नेपालगन्ज में गुल्जारे अदब की मासिक गजल गोष्ठी सम्पन्न

नेपालगन्ज, (बाके) पवन जायसवाल, अगहन २६ गते ।
बाके जिला के नेपालगन्ज बाजार त्रिभुवनचौक से पूर्वलाइन स्थित महेन्द्र पुस्तकालय में अगहन २६ गते शनिवार को गुल्जारे अदब की मासिक गजल गोष्ठी सम्पन्न हुआ है ।
मासिक गजल गोष्ठी अवधी सा“स्कृतिक विकास परिषद् के अध्यक्ष सच्चिदानन्द चौबे के प्रमुख आतिथ्यि में नेपालगन्ज के उर्दू साहित्यकार मौलाना नूर आलम मेकरानी के अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ है ।
guljare photoगजल गोष्ठी कार्यक्रम में नेपालगन्ज के उर्दू साहित्यकार और नेपाली साहित्यकार, अवधी साहित्यकारों की सहभागिता में सम्पन्न कार्यक्रम में गुल्जारे अदब के अध्यक्ष अब्दुल लतीफ श्ँौक, सचिव मोहम्मद मुस्तफा अहसन कुरेशी, मोहम्मद यूसुफ आरफी, सैयद् असफक रसूल हाशमी, मौलाना नूर आलम मेकरानी, जमील अहमद हाशमी, मेराज अहमद ‘हिमाल’, अवधी सा“स्कृतिक प्रतिष्ठान के अध्यक्ष बिष्णुलाल कुमाल, चित्रकार तथा मूर्तिकार आशाराम मौर्य, श्यामा नन्द सिंह ‘वर्तमान’, वरिष्ठ साहित्यकार खगेन्द्र गिरि कोपिला, लगायत लोगों ने शैर वाचन कियें थे ।
कार्यक्रम में पत्रकार आशीष गुप्ता, बर्दियाली स्रष्टा समाज के अध्यक्ष इन्द्रराज पोख्रल, नेपाल पत्रकार महासंघ बा“के शाखा के पूर्व अध्यक्ष हेमन्त कर्माचार्य, नीरज गौतम लोगों की सहभागिता रही थी, बि.सं. २०३३ साल श्रावण १ गते स्थापना हुआ गुल्जारे अदब ने हरेक महीने के अन्तिम शनिवार को करते आया है कार्यक्रम में कलाकार, चित्रकार, साहित्यकार, पत्रकार लगायत लोगों की सहभागिता रही थी मासिक गजल गोष्ठीे अदब के सचिव मोहम्मद मुस्तफा अहसन कुरेशी ने बताया है ।
उर्दू साहित्यकार मौलाना नूर आलम मेकरानी सेक्सन आफीसर (रिटार्ड) बा“के जिला अदालत नेपालगन्ज की गजल
ऐ यार लेचलो मुझे कोसों यहा“ दूर ।
दिल चाहता है घर कोई दोनों जहा“ से दूर ।।
मै प्यार का दीवाना हू“ छेडो नही मुझे ।
हद से गुजर चुका हु“ मै कौनो मका“ से दूर ।।
कोई भी मेरे प्यार की राहों मे न आये ।
ऐ काश मै हो जाता कहीं ईस जमा“ से दूर ।।
गुलशन की रौनकें हैं अब पुरे शबाव पर ।
येह क्यों न हो आखिरहै वोह वादे खेजा“ से दूर ।।
कोयल की कु बुलबुल की चहक सुन रहे हैं जो ।
येह आरही सदा है किसी गुलसीता“ से दूर ।।
रखेगा याद आलम तुझे कौन बज्मे तरव मे ।
खुद को तु कर लिया है जो बज्मे जहा“ से दूर ।।

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