नेपालगंज में बाल न्याय प्रणाली को सुदृढीकरण के लिये अन्तरक्रिया कार्यक्रम

नेपालगन्ज, (बाके) पवन जायसवाल, २०७२ माघ १६ गते ।
बाके जिला अदालत नेपालगन्ज के माननीय जिला न्यायाधीश बिष्णु प्रसाद कोईराला ने बालबालिकाओं की मुद्धा में संबेदनसील होन के लियें सरोकारवालें निकायों से एक अन्तरक्रिया कार्यक्रम में आग्रह किया है ।
बाके जिला अदालत और एडभोकेसी फोरम क्षेत्रीय कार्यालय नेपालगंज के आयोजन में बाल न्याय प्रणाली को सुदृढीकरण के लियें सरोकारवालों की भुमिका बिषयक अन्तरक्रिया कार्यक्रम में बोलते हुयें जिला न्यायाधीश बिष्णु प्रसाद कोईराला ने बाल न्याय की मुख्य उदेश्य का मतलब कानून के बिवाद में आये हुये बाल-बालिकाओं को अपराधी के रुप में देखने से पहले उन लोगों की आचरण में सुधार लाकर समाज में पुनःस्थापित कराना है इस लिये उसी अनुसार काम करने के लिये सरोकारवालो को आग्रह किया ।
बाके जिला अदालत बालबालिकाओं के मुद्धा में संबेदनसील है जानकारी देते हुये न्यायाधीश बिष्णु प्रसाद कोईराला ने बालन्याय कार्यबिधि अनुसार अदालत ने बाल बिज्याई में पडे बालकों को अभिभावक के जिम्में में छोडकर अपराध की अनुसन्धान करें, सजाय की स्थगन करें, बालसुधार गृह में पठायें लगायत की कार्य करके बालबालिकाओं को अपराधिक मनस्थिति में सुधार लाने की ओर ध्यान दिया जाय बताया ।

एडभोकेसी फोरम के क्षेत्रीय संयोजक अधिवक्ता बसन्त गौतम ने अपराधिक मनोबृत्ति में लगे हुयें बालबालिकाओं की मनस्थिति में सुधार लाकर उन लोगों को असल नागरिक बनाने की ध्येय बालन्याय ने लिया तो भी इस की उचित कार्यान्वयन ना हो पाने के कारण आरोपी बालक ने सजाय में छूट पाने की सिवाय उल्लेख्य प्रगति हो नही हो पाई है बताया । एडभोकेसी फोरम ने बालन्याय को सुढृढीकरण करने के लिये बिगत १२ बर्ष से कार्य करते आ रही है जानकारी देते हुये एडभोकेसी फोरम के क्षेत्रीय संयोजक अधिवक्ता बसन्त गौतम ने बालन्याय को कार्यान्वयन के सवाल में बात करते हुये बाके जिला में सुधार की अधिक प्रयासें हुई है तो भी अभी और करना बाकी है बताया । एडभोकेसी फोरम ने बिगत एक बर्ष की अवधि में प्रहरी हिरासत में २१ बालकों से भेट किया और जिस में प्राय सभी लोगों को बडे अभियुक्तों के साथ हिरासत में रखा गया है , गिरफ्तार करते समय बालन्याय कार्यबिधि अनुसार सादा पोषाक में, अभिभावकों को जानकारी देकर गिरफ्तार करने का प्रावधान है लेकिन उसका पालन नही किया गया है, कुछ अवस्था में जब अदालत में म्याद थप कराने के लियें लाते है तो बडे अभियुक्त के साथ ही हत्कडी लगाकर लाते है, कुछ लोगों को डरधाक दिखाकर उन की इच्छा विपरित साबित बयान भी कराते है बसन्त गौतम ने जानकारी दिया और कहा एक बर्ष की अवधी में फोरम ने १२ बालबालिकाओं को कानूनी सहायता भी प्रदान किया और समाज में पुनस्थापना कराने में मद्धत भी किया है ।
कार्यक्रम में बोलते हुये बाके जिला अदालत के श्रेस्तेदार दण्डपाणी लामिछाने ने बाँके जिला अदालत में अभी ३ बालबालिकाओं की मुद्धा बिचाराधीन में रहने की जानकारी देते हुये अदालत ने बालन्याय कार्यबिधि अनुसार बालक को संरक्षक के जिम्मे लगाकर मुद्धा की कारवाही आगे बढाई गई है जानकारी दिया । बाके जिला अदालत में बालइजलास की पूर्वाधार के लिये प्रर्याप्त श्रोत न होन के कारण केन्द्र में पहल हो रही है बताया ।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग नेपालगन्ज के क्षेत्रीय निर्देशक मुरारी प्रसाद खरेल ने कहा कोई भी बालबालिकाए कानून के सम्पर्क में आते है उन को अपराधि की नजर से देखते है उस देखने की सोच में परिवर्तन होना चाहिए कहते हैं |

जिला प्रशासन कार्यालय बाके के सहायक प्रमुख जिला अधिकारी गन्ज बहादुर एमसी ने जिला प्रशासन कार्यालय ने बालबालिकाओं के हितों में कार्य कर रही है बताया । बालक को अपराधिक आचरण सुधार करने में सभी सरोकार वालों को इस पर ध्यान देना एकदम जरुरी है उन्हो नें जोड दिया था ।

इसी तरह जिला प्रहरी कार्यालय बाके के प्रहरी निरीक्षक बीर बहादुर थापा ने पिछले समय लागु औषध के नसा में बालबालिकाए फस्ते आ रहें है उनकी अपराधिक क्रियाकलाप में संलग्नता बढती गई है यह चुनौती बढी है बताया । बालबिज्याई करनेवालों को बालन्याय कार्यबिधि अनुसार कारवाही आगे बढाया गया है जानकारी देते हुये प्रहरी निरिक्षक बी बहादुर थापा ने कहा पक्राउ पडे हुये बालबालिकाओं को बालमैत्री वातावरण में सोधपूछ करते हैं, नेल हत्कडी नही लगाते है और बडे अभियुक्तों के साथ में उन लोगों को बन्द नही करते है दावी किया था ।

युनिसेफ के बालसंरक्षण अधिकृत राम प्रसाद गौतम ने प्रहरी, सरकारी वकील अदालत लगायत के सभी निकायों ने बाल-मैत्री बातावरण में कार्य करने के लिये कहते हुये बालवालिकाए से हो जाने वाली कानून की उलंघन को फौजदारी कानून अन्र्तगत रखकर सजाय करने से अपना लोग असल नागरिक के रुप में विकास करने की अवसरों से वे लोगों  वंचित होते है इस के साथ बालकों को मानशपटल में सामाजिक और कानूनी संस्था प्रति नकारात्मक प्रभाव पडती है उन लोगों के भितर अपराधिक मानोवृत्ति की विकास हो जाती है सरोकारवालें निकाय इस तर्फ संबेदनसील होने में जोड दिया ।

महिला बिकास अधिकृत प्रभा श्रेष्ठ ने बालअधिकार संरक्षण में महिला बिकास कार्यालय सभी सरोकारवालें निकाय से हाथ में हाथ मिलाकर आगे बढने के लिये बताया । बाके जिला अदालत के बालमनोबिज्ञ सुदीप कुमार भट्टराई ने श्रोतसाधन के अभाव में बाके जिला की अदालत में बालमैत्री बाल इजलास कक्ष नही है इस के लिये सभी की प्रयास होना जरुरी है बतायी ।

बाके जिला अदालत के माननीय जिला न्यायाधीश बिष्णु प्रसाद कोईराला के अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ कार्यक्रम में बाके जिला बार इकाई बाके के अध्यक्ष उदयराज वर्मा, पुनरावेदन बार इकाई के पूर्व अध्यक्ष सुनील कुमार श्रेष्ठ, सिविन के सिद्धराज पनेरु, जिला बाल कल्याण समिति के सदस्य प्रभात कुमारी ठकुरी, सेभ द चिल्डे«न के नेपालगंज प्रमुख बीरेन्द्र ठगुन्ना लगायत के वक्ताओं ने बालन्याय बालबालिकाओं को कानून की सम्पर्क में आये हुये बालबालिकाओं को अपराधि रुप में न देखकर बालमैत्री वातावरण में अपराध को अनुसन्धान करके उन लोगों की आचरण में सुधार लाकर असल नागरिक बनाने की ओर सरोकारवालों की ध्यान जाये बताया ।

बाल न्याय ने लिया पक्ष्य पूरा करने के लिये बालन्याय प्रशासन से सम्बन्धित घर परिवार, बिद्यालय नागरिक समाज, बालकल्याण गृह एवं बाल सुधार गृह के अधिकारवाले, सञ्चार जगत, प्रहरी, सरकारी वकील कार्यालय कानून व्यवसायी, अदालत लगायत के सरोकारवालों सम्वेदनशील होने के लिये उपस्थित सरोकारवालों ने जोड दिया है । इसी तरह कानून से विवाद में पडे बालकाओं को समाज ने देखने वाली नराकारात्मक दृष्टिकोण को परिवर्तन करने में कार्यक्रम के सहभागियों ने जोड दिया ।

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