नृत्य नाटिका की मनोरम शैली रासलीला : काठमाण्डू में

ras-3श्वेता दीप्ति,२६ दिसम्बर,२०१४ । काठमान्डू २६ गते भारतीय सांस्कृतिक केन्द्र भारतीय राजदूतावास ,काठमान्डू द्वारा रासलीला नृत्य पाटन म्यूजियम कोर्टयार्ड में और हनुमान ढोका दरबार स्क्वायर, बसन्तपुर में प्रस्तुत किया गया । भारत वृन्दावन से आए स्वामी फतेह कृष्ण शर्मा के सोलह सदस्यीय ग्रुप ने रासलीला नृत्य प्रस्तुत किया । इसके अन्तर्गत मयूर नृत्य, डान्डिया रास, माखन चोरी और फूलों की होली लीला प्रस्तुत की गई । ठण्ड के इस मौसम में सभी दर्शकों ने भरपूर आनन्द लिया । नृत्य प्रस्तुति अत्यन्त ही मनोरम थी । रासलीला अर्थात वह लीला जिसे देखकर, सुनकर रस का आस्वादन हो सके । इसके अन्तर्गत कृष्ण की मनमोहनेवाली अदाओं का मोहक चित्रण होता  है । माखन चोरी, वस्त्र चोरी, गोपियों के साथ आँख मिचौली, मैया यशोदा के साथ रूठना मनाना और सबसे अधिक मोहक गोपियों के साथ रास रचाना इन सारी बातों का सम्यक रूप है ras-2रासलीला । चोरी अच्छी बात नहीं है किन्तु शुकदेव मुनि कहते हैं कि श्री कृष्ण की माखन चोरी या वस्त्र चोरी की लीलाओं का अगर हम श्रव्य पान या दृश्य पान करते हैं तो हम मोक्ष प्राप्ति के अधिकारी होते हैं । सब भगवान का ही तो है और हम भगवान के ही तो हैं, ऐसे में भगवान चोरी क्यों करेंगे  किन्तु द्वापर युग में भगवान आए ही इसलिए थे कि वो मानव लीला करें । माना जाता है कि सतयुग में जब रामावतार हुआ तो उनके मोहक और मुग्धकारी रूप को देखकर जन जन के मन में, हर माँ के मन में और हर नारी के मन में यह अभिलाषा थी कि राम जैसा सखा, राम जैसा पुत्र और राम जैसा पति या प्रेमी मिले । इन सब की अभिलाषा अधूरी रह गई तभी ईश्वर ने सबकी इच्छाओं की पूर्ति हेतु द्वापर युग में जन्म लिया और किसी ना किसी रूप में उनकी इच्छा की पूर्ति की । जिन सबने श्रीराम को पति रूप में चाहा उनकी भी श्रीकृष्ण इच्छापूर्ति करना चाहते थे । पर समस्या ये थी MMS_5133कि उन सबको वो एक ही रूप में मिल नहीं सकते थे और इसके लिए उन्होंने रासलीला रचाई, एक ऐसा क्षण जिसमें एक ही समय में, एक ही रूप में वो सभी गोपियों के साथ थे और गोपयाँ उनके रुप और बाँसुरी की धुन पर इर्दगिर्द सम्मोहित होकर अपनी सुधबुध खोकर उन्हें पाने का रसास्वादन कर रही थीं ।
हालाँकि इस प्रस्तुति में गापियों के साथ के रास की प्रस्तुति नहीं की गई किन्तु कलाकारों के द्वारा खेली गई फूलों की होली ने सभी का मनमोह लिया, सभी मंत्रमुग्ध हो गए थे । हर ओर फूल ही फूल दिख रहे थे और सब उसमें सराबोर थे ।
रासलीला कार्यक्रम में भारतीय राजदूत महामहिम रण्जीत राय की गरिमामयी उपस्थिति थी । दूतावास के अन्य अधिकारी भी मौजुद थे । कार्यक्रम के अन्त में राजदूत महोदय ने कलाकारों को बधाई और शुभकामना दी और उन्हें पुरस्कार एवं सम्मान से सम्मानित किया गया ।  वृन्दावन से आए कलाकारों ने गीत और नृत्य MMS_5364का अद्भुत शमा बाँध दिया था । दूतावास द्वारा कराए जाने वाली ऐसी प्रस्तुतियाँ निःसँदेह दो मित्र देशों का और भी करीब लाती हैं । रासलीला पूरी तरह भारत और विशेष कर वृन्दावन से जुड़ी कला है । बरसाने की लठ्मार होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है । इन सारी संस्कृतियों से हमें ये कलाएँ जोड़ती हैं और एक दूसरे के करीब लाती हैं ।

इस मनोरक अवसर पर भारतीय नागरिक संघ की भी सहभागिता थी। भारतीय सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक श्री आशीष सिन्हा ने स्वामी फतेह कृष्ण शर्मा को सम्मानित किया और वृंदावन से नेपाल आये १६ सदस्यिय रास लीला कलाकारों को बधाई दी। नेपाल रास लीला मंडली की यात्रा को भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर), नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित किया गया था। भारतीय साँस्कृतिक केन्द्र द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम सुन्दर और सराहनीय था ।

 

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