नेपाल का संसार, बीरगंज भंसार : मुरली मनोहर तिवारी

उपभोक्ताओं की सुविधा हेतु, बीरगंज भन्सार कार्यालय ने अनलाइन सेवा शुरु कर दिया है । अनलाइन डिजिटल प्रणाली द्वारा सामानों का जांचपास किया जा रहा है ।


Birgunj Vansar for Murli manohar articileमुरली मनोहर तिवारी, २६ फरवरी |
नेपाल में सबसे ज्यादा माल सामान बीरगंज नाका से आता है । नेपाल में आयात का ५० प्रतिशत सामान बीरगंज से आता है । बीरगंज नाका से सवारी साधन तथा पेट्रोलियम पदार्थ, फैक्ट्री का कच्चा सामान ज्यादा आयात होता है । अन्य देश से कोलकाता बन्दरगाह होते हुए सामान बीरगंज भंसार से नेपाल आता है । व्यापार तथा निकासी प्रवर्धन केन्द्र (टीइपीसी) के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में कुल आयात का ४१ प्रतिशत बीरगंज से ही आया था । बीरगञ्ज भन्सार नाका नेपाल का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण नाका है । सिर्फ आयात ही नही, निर्यात के लिए भी बीरगंज नाका महत्वपूर्ण रहा है । टीइपीसी के अनुसार पिछले वर्ष कुल निर्यात में एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा बीरगंज से ही निर्यात हुआ है ।
२००७ साल के बाद से मधेश में बाजार अड्डा का काम और बन्दोबस्त शुरू हुआ । उसके बाद अर्थ मन्त्रालय अन्तर्गत के ‘अर्थ आय विभाग’ से काम शुरु हुआ । वि.सं. २०१३ साल कार्तिक में तराई के सभी बाजारों के अड्डा को भन्सार कार्यालय में परिणत करने के क्रम में बीरगन्ज बाजार अड्डा, बीरगन्ज भन्सार कार्यालय में परिणत हुआ । पर्सा जिल्ला के बीरगन्ज उपमहानगरपालिका – १९ इनर्वा में अवस्थित इस भन्सार कार्यालय ने वि.सं. २०१९ साल में भन्सार ऐन जारी होने के बाद से ही आधुनिक भन्सार कार्यालय के रूप में अपना उत्कृष्ट कार्य करता आ रहा है । इस भन्सार कार्यालय के अन्तर्गत मटिअर्वा, सिर्सिया, पिपरपाती, सिम्रौनगढ, भिस्वा अमृतधारा (ठोरी), अवही, कचर्वा, अलौ, गाढपर्सौनी और जानकी टोला सहित ११ छोटे भन्सार कार्यालय हैं ।

नेपाल का निर्यात एक खर्ब पहुंचाने में मुश्किल है, और आयात ६ खर्ब से ज्यादा है । इस कारण नेपाल और गरीब होते जा रहा है । अगर निर्यात बढ़ाना कठिन है, तो स्वदेशी उत्पादन करके आयात कम किया सकता है । नेपाल एक खर्ब से ज्यादा तो पेट्रोलियम पदार्थ आयात करता है ।
सेवन्त पोखरेल, भन्सार प्रमुख अधिकृत

सेवन्त पोखरेल, भन्सार प्रमुख अधिकृत

मालवस्तु आयात तथा राजस्व की दृष्टि से अन्य भन्सार की तुलना में भन्सार राजस्व के करीब ५४ प्रतिशत राजस्व उठता आया है । इस वीरगन्ज भन्सार कार्यालय के पुराने को १० वर्ष के राजस्व असुली की अवस्था निम्नानुसार है ।
बीरगंज भन्सार कार्यालय से मुख्य रूप में सवारी साधन तथा स्पेयर पाटपुर्जा, पेट्रोलियम पदार्थ, पत्थर कोइला, लोहे के छड डण्डी, पाइप, सिमेन्ट क्लिङ्कर, तैयारी कपड़ा, हल्का पेय पदार्थ का कन्सन्ट्रेड, औद्योगिक मेशिनरी तथा कच्चापदार्थ, आयात होता है । फिड सप्लीमेन्ट, स्पोर्ट सुज (सेन्थेटीक सूज), जुस जाम, आल्मुनियम डण्डी, जमोठ कपडा, सि.आर.सिट, हाथ का झोला, टोपी तथा ताम्बे के सामान निर्यात होता है ।
भन्सार विभाग के महानिर्देशक शिशिरकुमार ढुंगाना के अनुसार, “नेपाल सरकार को भन्सार से मिलने वाले कुल राजस्व का ५० प्रतिशत राशि बीरगंज से आता है । इस वर्ष सरकार को देशभर से २०५ अर्ब ७६ करोड़ भन्सार उठाने का लक्ष्य दिया था, जिसमे बीरगंज भन्सार से १०३ अर्ब ७७ करोड़ उठाने का लक्ष्य है । “बीरगंज भंसार से कुल भन्सार में करीब ३० प्रतिशत सवारी साधन से और २७ प्रतिशत पेट्रोलियम पदार्थ का योगदान रहता है । पिछले वित्त वर्ष में संकलित एक खर्ब ७६ अर्ब ११ करोड रूपये कुल राजश्व में बीरगंज से ही ८९ अर्ब ९६ करोड़ रूपये हुआ था, जो की लम्बी नाकाबंदी के बावजूद लगभग ५० प्रतिशत रहा ।
नेपाल के भन्सार प्रशासन ने विभिन्न भन्सार कार्यालय में भन्सार शुल्क, मूल्य अभिबृद्धि कर, अन्तःशुल्क तथा अन्य कर वसूल होता है । इस से कुल राजस्व का ४४ प्रतिशत तथा कर राजस्व का ५० प्रतिशत प्रतिनिधित्व होता है । हालांकि पर्सा और बारा के भारत में नोटबंदी के कारण बीरगंज बाजार ठंडा पड़ा रहा । लगातार शादियों के मुहूर्त होने के बाद भी कई दुकानों पर ग्राहक नहीं पहुंचे । नगर का व्यापार आधे से भी कम हो गया । ब्यापारी दुकान के मेंटेनेंस का खर्च भी न निकल पाने से परेशान हैं । दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारियों को वेतन निकालने में भी परेशानी रही है ।
पर्सा और बारा के बाजार में भी भारतीय नोटबंदी के बाद से मंदी जैसा नजारा दिख रहा है । दुकानदारों के अनुसार व्यापार आधे से भी कम रह गया है । लोग केवल जरूरत की वस्तुओं की खरीददारी कर रहे है । वहीं नोट सीमित मात्रा में मिलने से उधारी का ग्राफ भी बढ़ गया है । इधर किराना, दवाई, स्टेश्नरी, जनरल स्टोर पर नोटबंदी का असर नहीं है । लोगों ने जरूरत की चीजों की खरीददारी तो की, लेकिन बाकी चीजों की खरीददारी नहीं के बराबर हो गई । कई दुकानें दिन भर खाली पड़ी रहती हैं । मंदी का सबसे ज्यादा असर मोबाइल, ऑटो मोबाइल, फर्नीचर, इलेक्ट्रानिक्स, कपड़ा, आभूषण और साज–सज्जा की दुकानों पर देखने को मिला ।
किसान के उपज की कीमत खाते में आने में अन्य दिन से ज्यादा लग रहे हैं । ऐसे में किसानों के पास रूपए नहीं होने से अन्य बाजार का कारोबार प्रभावित है । धन की तंगी से दलहनों की थोक खरीदी सिमट कर रह गई है । नई पÞmसल की आयात बढ़ने से भावों में गिरावट आने लगी है । पिछले सप्ताह से व्यापार धीरे–धीरे जमने लगा है । नकदी कम मिलने से मजदूरों को भुगतान नहीं हो पा रहा है । इसी तरह कपड़ा बाजार में भी ग्राहकी नहीं है । नगदी के अभाव होने से सराफा बाजार में ग्राहकी एकदम सुस्त है । जेवरों की बिक्री लगभग बंद सी है । लोगों को जो नकदी उपलब्ध हो रही है वे उसे बहुत जरूरी चीजों पर ही खर्च कर रहे हैं । पर्सा बारा के कारोबार में बड़े पैमाने पर असर हुआ, क्योंकि यहां भारतीय मुद्रा बहुत अधिक प्रचलन में है । नेपाल के विदेशी मुद्रा विनिमय प्रबंधन विभाग के प्रमुख भीष्म राज ढुंगाना के अनुसार नेपाल में लगभग १३ करोड़ पचास लाख भारतीय रूपया प्रचलन में थे ।

मोहनराज भट्ट,सूचना अधिकृत

मोहनराज भट्ट,सूचना अधिकृत

उपभोक्ताओं की सुविधा हेतु, बीरगंज भन्सार कार्यालय ने अनलाइन सेवा शुरु कर दिया है । अनलाइन डिजिटल प्रणाली द्वारा सामानों का जांचपास किया जा रहा है । भन्सार प्रमुख अधिकृत सेवन्त पोखरेल ने बताया कि बीरगंज भन्सार कार्यालय से आयात–निर्यात करने वाले व्यवसायी, अनलाइन शुरु होने से सहजता महसूस करेंगे । उन्होन्ने दावा किया कि भन्सार के कार्य को कागजमुक्त करने के उद्देश्य से सञ्चालित अनलाइन सेवा द्वारा सेवाग्राही कार्यालय या घर में रहते हुए भन्सार के बहुत काम सम्पन्न कर सकते है । भंसार प्रमुख ने कहा कि आने वाले दिनों में,भन्सार के लिए आवश्यक कागज प्रमाण अनलाइन के माध्यम से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है । कागजपत्र के लिए सेवाग्राही को भन्सार कार्यालय दौड़ने की अवस्था आगामी दिन में नहीं रहेगी ।
इस सेवा के शुरू होने से भन्सार में मालवस्तु छुड़ाने के लिए मात्र सेवाग्राही के आने से ही काम हो जाएगा और भीड़ में भी कमी आएगी । अनलाइन सेवा सञ्चालन के लिए बीरगंज भन्सार कार्यालय में एक दर्जन कर्मचारी कार्यरत हैं । सूचना अधिकृत मोहनराज भट्ट ने बताया कि अनलाइन सेवा सञ्चालन से पहले वीरगंज भन्सार कार्यालय में आसीकुडा प्रणाली द्वारा काम होता था । आसीकुडा वल्र्ड अनलाइन हो जाने से कार्य सम्पादन के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर दक्ष बनाया गया है । बीरगंज भन्सार से पहले प्रविधिमैत्री तथा आधुनिक बनाने के क्रम में कांकडभिट्टा, श्रीसिया सुक्खा बन्दरगाह में ये प्रविधि सञ्चालित है । भन्सार एजेन्ट संघ पर्सा के अध्यक्ष विजय साह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अनलाइन सेवा सञ्चालन के बाद एजेन्टों को कार्य करने में सुबिधा और सहजता होगी ।
संसद ने भन्सार कार्यविधि के सरलीकरण तथा सामञ्जस्यीकरण सम्बन्धी, ’संशोधित क्योटो महासंधि’ नाम के अन्तर्राष्ट्रीय महासन्धि को नेपाल पक्ष राष्ट्र बनने सम्बन्धी प्रस्ताव को बहुमत से अनुमोदन कर दिया है । इससे भन्सार प्रशासन में एकरूपता और पारदर्शिता कायम होगा । ये प्रस्ताव अनुमोदन हो जाने के बाद अब नेपाल का भंसार, विश्व भन्सार संगठन के सहयोग से और उत्कृष्ट और प्रभावकारी तरीके से काम कर सकेगा ।
नेपाल का निर्यात एक खर्ब पहुंचाने में मुश्किल है, और आयात ६ खर्ब से ज्यादा है । इस कारण नेपाल और गरीब होते जा रहा है । अगर निर्यात बढ़ाना कठिन है, तो स्वदेशी उत्पादन करके आयात कम किया सकता है । नेपाल एक खर्ब से ज्यादा तो पेट्रोलियम पदार्थ आयात करता है । इसके लिए विद्युतीय और सौर्य ऊर्जा चालित सवारी साधन का प्रयोग और उसमें छूट बेहतर विकल्प हो सकता है । साथ ही कार, जीप जैसे सवारी साधनों के प्रयोग के बजाय सार्वजनिक यातायात को प्रोत्साहन देकर पेट्रोलियम पदार्थ के आयात में कमी की जा सकती है । नेपाल १ खर्ब से ज्यादा कृषिवस्तु का आयात करता है, इन वस्तु का उत्पादन करने का स्रोत साधन होते हुए भी सरकारी उदासीनता के कारण नहीं हो रहा है । ऊख किसान चीनी मिलद्वारा तौल में, मूल्य में तथा भुक्तानी में ठगे जा रहे है, पर सरकार बहरी बनी हुई है । कृषक के खेती में प्रविधि, प्राविधिक और आर्थिक सहयोग नहीं पहुंचता ।
तरकारी तथा फलफूल के आयात के लिए मात्र बीरगंज नाका से चालू वित्त वर्ष के ६ महीने में एक अर्ब रूपैयां आयात के क्रम में बाहर गया । चालू वित्त वर्ष २०७३÷०७४ बीरगंज नाका द्वारा सावन से पूस तक में भारत से ८८ करोड़ ३९ लाख ७१ हजार रूपैया बराबर के तरकारी तथा फलफूल आयात हुआ । बीरगंज तरकारी तथा फलफूल व्यवसायी संघ के अध्यक्ष विदुर गुप्ता ने बताया की “भारत से बीरगंज नाका होते हुए आयात हुए बेमौसमी हरी तरकारी हेटौंडा, नारायणगढ़, पोखरा और काठमाडौं के बाजार में आपूर्ति करता है ।” जिला कृषि विकास कार्यालय के अनुसार पर्सा जिला में हरेक वर्ष करीब ६ सौ हेक्टर क्षेत्रफल में फलफूल, आम, केला, लीची, कटहल की खेती होती है । जिला कृषि विकास कार्यालय पर्सा के बागवानी शाखा प्रमुख श्यामप्रसाद कुर्मी कहते है, “भारत में किसान को फलफूल और तरकारी खेती में प्रोत्सहान करने के लिए सरकार विभिन्न शीर्षक में अनुदान देती है, लेकिन यहां के किसान को कुछ करने की चाह के बावजूद सरकारीस्तर पर कोई अनुदान तथा सहयोग नहीं मिल पाता ।”
६५ वां अंतर्राष्ट्रीय भंसार दिवस के अवसर पर सर्वोत्कृष्ट कर्मचारी श्री कुलराज ज्ञवाली, निदेशक भंसार बिभाग, डब्ल्यू सी ओ मेरीट सर्टिफिकेट तरफ से श्री बलराज भंडारी, उत्कृष्ट कर्मचारी तरफ से श्री विष्णु प्रा. भूषाल और श्री रामचंद्र कांडू, नायब सुब्बा, बीरगंज भंसार कार्यालय से, उत्कृष्ट भंसार एजेंट एन एंड कंपनी के श्री नरेश न्योपाने, बीरगंज भंसार कार्यालय को दिया गया है ।
वार्षिक राजस्व
sw

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz
%d bloggers like this: