नेपाल के चर्चित ९ थप्पड काण्ड

नेपाल में थप्पड खानेवाले पहले नेता प्रचण्ड ही नहीं हंै। इससे पहले भी बहुत नेता ऐसे थप्पडÞ खा चुके हैं। इसी तरह नेता तथा मन्त्री होकर भी कर्मचारी को थप्पडलगानेवाले नेता भी हमारे यहाँ हंै। पढिए, नेपाल के राजनीतिक वृत्त में चर्चा में रहे  कुछ थप्पड काण्ड –

थप्पड नम्बर १
प्रसंग पञ्चायतकाल का है। उस समय बद्रीप्रसाद मण्डल स्वास्थ्य सहायकमन्त्री थे। वह वीर अस्पताल गए और वहाँ की एक नर्स को एक थप्पड लगा दिया। यह थप्पड काण्ड ने उस समय में हंगामा ही खडÞा कर दिया। इसी के चलते १२ घण्टे के अन्दर ही मण्डल को मन्त्री पद से हाथ धोना पड।
थप्पड नम्बर २
प्रथम जनआन्दोलन ०४७ साल के बाद अर्थात् वि.सं. २०५१ साल सावन ६ गते की बात है। उस समय संसद भवन सिंहदरबार के भीतर विद्यमान था। वहाँ राष्ट्रिय सभा की बैठक चल रही थी। सभा में नेकपा एमाले के तत्कालीन सांसद गोल्छे सार्की बोल रहे थे। अचानक उनकी नजर तत्कालीन स्थानीय विकास मन्त्री तथा वर्तमान कांग्रेस उपसभापति रामचन्द्र पौडेल पर पडÞी। सार्की को लगा कि पौडेल उनका मजाक उडÞा रहे हैं। उसके बाद वे सीधे मन्त्री पौडेल के पास पहुँचे और उन पर थप्पडÞों की बौछार कर दी। इस घटना ने सारे देश में हंगामा मचा दिया।
थप्पड नम्बर ३
०६२-०६३ के दूसरे जनआन्दोलन के बाद की घटना हैं। २०६५ साल जेष्ठ १५ गते संविधासभा की पहली बैठक होने जा रही थी। नेकपा एमाले सम्वद्ध र्सर्ुखेत जिला की सभासद् कमला शर्मा ने पर्ूवगृहमन्त्री तथा कांग्रेस सभासद् पर्ूण्ाबहादुर खड्का को सभा भवन के भीतर ही चप्पल जमा दी। अपने पति की हत्या में खड्का संलग्न रहने के आरोप में शर्मा ने खडका के ऊपर चप्पल प्रहार किया था। उसके बाद बैठक हाँल में हंगामा हुआ। लेकिन शर्मा के ऊपर कोई कानूनी कारवाही नहीं हर्ुइ।
थप्पड नम्बर ४
इस घटना में कुछ उल्टा हुआ है। क्योंकि यह नेता के द्वारा एक कर्मचारी पर हुआ हमला है। मन्त्री जैसे गरिमामय पद पर रहकर भी एक सरकारी कर्मचारी पर हाथ उठानेवाली महिला मन्त्री थीं करिमा बेगम। घटना २०६६ साल कार्तिक २४ गते की है। तत्कालीन माधवकुमार नेपाल की सरकार में कृषि तथा सहकारी सहायक मन्त्री रही बेगम ने पर्सर्ााजला के सिडिओ दर्ुगाप्रसाद भण्डारी को उनके कार्यालय में ही प्रहार किया था। इस घटना के कारण भी तत्कालीन प्रधानमन्त्री माधवकुमार नेपाल पर बहुत प्रश्न उठे, लेकिन बेगम पर कोई कारवाही नहीं हर्ुइ।
थप्पड नम्बर ५
नेपाली राजनीति के तीन शर्ीष्ा नेताओं में प्रमुख माने जानेवाले नेता पर यह पहला थप्पडÞ है। वि.स.२०६७ माघ ६ गते के दिन एमाले अध्यक्ष झलनाथ खनाल पार्टर्ीीारा आयोजित कार्यक्रम में सहभागी होने के लिए सुनसरी पहुँचे थे। उसी कार्यक्रम में उन के पार्टर्ीीार्यकर्ता देवीप्रसाद रेग्मी भी सहभागी थे। अध्यक्ष खनाल एमाओवादी कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टर्ीी्रवेश करा रहे थे। उसी क्रम में रेग्मी भी खनाल के करीब पहुँचे, और जमाकर एक चाट लगा दिया। इस घटना की चर्चा सिर्फनेपाल में ही नहीं, विश्वजगत में भी हर्ुइ। १४ दिन बाद -माघ २०) में खनाल देश के प्रधानमन्त्री बने। और थप्पडÞ मारनेवाले को रिहा कर दिया गया।
थप्पड नम्बर ६
यह भी कार्यकर्ता द्वारा एक नेता पर हुआ हमला है। उस समय एमाले अध्यक्ष झलनाथ खनाल ने थप्पडÞ तो खाया था लेकिन प्रधानमन्त्री नहीं बन पाए थे। इसी समय एमाले पार्टर्ीीे एक कार्यकर्ता ने अपने ही नेता के गाल पर थप्पड जमा दिया। घटना २०६७ माघ १८ गते की है। एमाले के पोलिटव्यूरो सदस्य खगराज अधिकारी गोरखा जिल्ल्ाा पार्टर्ीीार्यालय से शाम के समय बाहर निकल रहे थे। उसी समय किसान श्रेष्ठ नामक कार्यकर्ता ने अधिकारी को थप्पडÞ मरा था। उस समय श्रेष्ठ का कहना था कि खनाल को प्रधानमन्त्री बनाने के लिए अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं। इस घटना के दो दिन बाद ही खनाल प्रधानमन्त्री बने।
थप्पड नं. ७
यह एक र्सवसधारण द्वारा तत्कालीन सभासद के गाल में लगाया गया थप्पडÞ है। घटना २०६८ बैशाख १९ गते की है। एमाओवादी सभासद् झक्कुप्रसाद सुवेदी संविधानसभा भवन में हो रहे बैठक में सहभागी होकर अपने निवास की ओर जा रहे थे। लेकिन तीनकुने स्थित रास्ते में ही स्थानीय चाय की दूकान चलानेवाले प्रेमराज देवकोटा ने उनको रोका, उसके बाद सत्कारपर्ूवक उन्होंने अपनी चाय की दूकान में सुवेदी को ले गए। और ‘संविधान कब बनेगा -, उसकी तिथि चाहिए’ कहकर देवकोटा ने कापी और कमल तत्कालीन सभासद सुवेदी के हाथ पर थमा दिया। लेकिन सभासद सुवेदी ने कुछ नहीं लिख सके। उसके बाद ‘संविधान क्यों नहीं बनाया -‘ बोलते हुए देवकोटा ने सुवेदी के गाल पर दो थप्पडÞ जमा दिया। देवकोटा गोरखा जिला गाइखुर-८ के स्थानीयबासी हैं। उस समय उन्होंने कहा था- मेरा थप्पडÞ नेपाली जनता की तरफ से ६०१ सभासदों के उपहार लिए है।
थप्पड नम्बर ८
खास में यह घटना थप्पड की नहीं है। लेकिन कार्यकर्ताद्वारा पार्टर्ीीभापति के ऊपर हुए आक्रमण की है। अपने को सबसे बडÞे प्रजातान्त्रिक दाबी करनेवाले देश के ही दूसरे बडÞे दल नेपाली कांग्रेस के सभापति सुशील कोइराला के ऊपर २०६९ आश्विन १३ गते एक पार्टर्ीीार्यकर्ता द्वारा आक्रमण हुआ। सभापति कोइराला के ऊपर पार्टर्ीीे ही भातृ संगठन नेविसंघ के पर्ूवक्षेत्रीय सभापति प्रवेश बस्नेत द्वारा काठमांडू के कपन में आक्रमण हुआ था। बस्नेत कांग्रेस पर्ूवसभासद पुरुषोत्तम बस्नेत के भतीजे भी हैं। पार्टर्ीीे अन्दर चल रहे आन्तरिक द्वन्द्व के कारण उन पर आक्रमण होने की बात बताई गई है।
थप्पड नं. ९
यह आज तक का ही सबसे चर्चित थप्पड काण्ड है। चर्चित इस अर्थ में कि थप्पडÞ खानेवाले व्यक्ति विघटित संविधानसभा के सब से बडेÞ दल एमाओवादी के अध्यक्ष और पर्ूवप्रधानमन्त्री प्रचण्ड हैं। जो देश में दस वर्षतक हुए भूमिगत सशस्त्र जनयुद्ध के नायक भी थे। दशहरा, शुभदीपावली और छठ पर्व के उपलक्ष्य में एमाओवादी द्वारा वि.सं. २०६९ मार्गशर्ीष्ा १ गते एक चायपान कार्यक्रम आयोजित था। उसी कार्यक्रम में सहभागी होने के लिए बागलुङ के पद्म कुँवर भी आए थे। वे भी पार्टर्ीीध्यक्ष प्रचण्ड के साथ हाथ मिलाने के लिए लाइन में खडÞे थे। जब कुँवर प्रचण्ड के करीब पहुँचे, तब उन्होंने प्रचण्ड के गाल पर एक थप्पडÞ जमा दिया।
इससे पहले भी २०६७ साल में सुनसरी के हाँसपोसा में हुए एक कार्यक्रम में प्रचण्ड पर आक्रमण का प्रयास हुआ था। उस समय तत्कालीन एमाओवादी सभासद् धर्मशिला चापागर्ंइ ने प्रचण्ड को बचा लिया था।

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