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निजामती सेवा में कार्यरत कर्मचारी की उम्र ५८ से बढाकर ६० वर्ष बनाने का सिफारिस

निजामती सेवा में कार्यरत कर्मचारी की उम्र ५८ से बढाकर ६० वर्ष बनाने का सिफारिस
काठमाडौं,मंसिर १८
राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी के समक्ष लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष उमेशप्रसाद मैनाली ने आयोग द्वारा आर्थिक वर्ष २०७२ और ०७३ में सम्पादन किए गए कार्य तथा सुझाव सहित का ५७औँ वार्षिक प्रतिवेदन पेश किया है ।
राष्ट्रपति भवन, शीतल निवास में शुक्रबार राष्ट्रपति के समक्ष प्रतिवेदन पेश करते हुए अध्यक्ष मैनाली ने ले नयाँ संविधान बमोजिम व्यवस्थापिका–संसद् से पारित होने के समय आने वाले ऐन नहीं आने से संवैधानिक संकट आने की बात कही ।
प्रतिवेदन में सरकार ने आयोग की स्वीकृति के बिना कर्मचारी सरुवा करने, समय में बनने वाले ऐन के नहीं बनने से समस्या आने और आयोग की भूमिका को कमजोर करने की प्रवृत्ति बढ रही है, सङ्गठित संस्था से परामर्श न कर कार्य करना और परामर्श करने पर भी निर्देशन का पालन न करने का उल्लेख किया है ।
आयोग के प्रतिवेदन में कहा गया है कि, ‘संविधान और ऐनद्वारा व्यवस्था किए गए में मात्र आयोग द्वारा प्रतिनिधित्व करना और इसके अलावा आदेश, नियम, विनियम से व्यवस्था होने पर आयोग के पदाधिकारी द्वारा प्रतिनिधित्व न करने की व्यवस्था होनी चाहिए । नेपाल सरकार का सम्बन्धित निकाय की ओर ध्यानाकर्षण होने की अपेक्षा करते हैं ।

राजपत्राङ्कित तृतीय श्रेणी के न्याय सेवा तर्फ तथा राजपत्र अनङ्कित द्वितीय श्रेणी के आन्तरिक प्रतियोगिता में माग सङ्ख्या की तुलना में कम सङ्ख्या में उम्मेदवार अन्तर्वार्ता के लिए चूने जाने की अवस्था में मांग बमोजिम पदपूर्ति नहीं हो सकती है इस बात का उल्लेख भी प्रतिवेदन में किया गया है ।
आयोग ने निजामती सेवा में कार्यरत कर्मचारी की उम्र ५८ से बढाकर ६० वर्ष बनाने का सिफारिस की है

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