नेपालगन्ज में गुल्जारे अदब व्दारा गजल गोष्ठी

Guljare adab Push 27नेपालगन्ज÷(बाके ) पवन जायसवाल, माघ १ गते ।
बाके जिला के नेपालगन्ज में रहा गुल्जारे अदब नें पुष २७ गते शनिवार को आयोजन किया मासिक गजल गोष्ठी स्थानीय महेंन्द्र पुस्तकालय मेें हुआ ।
मासिक गोष्ठी  अवधी सा“स्कृतिक विकास परिषद बा“के जिला के अध्यक्ष तथा वरिष्ठ अवधी साहित्यकार सच्चिदानन्द चौवे के अध्यक्षता में पत्रकार, उर्दू, और अवधी साहित्यकार, लेखककारों की सहभाागिता में मासिक गजल गोष्ठी सम्पन्न हुई ।
गोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार पन्नालाल गुप्त, जमील अहमद हाशमी, हाजी अञ्जुम, मोहम्मद यूसुफ आरफी, मौलाना नूर आलम मेकरानी, अदब के अध्यक्ष हाजी अब्दुल लतीफ शौक, सचिव मोहम्मद मुस्तफा अहसन कुरैशी, बिजय कुमार चौवे लगायत लोगों ने “खूब से खूबसूरत है निजाम आपकीे”  इसी मिसरा (तरही) में सभी साहित्यकारों अपनी– अपनी गजल और शैर वाचन किया था ।
गुल्जारे अदब ने हरेक महीने के अन्तिम शनिवार के दिन मासिक गजल गोष्ठी की आयोजन स्थानीय महेन्द्र पुस्तकालय नेपालगन्ज में करते आ रही है  अदब के सचिव मोहम्मद मुस्तफा अहसन कुरैसी ने बताया ।
इसी तरह गजल गोष्ठी में–
सवसे ऊ“चा जहा“ में मुकाम आपका
खूव से खूवसूरत है निजाम आपका
तुमने प्राणी को जीने के साधन दिए
होगा कितना बडा ताम– झाम आपका
जहा“ मिलता है सवको शकू“ शान्ति सुख
ऐसा पावन है सुन्दर सु– धाम आपका
तुमने अग्नी– मही– जल–हवा– नभ रचे
ऐसे कारीगरी को सलाम आपका
मरना– जीना यहा“ चलता रहता सदा
इसमें लगता कभी ना विरामम आपका
वक्त टलता नही एक छिन के लियें
जब भी आता यहा“ पे पयाम आपका
रहने, खाने, पहिनने को सवको मिले
कितना बेहतर जहा“ में कयाम आपका
सवकी पूरी मुरादें ‘आनन्द’ हो
आया नव वर्ष में ए पैगाम आपका ।
अवधी सा“स्कृतिक विकास परिषद बा“के जिला के अध्यक्ष तथा वरिष्ठ अवधी साहित्यकार सच्चिदानन्द चौवे ने गजल वाचन किया था ।

नेपालगन्ज– १५ के जमील अहमद हाशमी ने शैर वाचन किया ।
अगर ये चाहिये नेता कोई महान बने
तो शर्त ये है कि पहले वो गिरगीटान बने
मेरी ही शान बने और आन बान बने
कही से नोट मिले और मेरा मकान बने ।।

(२)  लोग तरसा किये बाक पन के लिए
मैने देदी जवानी वतन के लिए
या खुदा वक्त एैसा भी आए कभी
खुद को कुरबान करद“ू वतन के लिए
देश की मिट्टी मिट्टी हो मेरा कफन
मैं तरसा हू“ खाके वतन के लिए
जो भी आए हैं महेफिल में तेरे नसीम
जो भी आया तेरी अन्जुमन के लिए ।
मो. नसीम कादरी– नेपालगन्ज – ८ बा“के
(३) मजहबो कौम और ईसलाम की पहचान बने ।
ये मेरा मुल्क है नेपाल मेरी जान बने ।।
बडी हैं साजिशें इस मुल्क को मिटाने की ।
खुदा करे कि इलेकशन हो संविधान बने ।।
बहुत ही खुश हैं जो लौटे हैं जंग हार आये ।
खडे है कौम में खुद को बडे बलवान बने ।।
लुटाते फिंरते है नेता रकम डढल्ले से ।
ख्याल उन का है संसद भवन दुकान बने ।।
बना है मुल्क का गुलशन जो छत्तीस जातो से ।
खुदारा आलमे हसती का यह गुलदान बने ।।
ये मेरा मुल्क है सैय्यद अजीम जां से अजीज ।
मेरे खुदा यही हर कौम का ईमान बने ।।
सैय्यद अशफाक रसूल हाशमी– नेपालगन्ज –५ बा“के

(४) सभी कूबुल करैं इस तरह विधान बने
खुदा करे कि इलेकशन हो संबिधान बने
हर एक सम्त मोहब्बत के फूल खिलते हों
मेरा वतन य“ू मोहब्बत का गुलिस्ता“ बने
तमाम आलमे इन्सानियत यह हा जाए
तो इस तरह से मोहब्बत का आस्मान बने
पनप सके गी कहा“ नफरतैं दिलों में जब
हर एक शख्स जो एक दूसरे की जान बने
एह उ“च नींच की तफ्रीक आरफी हो खत्म
यहा“ पे जो हैं सभी लोग एक समान बने ।।
यूसुफ आरफी कुरैशी –धम्बोझी– १ नेपालगन्ज, बा“के

(५) खुदा करे कि एलेकशन हो संबिधान बने
राष्ट्र नेपाल मेरा जग में फिर महान बने
चमन के फूलों से हर धर्म की महके कयारी
ऐसा यशवान बगीचे का बागवान बने
अपना मत दीजिए ऐसे सुगोग्य नेता को
जिसके व्योहार से ही उसकी पहचान बने
बचके रहना सदा जाहिल– करेबी नेतों से
भूमि नेपाल की फिर से नहीं रमशान बने
अन्न आयात न होवे विदेशी देशों से
आत्म निर्भर हमारे देश का किसा बने
ऐसा पावन– पवित्र देश का माहौल लगे
माह हर एक सारे साल का रमजान बने
होवे इस देश में ‘आनन्द’ औ धन की वर्षा
देशवासी सभी धनवान औ बलवान बने
लीजिए कामना शुभ ईद– दिपावली– छठ को
देश की जनता ए गुणवान अब विद्वान बने
सच्चिदानन्द चौवे– अध्यक्ष अवधी सा“स्कृतिक विकास परिषद
(६) कुछ इस तरह से जमाने के साथ साथ चलो
जहा“ मे कोई तुम्हारा भी हम जुबान बने
हाजी अन्जुम– नेपालगन्ज – १५, बा“के

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