से मुक्ति या इस जीवन से मुक्ति । नारी मुक्ति के स्थान पर नारी शक्ति के लिए प्रयास करना उचित होगा ।
‘कामी वचन, सती मन’ जैसे प्रेमचन्द की ‘धनिया’ या यशपाल की ‘दिव्या’ बनना होगा, नारी को स्वावलम्बी यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाकर सामाजिक रुढ़ियों एवं कुप्रथाओं के प्रति जागरुक होना होगा । ‘आँचल में है दूध, आँखों में पानी’ के स्थान पर अब उसे दुर्गाबाई या लक्ष्मीबाई बनना होगा ।
‘नारी तुम अब गढ़ लो एक नयी कहानी
या तो बनो दुर्गाबाई या झाँसी की रानी ।’
इस धरा को स्वर्ग बनाइए, दहेज प्रथा का बहिष्कार करिये, नारी एक अभिशाप है इस धारणा को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प करिये इस प्रकार यह धरा स्वर्ग बन जाएगी ।

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1 Comment on "‘नारी तुम अब गढ़ लो एक नयी कहानी"

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BP Lohani ( president Option Nepal)
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BP Lohani ( president Option Nepal)

Lekhak Binod Kumar Bishwokarama ek jujharu lekhak hunu hunx . onha le harek bishayma jankari rakhanu hunx .r onhaka bichar haru onha ko lekhani yo ptrika bat aae rahos .m pratiksa garane xu .thanks Binod ji please go ahead.

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