निराशा के अन्धकार में सी के राउत अवगुण्ठित चिंगारी के रूप में दिखतें हैं

ckr brtकुमार सच्चिदानन्द , शनिवार, १९ गते पूस, शाम यह खबर आग की तरह फैली कि सी. के.राउत विराटनगर में प्रहरी के दमन में घायल हुए जबकि एक दिन पूर्व ही यह खबर भी आयी थी कि स्थानीय प्रशासन ने उन्हें शांतिपूर्ण सभा करने की अनुमति दे दी है । फिर यह भी खबर आई कि आयोजित सभा की पूर्वसंध्या में प्रचाररत उनके कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया । ये परस्पर विरोधी खबरें और श्री राउत के सम्बन्ध में प्रशासन का क्रिया–कलाप पूरी तरह विरोधाभासपूर्ण और अनिर्णय की अवस्था में है और एक तरह से परिस्थितियों को जटिल बनाने की दिशा में अग्रसर है । एब बात तो माना ही जाना चाहिए कि जिस तरह दिनानुदिन उनके समर्थकों की संख्या बढ़ती जा रही है, प्रहरी का यह प्रतिरोध किसी भी दिन हिंसक रूप ले सकता है और यह आग पूरी तराई को अपनी लपेट में ले सकती है । मधेश की राजनीति करने वाली मध्यममार्गी पार्टियाँ उनके कदम और उनकी विचारधारा से विमति रखती है इसलिए उनकी ओर सवल भरी निगाहों से देखती है लेकिन विगत आठ स।ल की अवधि में उन्होंने अपनी जो छवि प्रस्तुत की है उससे आम लोगों में घोर निराशा की अवस्था है और इसी निराशा के अन्धकारमें सीं के राउत अवगुण्ठित चिंगारी के रूप में दिखलाई दे रहे हैं । वत्रर्तमान संक्रमण काल में जिस तरह सरकार तराई–मधेश की संवेदना को दमित कर संविधान जारी करने की मनःस्थिति में है, ऐसे में कब यह चिंगारी शोला का रूप धारण कर लेगा, कहना मुश्किल है । एक बात तो कबूल किया ही जाना चाहिए कि अाम मधेशियों की शहादत की कीमत इस देह में कम है । इसीलिए यह तर्क दिया जाता है जिस गणतंत्र को स्थापित करने में नेपालियों का खून बहा उसे समाप्त करने के लिए मधेशी और माओवादी तुले हुए हैं । गौरतलब है कि जनान्दोलन—२ में जितनी शहादत हुई और जितना खून बहा उसका कई गुणा अधिक बलिदान मधेशियों ने संंघीयता और समग्रं मधेश प्रदेश के लिए दिया मगर इसकी उपेक्षा कर सरकार संविधान जारी करने की ckr-1मनःस्थिति में है और मधेश में इसकी तीव्र प्रतिक्रिया की संभावना देखते हुए तराई–मधेश के सोलह जिलों को संवेदनशील घोषित कर दिया है और एक तरह से दो–दो हाथ करने की सोच में है । अब देखना यह है कि आम मधेशियों के इस असंतोष को आवाज कौन देता है ? मधेश की राजनीति करनेवाले दलों में इस संवेदनशील घड़ी में भी अलगाव और परस्पर अविश्वास की जो अवस्था है उसके मद्देनजर बहुत उम्मीद नहीं की जा सकती । सी. के. राउत के प्रति जो सरकार प्रशासन का रवैया है उससे स्पष्ट है कि वह बहुत जल्दी उन्हें हीरो बनाने पर तुला हुआ है और सरकारी कदमों का प्रतिकार प्रतिकार करने का अहिंसक तरीका उन्होंने ढूँढा उसकी बदैलत तो यह कहा जा सकता है कि परिस्थितियाँ उन्हें मधेश की राजानीति का तिलक या गाँधी बना दे ।

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