नेपाली मीडिया का समाचार सम्प्रेषण, मधेशीले पैसा पाए जे पनि बेच्न सक्छ ???

कैलाश महतो , परासी, 22  नोभेम्बर |

 कुछ दिन पहले एक नेपाली मीडिया ने समाचार सम्प्रेषण किया था, ” मधेशीले पैसा पाए जे पनि बेच्न सक्छ ।” सुनने मे आपत्ति जनक बात लगने के बावजुद भी उस मीडिया ने अपनी एक छोटी सी भूल से बहुत बडा सत्य को उजागर किया है । हकिकत ही है कि मधेशी पैसे कमाने के लिए बहुत कुछ करते है, पसिने निकालते है और पैसे कमाते भी है । लेकिन उनके सारे के सारे पैसे शराब और शबाब मे मे उड जाते है । और नेपाली मीडिया को पता होना चाहिए कि किसी मधेशी की बेटी या बहन कोई शराब की भट्ठी, दुकान, होटल या रेस्टुरा नही चलाती है न कोई मसाज पार्लर या शबाब घर चलाती है । मधेशीयो ने अपनी बहु बेटी या भान्जी भातीजीयो को दिल्ली और मुम्बई की वेश्यालयो मे नही बेचते है । मधेश की कोई बहु, बेटी या कोई मधेशी लडकी पैसे कमाने के लिए मलेसिया, कतार, दुबैइ या सौदी अरेबिया मे नही जाती है । मधेशी पैसे कमाने के लिए अपने कन्धे के छाले उधेर लेते है, हड्डी पसली निकाल लेते है, मगर अपने बहु, बेटी या पत्नीयो को अनाब सनाब कामो के लिए घर से बाहर कदम न रखने देते है न मधेश कोई महिला वैसा करने को सोचती भी है ।

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मधेश के पुरूष पैसे के लिए चोरी कर ले, डकैती कर ले, झूठ बोल ले, बेइमानी कर ले, ठगी कर ले, फरेबी कर ले, चाकरी या चापलुसी कर ले, या फिर किसी के लात के शिकार ही भूलबस क्यू न हो जाए, मगर अपने घर के इज्जत की सौदाबाजी कभी नही करते है । मधेशी अपना शान शौकत और इज्जत के लिए अपना सम्पती को बेच डालता है, खेत खलिहानो को छोड सकता है और जरूरत पडा तो अपने आप को भी बेच सकता है । मगर अपने मा बहन तथा बहु बेटियो की लाज बचा ही लेता है । मधेशी अपना मेहनत सस्ते मे भी बेचने को बाध्य है, मधेशी अपना नियत बेचने को मजबूर है । मधेश के मजदुर अपना श्रम बेचता है । यहाँ के व्यापारी नियतखोर हो सकते है, बुद्धीजिबी चाकरी कर सकते है, जमिन्दार चाप्लुसी कर सकते है और नेता दलाली कर सकते है, मगर अपने महिलाओ के इज्जत का सौदाबाजी नही करते ।

नेपाली उस मीडिया ने मधेश को गाली देने तथा अपनी गुस्सा उतारने की जो कोशीश की है, वो सर्वथा गलत है । मधेश आन्दोलन के कारण मधेश मे हुए नाकाबन्दी के प्रभाव से उत्पन्न दैनिक समस्या से चिढकर मधेशियो के प्रती भद्दे शब्दो का प्रयोग किया जाना बेहद शर्म बाली बात है जिसे मधेश और मधेशी कोई भी स्विकार नही कर सकता । कुछ मधेशी चेहरे के लोग वास्तव मे नाकाबन्दी के बाबजुद पेट्रोलियम पद्दार्थ की ढुवानी कर नेपालियो को पहुचाते है जो सब मधेशी जानते है । वो उनकी कमजोरी या मजबूरी होगी । मगर वे मधेश आन्दोलन से घात करने बाले मधेशी भी अपने बहु बेटियो को बेचना नही जानते है । और उन मीडिया बालो को यह भी पता होना जरूरी है कि नेपाली दलो मे समेत रहे मधेशी नेताओ के चरीत्र और सन्स्कारो से भी स्पष्ट होता है कि अपने ग्जर परिवार के सुख समृद्धी के लिए भले ही नेपाली नेताओ का वे चाकडी चापलुसी क्यू न करते हो, पर न वे अपने परिवार के साथ कोई घिनौना खेल खेलता है और न उनके परिवार की कोई महिला वो साहस करती है । क्यूकी मधेश का सन्स्कार और परम्परा इज्जतो से भरा पडा है । मधेश के लोग तो गुजारा करने के लिए तेल वेचा करते है । नेपाली राज्यो के द्वारा मधेश के सारे चीजो को कब्जा करने के कारण वे अपने रोजी रोटी की व्यवस्था करने हेतु अपने आन्दोलन से भले ही गद्दारी करते हो तो वे तो सिर्फ तेल बेचते है । लेकिन यहाँ तो ऐसे भी समुदाय के लोग है जिनके पास सारा स्रोत होने के बावजुद भी अपनी बेटी और बहन को ही दिनहु बेचते है । मधेश की परम्परा, सन्स्कृती, रीतिरिवाज और दर्शन इतना मजबूत है कि मधेश अपने आप को मिटाकर भी अपने स्वाभिमान को बेचना पसन्द नही करती है । और यही कारण है कि नेपाली उपनिवेश के कारण मधेश और मधेशियो पर हो रहे विभेद तथा अत्याचारो से निपटने तथा अपने गरिमा को बचाने हेतु मधेश अब आजादी की राह पर चल पडा है जो सशक्त रूप से आगे बढ रहा है और नेपाली राज्य हैरान परेशान दिख रही है । मधेश के दाने पानी खाने बाले नेपाली शासक तथा उसके पृष्ठपोशक नेपाली मीडिया अपने गिरेबान मे एकबार गौर से झान्क कर देखे, उनकी इज्जत की सही प्रमाण मिल जाएगी । महात्मा गान्धी जब एक बार बृटेन के किसी अन्तर राष्टृय सम्मेलन मे अपने धर्मपत्नी कस्तूर्बा गान्धी के साथ भाग लेने गए थे । अनाउन्सर ने मन्च पर आने के लिए आमन्त्रण करते हुए बोला, ” अब भारत से अपनी माता जी के साथ हमारे इस मन्च पर बिराजमान भारत के महान अहिन्सावादी नेता तथा आत्मा महात्मा गान्धी अपने सारगर्भीत विचारो को प्रस्तुत करने आ रहे है । ” जबाव मे मन्च से गान्धी ने सम्बोधन किया, ” हमारे अनाउन्सर मित्र ने एक छोटी सी गल्ती से एक बहुत बडे सत्य को खोला है । और वो सत्य यह है कि मेरे साथ मेरे बगल मे बैठी महिला सन्सारिक रिस्ते मे मेरी पत्नी है, लेकिन अब वो मेरी माता बन गयी है । क्यूकी मेरे इस उम्र मे वो मुझे एक माता जैसा ही प्यार देती है, देखभाल और सुरक्षा तक प्रदान करती है । ” ठीक उसी प्रकार से नेपाली मीडिया तथा नेपालीयो के कुछ जमात भी वही छोटी सी भूल से एक विशाल सत्य को पर्दाफाश की है ।

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