नेपाल और भारत के बिच विशेष-सम्बन्ध को संविधान मे उल्लेख करने की मांग

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विनय कुमार । जुलाई १०, शुक्रवार ।
संविधान मे संघीयता और नागरिकता के लिए सड़क संघर्ष मे जाने के लिए बाध्य होना पडा, वक्ताओं ने एक कार्यक्रम में यह निष्कर्ष निकाला है । आज शुक्रबार को राजधानी में आयोजित ‘प्रस्तावित मस्यौदामा नागरिकताको सवाल’ विषयक अन्तरक्रिया कार्यक्रम में यह निष्कर्ष निकाला गया है । बानेश्वर स्थित मसाला कटेज मे सम्पन्न हुई अन्तरक्रिया कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि तथा सद्भावना के सहअध्यक्ष लक्ष्मणलाल कर्ण ने ऐसा कहा कि यह मस्यौदा कम्प्युटर ने बनाई है कोइ विज्ञ ने नहीं । नागरिकता के विषयों को संविधान में और भि जटिल बनाया गया है बोलते हुए सहअध्यक्ष कर्ण ने नागरिकता प्राप्त करने वाले नागरिकों ने पद न पाने की व्यवस्था को यह कैसा अधिकार है प्रश्न की ? उन्होने आगे कहा, मधेसी ‘सेकेन्ड क्लास’ के दर्जा में है हि अब फिर ‘थर्ड क्लास’ के नागरिक भी बन रहा है जो इस देश मे आएगा, नागरिकता प्राप्त करेगा लेकिन ना तो प्रधानमन्त्री बन पाऐगा ना तो उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति । अधिकार ही नहीं है तो नागरिकता क्यों, किस चिज के लिए नागरिकता ? नागरिकता प्राप्त करने वाले व्यक्ति इस देश में अधिकार से बञ्चित होता है तो नागरिकता क्यों भात खाने के लिए ? अधिकार पाने के लिए सभी मधेसी को सडक पर आने के लिए उन्होने जोरदार अपिल की । वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेन्द्र महतो ने ‘पशु और मानव मे यह फरक होता है कि पशु मे अधिकार नहीं होता है, मानव मे अधिकार होता है । अधिकार

बिहिन मानव को कल्पना करना पशु सम्मान होगा ।’ उन्होने तकरिवन ३० मिनेट के समय तक प्रस्तावित मस्यौदा मे नागरिकता के विषय उपर प्रकास ड़ाला था । अधिकार के लिए सड़कों पर उतरना ही अन्तिम बिकल्प है उन्होने ऐसा कहा था । इसी तरह अधिवक्ता रिता साह ने ऐसा कहा कि अपनी अधिकारों के लिए मानवअधिकार कर्मि, नागरिक समाज, समाजिक संघ–संस्था, विद्यार्थी, महिला सभी को सड़क पर जाना परेगा, समय बहुत कम है ।


k22सरकार विभेद पर विभेद कर रहा है, अब सहा नहीं जा सकता है उन्होने आक्रोस व्यक्त किया । इसी तरह संघीय समाजवादी फोरम नेतृ रेणु यादव ने कहा कि २५ हजार मधेसियों को सिंहदरबार के आगे रख दें तो सत्तापक्षों की हालत बिगर जाएगी । सभी अधिकारों के लिए काठमाडौं मे अपनी उपस्थिती को बढाना परेगा नेतृ यादव ने टिप्पणी की । तमलोपा के केन्द्रिय सदस्य तथा नेतृ पुष्पा ठाकुर ने कडा शब्दों मे नागरिकता के विषय राजनीतिक अधिकार को ही नहीं बलकी सांस्कृतिक अधिकार को खण्डित कर रहा है कहा । इसी तरह हिमालिनी के महाप्रबन्धक कबिता दास ने एसा कहा कि ‘सरकार की और से हमे तर्क दिया जा रहा है कि नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान विदेशों मे भी इसी तरह का है । विदेशों के साथ नेपाल का सम्बन्ध क्या भारत की जैसा ही है ? भारत और नेपाल के बिच बेटी रोटी का सम्बन्ध परापूर्व काल से हि एक विशेष प्रकार का रहा है । मधेश के हर घरों मे भारत की बेटी ब्याही कर के लाई जाती है । इस सन्दर्भ में भारत से ब्याही हुई बेटीयों को इस आधार पर बराबरी का दर्जा मिल सकता है ? प्रस्तावित मस्यौदा में नागरिकता के विषय में उठे सवाल की आधार पर किसी भि भारतीय पिता को अपनी बेटी देने पर कठिनाई अनुभव होगी । अतः क्यो न दोनो देश के बिच मे होनेवाले वैवाहिक सम्बन्ध पर रोक लगा दी जाए । नहीं तो नेपाल और भारत के सम्बन्ध को विशेष सम्बन्ध का दर्जा संविधान मे देने का प्रावधान किया जाए । इसी तरह तमलोपा नेतृ चन्दा चौधरी ने कहा, गर्भवति महिला यह नहीं जानता है की बच्चा कब और किधर हो जाए, इन्डिया मे हो जाए कि अमेरिका में । बच्चा का जन्म अगर अमेरिका मे हो गया तो क्या वो अमेरिकन ? संविधान में ऐसी व्यवस्था उपर नेतृ चौधरी ने कड़ी आपति जताई । कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार अनिल कुमार एलन, नागरिक समाज के अगुवा जैनि निशान ने अपनी मनतब्य रखा था । कार्यक्रम मे स्वागत मनतब्य लक्ष्मी कर्ण ने कि थि तो विषय प्रवेश विवेकान्द मिश्र ने किया था । कार्यक्रम मधेसी पत्रकार संघ उपत्यका समिति द्वारा आयोजित किया गया था |

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