नेपाली साहित्यकार लखनउ मे सम्मानित ।

पवन जायसवाल, नेपालगन्ज । अखिल भारतीय मंचीय कवि पीठ, उत्तर प्रदेश लखनऊ हिन्दी कविता की वाचिक परम्परा की ध्वजवाहक संस्था बिश्व हिन्दी सेवा संस्थान द्धारा नेपाल के वारिष्ठ साहित्यकारों को एक समारोह में सम्मानित किया गया ।
प्रमुख अतिथि लोक निर्माण एवं सिंचाई मन्त्री शिवपाल सिंह यादव ने कवियों को पुरस्कार में स्मारिका, शाल, स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र प्रदान कियथे । कार्यक्रम में देश विदेश के ४८ साहित्यकारों को प्रमुख अतिथि लोक निर्माण एवं सिंचाई मन्त्री शिवपाल सिंह यादव ने सम्मान कियाथा ।
समारोह में प्रज्ञा प्रतिष्ठान, काठमाण्डौं के सदस्य सचिव सनत कुमार रेग्मी, काठमाण्डौं के वरिष्ठ साहित्यकार डा. गंगा प्रसाद अकेला, काठमाण्डौं  अवधी साहित्यकार बिक्रममणी त्रिपाठी, नेपालगन्ज के लोक नाथ वर्मा, अवधी संस्कृतिक प्रतिष्ठान केन्द्रीय समिति के अध्यक्ष एवं अवधी साहित्यकार बिष्णु लाल कुमाल, अवधी सांँस्कृतिक विकास परिषद बाँके के अध्यक्ष एवं हिन्दी तथा अवधी के वरिष्ठ साहित्यकार सच्चिदानन्द चौबे,लगायत नेपाल से गये लोगों को विश्व स्तर पर की गयी हिन्दी सेवाओं तथा कविता की वाचिक परम्परा को श्री सम्पन्न करने के महत्वपूर्ण कार्यो से अभिभूत अखिल भारतीय मंचीय कवि पीठ  , उत्तर प्रदेश गीत ऋषि पद्मभूषण    डा. गोपाल दास नीरज को समर्पित अन्तराष्ट्रीय हिन्दी कविता समारोह में बिश्व हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया ।
नीरज नें दोहा आत्मा के सौन्दर्य का, शब्द रुप है काव्य ।
मानव होना भाग्य है, कवि होना सौभाग्य है ।
मुक्तक लेखनी अश्र की स्याही में डुबकर लिखो, दर्द की प्यार सें सिराहने बिखाकर लिखो,
जिन्दगी कलमों किताबों में नही मिलती, धूप में जाओ पसीने में नहाकर लिखो ।
अखिल भारतीय मंचीय कवि पीठ उ.प्र. गीत ऋषि के संरक्षक पद्मभूषण डा. गोपाल दास नीरज, महासचिव कमलेश द्धिवेदी, संस्थान के अध्यक्ष एवं संयाुेजक डा. नरेश कात्यायन के द्धारा हस्ताक्षरित सम्मान पत्र दिया गया है ।
समारोह में अवधी सांस्कृतिक बिकास परिषद बाँके जिला के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ हिन्दी के साहित्यकार सच्चिदानन्द चौबे ने वाणी बन्दना पढकर और नेपाल भारतका मधुर सम्बन्धका कविता के द्धारा कार्यक्रमका शुभारम्भ किया था । इसी तरह प्रज्ञा प्रतिष्ठान काठमाण्डौं के सदस्य सचिव सनत कुमार रेग्मी ने भी अपना विचार ब्यक्त्त किया था ।
भारत उ. प्र. लखनऊ में २९ दिसम्बर २०१२ को सम्पन्न कार्यक्रम में नेपाल, न्यूयोर्क अमेरिका, कनाडा, ओसाका जापान, नेपाल, लगायत राष्ट्र का सहभागिता रहा । भारत के लखनऊ, इलहाबाद, हल्द्धानी(उत्तराखण्ड), मुरादाबाद, रायबरेली, बहराइच, लगायत स्थानों से सहचागिता रहा । नेपाल बाँके जिले के नेपालगन्ज– १४ निवासी सच्चिदानन्द चौबे कई जगाह से भी  सम्मानि हो चुके है ।

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