नेपालगन्ज में भुर्की पूजन

2नेपालगन्ज,(बाँके) पवन जायसवाल, कार्तिक १५ गते ।
यहाँ के मदेशी समुदाय में यम द्वितिय अर्थात् भैया दुईज के दिन में भुर्की पूजन किया जाता है । इस अवसर पर  दिपावली के अन्तिम दिन अपने-अपने  बडे और छोटे भाई को टीका लगाकर चूरा, भुर्की और मिठाई खिलाये जाते है ।
घर के आंगन में गाई का गोबर से लीपपोत करके भाई का चित्र , नदी तलाब, पर्बत, बाघ, भालु, सर्प तथा बन जगंल का चित्र बनाया जाता है । इसके साथ ही बन जंगल में मिलने वाला कुश लगायत बिभिन्न काटे रखकर उस के उपर सिलौटा रखकर  पूजा करने का  चलन है । मधेशी समुदाय की महिला उस सिलौटा पर चामल का आँटा से नदी नाला बनाकर उसी में धर्म भाई का मुर्ती बनाकर पूजा किया करती है ।
गाँव टोला पडोसी के सम्पुर्ण महिलाए एक्त्रित होकर सामुहिक रुप में भुर्की पूजन करने की परम्परा यहाँ रहा है । उसी क्रम में भाई बहन के सुख, समृद्धि और शान्ति के लियें  बिभिन्न प्रकार की कथा, कहानी भी सुनाने का चलन है । भुर्की पूजन के क्रम में 4दिदी-बहनो व्दारा अपने—अपने दादा और भाई की सुख, शान्ति, उन्नति, सु–स्वाथ्य, प्रगति लगायत की कामनाए किया करती है । भुर्की पूजन किया गया चूरा भुर्की दूर-दूर रहे दिदी बहने लोग अपने अपने दादा और  भाई को कार्तिक पुर्णिमा तक भी खिलाने की प्रचलन है ।

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