नेपाल की पहचान अभी भी “हिन्दू राष्ट्र”

हिमालिनी प्रतिनिधि
काडमांडू। विश्व के एक मात्र हिन्दू राष्ट्र के रुप में पहचान दिलाने के लिए विश्व हिन्दू परिषद ने एक समय में काफी मेहनत की थी। राजनीति से लेकर सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र के जरिए दबाव डÞालकर तत्कालीन राजपरिवार को हिन्दू राष्ट्र की घोषणा के लिए मनवा लिया गया था। हाँ, इसके लिए नेपाल नरेश को हिन्दू सम्राट की उपाधि भी देनी पडÞी थी। इस अभियान में र्सवाधिक महत्वपर्ूण्ा भूमिका अदा की थी, विश्व हिन्दू परिषद के तत्कालीन अन्तर्रर्ाा्रीय अध्यक्ष और वर्तमान में परिषद के संरक्षक रहे अशोक सिंहल ने।
लेकिन अब जबकि नेपाल को रातों रात हिन्दू राष्ट्र से धर्म निरपेक्ष राष्ट्र घोषित कर दिया गया तो इसके पीछे के भारी षड्यन्त्र के बारे में लगभग सभी को पता है। अपने ५ दिनों के नेपाल भ्रमण पर आए अशोक सिंहल ने माओवादी पर चर्च की आडÞ में नेपाल को धर्म निरपेक्ष राष्ट्र घोषित किए जाने का आरोप लगाया है। सिंहल का कहना है कि नेपाल के माओवादी हो या भारत के माओवादी दोनों ही चर्च की प्रतिनिधि संस्थाएँ हैं और धर्मान्तरण की छूट पाने के लिए यूरोपीय देशों से माओवादी सहित कई गैर सरकारी संस्थाओं को करोडÞों रुपये मिलते हैं।
कभी राजा को हिन्दू सम्राट बताने वाला विश्व हिन्दू परिषद् ने अब उनसे अपना पल्ला झाडÞ दिया है। नेपाल में हिन्दू राष्ट्र की बात करने या फिर हिन्दुवादी संगठन के लिए काम करने पर सीधे-सीधे राजावादी होने का आरोप लगा दिया जाता है। जिससे यहाँ काम करने में कठिनाइ होती है। इसलिए इस बार खुद सिंहल ने पत्रकार सम्मेलन के दौरान यह बात स्पष्ट कर दी है कि अब विश्व परिषद् का राजसंस्था से कोई भी लेना-देना नहीं है। नेपाल की लोकतान्त्रिक व्यवस्था में और संविधान में उन्हें पर्ूण्ा आस्था है लेकिन हिन्दू राष्ट्र घोषित किए जाने, गौ हत्या पर पर्ूण्ा पावन्दी लगाए जाने, जबरन धर्म परिवर्तन को गैर कानूनी घोषित किए जाने की मांग जारी रहेगी।
अशोक सिंहल का मानना है कि हिन्दू राष्ट्र होते हुए भी राजा के शासन में धडल्ले से धर्म परिवर्तन, गौ हत्या चलती रही लेकिन राजा या राजसंस्था ने कोई कदम नहीं उठाया। इसलिए यह देश ९४ प्रतिशत से अधिक हिन्दूओं का देश है और संविधान में प्रावधान नहीं रहने के बाद भी दुनिया भर के करीब १ अरब हिन्दुओं के लिए नेपाल हमेशा ही हिन्दू राष्ट्र रहा है और आगे भी रहेगा।
नेपाल में हाल ही में र्सार्वजनिक हर्ुइ जनगणना प्रतिवेदन में हिन्दू, बौद्ध, किराँत, प्रकृति आदि धर्म में बाँटने का षड्यन्त्र किया गया है। विश्व हिन्दू परिषद् मानती है कि ओमकार परिवार से जुडेÞ हिन्दू धर्मावलम्वियों की संख्या ९४ प्रतिशत है। अशोक सिंहल ने कहा कि अभी भी नेपाल में ६ प्रतिशत ऐसे लोग है, जिन्होंने इर्साई धर्म कबूल कर लिया है। लेकिन जनगणना में उनका नाम हिन्दू धर्म में उल्लेख है। यह एक बडÞा षड्यन्त्र है। नेपाल के दर्ुगम इलाकों की तो बात छोडÞ दी जाए काठमांडू और तर्राई के जिलों में भी धडÞल्ले से इर्साई धर्म प्रचारक हिन्दुओं को साम दाम दण्ड भेद की नीति अपनाकर धर्मान्तरित कर रहे हैं। परिषद् का दवा है कि नेपाल में ही खूद १८ हजार ऐसी एनजीओं है, जो किसी ना किसी रुप से इसी काम में लगी हैं।
परिषद् की इस चिन्ता से अशोक सिंहल ने राष्ट्रपति रामवरण यादव, उपराष्ट्रपति परमानन्द झा तथा नेपाल में भारतीय राजदूत जयन्त प्रसाद को अलग-अलग मुलाकात कर अवगत करा दिया है। नेपाल में बंगलादेशी घुसपैठियों पर भी अशोक सिंहल ने अपनी चिन्ता जताई है। उन्होंने नेपाल सरकार से मांग की है कि देश में बंगलादेशी घुसपैठियों को रोकने, गौहत्या को पर्ूण्ा रुप से प्रतिबन्ध लगाने के लिए कठोर कानून बनाए जाएँ।

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