नेताओं की जान खतरे में ः प्रचण्ड से राउत तक

प्रचण्ड

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विनय कुमार,
नेपाल के विभिन्न नेताओं की सुरक्षा चुनौती को लेकर सरकार ने एक पत्र जारी किया है । सरकार ने सुरक्षा चुनौती के पहले नम्बर में एमाओवादी सुप्रिमो प्रचण्ड नेतृत्व के ३० दलीय मोर्चा के आन्दोलन को रखा है । आज सोमवार व्यवस्थापिका संसद के राज्य व्यवस्था समिति की हुई बैठक में उपप्रधान एवं गृहमन्त्री वामदेव गौतम ने लिखित रूप मं १२ बुंदे सुरक्षा चुनौती और समस्या पेश किया है । सुरक्षा चुनौती के कारण प्रस्तुत करते हुए गृहमन्त्री गौतम ने कहा, संविधान जारी करने के सम्बन्ध में राज्य पुनःसंरचना लगायत के कुछ विषयों मे असहमति होने के कारण एमाओबादी नेतृत्व के ३० दलीय मोर्चा के विरोध कार्यक्रम जारी होना है । संविधानसभा से संविधान जारी ना होने देनेवाले समुह के साथ भी सरकार विरुद्ध गठबन्धन किए जाने से सुरक्षा चुनौती बढ़ी है सरकार ने स्पष्ट किया। बैद्य और विप्लव माओवादी, लिम्बुवान के विभिन्न समुह के गतिविधि को भी सरकार सुरक्षा चुनौती मे रखा है । कट्टर हिन्दुवादी और राजावादी के क्रियाकलाप देशभर मे फैलने से सरकार ने कमल थापा, खुमबहादुर खडका, शिव सेना नेपाल को भी सुचिकृत किया है । जेपी गुप्ता नेतृत्व के तराई मधेश राष्ट्रिय अभियान तराई के भूमिगत समुह के साथ सहकार्य का प्रयास करने का संकेत ckraut in bishesh adalatदेखा गया है सरकार ने बताया । मातृका यादव समुह और अखण्ड सुदूरपश्चिम के साथ सेवा केन्द्र खोलना सरकार के निर्णय के पक्ष में और विपक्ष मे बारा, सुनसरी लगायत के जिलों मे हुए गतिविधि सुरक्षा चुनौती के सुची मे है ।

सीके राउत का कानुन अनुसार होगा कारबाही
डा. सीके राउत को विखण्डनकारी करार देते हुए गृहमन्त्री गौतम नें कहा, राउत का गतिविधि तराई मे जोर पकड़ रहा है । संसदीय समिति मे गौतम ने कहा, ‘नेपाल को देश ना मानते हुए घटना को बढावा देगा तो कानुन अनुसार नियन्त्रण करना पड़ेगा ।’ संविधान अपने अनुसार नही होने पर कानुन उल्लंघन होगा तो कानुन के तहत ही नियन्त्रण किया जाएगा गृहमन्त्री गौतम ने उल्लेख किया ।

 

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