निर्णायक भूमिका के लिए प्रधानमंत्री और अध्यक्ष प्रचंड को जिम्मेदारी

sushil-prachandaकाठमांडू। १५ मार्च । सहमति के आधार पर संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए प्रधानमन्त्री सुशील कोइराला एंव एकीकृत नेकपा (माओवादी) का अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल (प्रचण्ड) को मसौदा तैयार करने के  जिम्मेदारी दी गई है।
शनिवार प्रधानमंत्री निवास  बालुवाटार मे सत्तारुढ पार्टी एंव तीस पार्टी   विपक्षी दल के साथ हुर्इ वार्ता मे हुइ बातचित से प्रधानमंत्री  और प्रचण्ड को जिम्मेदारी दी गर्इ है।
सत्तारुढ दल के  पक्ष से  प्रधानमंत्री कोइराला और विपक्षी पक्ष मोर्चा समन्वयक प्रचण्डबीच सविधान की अंतर्वस्तु में आम सहमती  के लिए किया है।
यहां तक कि नेपाली कांग्रेस के सभापति, प्रधानमंत्री और समन्वयक प्रचण्ड नाकाम रहने के बाद भी वार्ता से निकास के लिये प्रमुख राजनीतिक दलों में प्रधानमंत्री के निवास मे वार्ता के लिए सहमत हो गया है।
प्रमुख चार दलों के बिच हुर्इ वार्ता से सहमति नाही होने के बाद् सहमती के आधार पर संविधान निमार्ण कि वातावरण तयार केरने के लिए प्रधानमंत्री स्वयम द्विपक्षीय वार्ता से  आगे बढ़ने का फैसला किया है माओवादी उपाध्यक्ष नारायण श्रेष्ठ ने यह जानकारी दी ।

बैठक में पिछले ५ जनवरी मे  प्रधानमंत्री के समक्ष हुइ सहमति के आधार पर  वार्ता प्रक्रिया आगे बढाने का आग्रह किया गया है। राज्य पुनर्गठन के आलावा  अन्य मुद्दों पर ५ जनवरी को  वार्ता नजदिक पहुंच गया था।

सभापति कोइराला ने दलों को बाद विबाद नहीबढ़ाकर  सहमति से आगे बढने का ाघ्रह किया है इसकी जानकारि न्याय, संविधानसभा और संसदीय कार्य मंत्री नरहरि आचार्य ने दी ।
बैठक में चार पक्षों के बिच हुइ बातचीत के आधार पर संविधान का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढाने की बात हुइ थी।

बैठक में प्रधानमंत्री कोइरालाने वार्ताकी विषयवस्तुमे प्रवेश करने के लिये सत्तारुढ दलकी ओर से नेकपा (एमाले) का उपाध्यक्ष एंव उपप्रधानमन्त्री और गृहमन्त्री वामदेव गौतम को अपनी राय पेश करने को समय को दिया  था।
उपाध्यक्ष गौतम ने शुक्रवार को अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के निवास पर हुइ विचार विमर्श के आधार पर पिछले अक्टूबर मे सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा प्रस्तुत  की गइ  नौ सूत्री प्रस्ताव पर ध्यान केंद्रित किया था ।
एमाले उपाध्यक्ष गौतम ने पुनर्गठन जातीयता के आधार पर नहीं हो सकता,पहाड़ और तरार्इ का पहचान को खंडित नहीं किया जा रहा, बिगत जनादेश पालन करने की जरूरत पर जोर दिया।
प्रधानमन्त्री ने असहमति के बारे से संवाद से हल करने पर जोड दिया । लेकिन माओवादी सचिव बर्षमान पुन  ने कहा कि एमालेकी ओर से  नेता गौतम द्वारा प्रस्तुत नौ बुँदे के संदर्भ मे आम सहमति नहीं किया जा  सकता ।
उपाध्यक्ष   गौतम  ने कहा कि जातीयता, राज्य पुनर्गठन, पहाड़ियों और इसी प्रकार माओवादी और मधेशी दलों द्वारा दी गइ सुझाव के आधार पर देश को खंडित किया जा सकता

बैठक में कांग्रेस के  उपसभापति रामचन्द्र पौडेल, नेता शेर बहादुर देउबा, नेकपा (एमाले०)की भीम रावल, नेता माधव कुमार नेपाल, एमाओवादी के महासचिव कृष्ण बहादुर महारा और मधेसी पार्टियों के शीर्ष नेताओं की सहभागिता रही थी ।

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