नेपाल की समीक्षा करनेवाले कूटनीतिज्ञों में रंजीत जी का स्थान सबसे ऊँचा है : अनिल झा

 

अनिल झा, नेपाल सद्भावना पार्टी के अध्यक्ष हैं

अनिल झा, नेपाल सद्भावना पार्टी के अध्यक्ष हैं

अनिल झा, काठमांडू ,२१ फरवरी |
भारतीय राजदूत महामहिम रंजीत राय जी से मेरी पहली मुलाकात दिल्ली में हुई थी, जब वे विदेश मन्त्रालय में नेपाल डेस्क में सेवारत थे । इसके पश्चात् जब वे नेपाल के लिए राजदूत बनकर नेपाल आनेवाले थे, तो उस समय भी दिल्ली में मुलाकात हुई थी । मुलाकात के दौरान नेपाल के सामाजिक, राजनीतिक और नेपाल–भारत के सम्बन्धों के बारे में घनीभूत रुप में बातचीत हुई थी । नेपाल आने के पश्चात् समसामयिक विषयवस्तुओं पर उनसे हमारी बातें होती रही । सलाह मशविरा भी होता रहा । रंजीत जी एक कुशल कूटनीतिज्ञ हैं । वे नेपाल की राजनीति से पूर्ण रुपेण परिचित हैं ।
क्योंकि तत्कालीन नेकपा माओवादी और राजनीतिक दलों के बीच दिल्ली में हुए १२ सूत्री सम्झौते के वक्त रंजीत जी भी मौजूद थे, जिसे दिल्ली सम्झौता के नाम से भी जाना जाता हैं । ध्यातव्य हैं कि उस समय वे नेपाल डेस्क में सेवारत थे । नेपाल के बारे में उनका विश्लेषण बहुत ही सटीक है । दूसरे देश के नागरिक होकर भी नेपाल के बारे में समीक्षा करनेवाले कूटनीतिज्ञों में उनका स्थान सबसे ऊँचा है । वे नेपाल की राजनीतिक, सामाजिक परिस्थितियों के साथ–साथ यहां के राजनीतिज्ञों के बारे में भी अच्छी तरह से जानकारी रखते हैं ।
जहां तक नेपाल में विकास निर्माण की बात है, तो मैं कहना चाहूंगा कि जिस समय कुंवर नटवर सिंह भारत के विदेशमंत्री थे, उस समय गजेन्द्र नारायण सिंह के साथ मेरी भी उनसे मुलाकात हुई थी । उस दौरान मैंने नेपाल में संघीय व्यवस्था हो, मुख्यमंत्री का पर्याप्त अधिकार हो और आर्थिक व्यवस्था भी हो, तो १० वर्ष के अंदर मधेश में पूर्ण रुपेण विकास हो जाएगा । ग्यारहवें वर्ष में विकास करने के लिए कुछ रहेगा भी नहीं । आशय यह है कि हमारी पहली आवश्यकता विकास नहीं हैं । हमारी पहली आवश्यकता है– सम्मान, पहचान और स्वाभिमान । वैसे मधेशी जनता की आवश्यकताएं हैं– रोटी, कपडा और मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार, शांति, समृद्धि और विकास तथा सम्मान, पहचान और स्वाभिमान । इन आवश्यकताओं में से उन की पहली आवश्यकता है– सम्मान, पहचान और स्वाभिमान । जब उनकी पहचान स्थापित होगी, उनका स्वाभिमान रहेगा तभी उन्हें सम्मान मिलेगा । इसके पश्चात् ही वे रोटी, कपड़ा और मकान एवं शांति, समृद्धि और विकास की बात सोचेगी । इसलिए भी हम अभी विकास निर्माण में ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं । शायद मधेशवादी दलों की भी यही स्थिति होनी चाहिए ।
जहां तक सवाल हैं भारतीय सहयोग का, तो मेरे ख्याल से नेपाल को सबसे ज्यादा सहयोग करनेवाला देश भारत ही है । नेपाल के सभी इलाकों में भारत का सहयोग रहा है । खास तौर पर मैं पहाड़ी जनता के विकास का विरोधी नहीं हूं । मैं तो सिर्फ मधेशी जनता को अन्य जनता के अधिकार के बराबरी के पक्ष में हूं । इसलिए कि अधिकार में समानता होने के बाद विकास अवश्य हो जाएगा । विकास के मामले में नेपाल की अन्य जनता से भी मैं उतना ही जिम्मेदार मानूंगा । जबकि मधेशियों के अधिकार में कटौती की गई है । उनके अधिकार को हरण किया गया है । इसलिए मैं यह बात बोलता हूं । भारत नेपाल का सबसे बड़ा विकास पार्टनर देश रहा है । इसलिए हिमाल, पहाड़ व मधेश के सभी क्षेत्रों में भारत से जो भी सहयोग हो रहा है, उसमें समानता है । और होना भी चाहिए क्योंकि भारत पूरे नेपाल का मित्र है ।
अंत में मैं कहना चाहूंगा कि महामहिम रंजीत जी का कार्यकाल हरेक दृष्टिकोण से सन्तोषजनक रहा है । अब जो भी राजदूत आएंगे वे हमारे मित्र होंगे । हम मित्रवत् व्यवहार करेंगे और उनसे भी हम मित्रवत् व्यवहार की अपेक्षा रखेंगे ।
(अनिल झा, नेपाल सद्भावना पार्टी के अध्यक्ष हैं ।)

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