निर्वाचन क्षेत्र निर्धारण आयोग ने सरकारको दिया प्रतिवेदन (देखिए, कहां कितना है– निर्वाचन क्षेत्र)

काठमांडू, १५ भाद्र ।
निर्वाचन क्षेत्र निधारण आयोग ने अपनी प्रतिवेदन सरकार को हस्तान्तरण किया है । आयोग के अध्यक्ष कमलनारायण दास ने मंगलबार साम प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा समक्ष प्रतिवेदन हस्तान्तरण किया था ।
प्रतिवेदन के अनुसार आयोग ने संघीय संसद के लिए देशभर कूल १६५ निर्वाचन क्षेत्र निधारण किया है और प्रदेशसभा के लिए कूल ३३० निर्वाचन क्षेत्र बनाया है । प्रतिवेदन के अनुसार १ नम्बर प्रदेश में २८, २ नम्बर प्रदेश में ३२, ३ नम्बर प्रदेश में ३३, ४ नम्बर प्रदेश में १८, ५ नम्बर प्रदेश में २६, ६ नम्बर प्रदेश में १२ और ७ नम्बर प्रदेश में १६ निर्वाचन क्षेत्र कायम किया है । संविधान के अनुसार संघीय संसद में जितने प्रतिनिधी निर्वाचित होते हैं, उसके दोब्बर प्रतिनिधी प्रदेशसभा के लिए निर्वाचित होते हैं । उदाहरण के लिए २ नं. प्रदेश से संघीय संसद के लिए ३२ जनप्रतिनिधी निर्वाचित होते हैं, और वही २ नं. प्रदेश से प्रदेशसभा के लिए ६४ जनप्रतिनिधी निर्वाचित होते हैं ।


नया संरचना अनुसार काठमांडू जिला में सबसे ज्यादा निर्वाचन क्षेत्र कायम किया गया है, जहां १० निर्वाचन क्षेत्र है । स्मरणीय बात यह है कि इससे पहले भी काठमांडू में १० ही निर्वाचन क्षेत्र निर्धारण किया गया था । काठमांडू के अलवा अन्य जिला में निर्वाचन क्षेत्र कम किया गया है । यहां तक कि ३५ जिलों तो सिर्फ १ ही निर्वाचन क्षेत्र है । काठमांडू के बाद सबसे ज्यादा निर्वाचन क्षेत्र मोरङ में कायम किया है, जहां ६ निर्वाचन क्षेत्र है ।
सिर्फ एक निर्वाचन क्षेत्र रहने वाले ३५ जिलों में ताप्लेजुङ, पाँचथर, धनकुटा, तेह्रथुम, संखुवासभा, भोजपुर, सोलुखुम्बु, ओखलढुंगा, खोटाङ, रामेछाप, दोलखा, रसुवा, लम्जुङ, मनाङ, मुस्ताङ, म्याग्दी, पर्वत, अर्घाखाँची, प्युठान, रोल्पा, रुकुम पूर्व, रुकुम पश्चिम, सल्यान, जाजरकोट, डोल्पा, जुम्ला, कालिकोट, मुगु, हुम्ला, बाजुरा, बझाङ, डोटी, डडेलधुरा, बैतडी और दार्चुला है । इससे पहले इनमें से अधिकांश जिलों में २ निर्वाचन क्षेत्र निर्धारण किया गया था ।
इसी तरह इलाम, उदयपुर, सिन्धुली, सिन्धुपाल्चोक, काभ्रे, भक्तपुर, नुवाकोट, धादिङ, मकवानपुर, गोरखा, तनहुँ, स्याङ्जा, बाग्लुङ, नवलपरासी (सुस्ता से पूर्व), नवलपरासी (सुस्ता से पश्चिम, बर्दघाट तक) पाल्पा, गुल्मी, बर्दिया, सुर्खेत, दैलेख और अछाम में दो निर्वाचन क्षेत्र कायम किया गया है । ललितपुर, चितवन, कास्की, कपिलवस्तु, दाङ, बाँके और कञ्चनपुर जिला को तीन निर्वाचन क्षेत्र में विभाजन किया गया है ।
चार निर्वाचन क्षेत्र रहने वाले जिलों में सुनसरी, सिराहा, सप्तरी, धनुषा, महोत्तरी, सर्लाही, रौतहट, बारा और पर्सा है । स्मरणीय है, प्रदेश नं. २ में रहे सभी आठ जिलों को चार–चार निर्वाचन क्षेत्र में विभाजित किया गया है । इसीतरह झापा, रुपन्देही और कैलाली जिला में ५ निर्वाचन क्षेत्र कायम किया है ।

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