नेपाल के नवनिर्माण में सहयोग दें

श्वेता दीप्ति

श्वेता दीप्ति

पिछले महीने देश ने जो भोगा वह अप्रत्यासित था, उसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी । किन्तु, अब जो देश के कर्णधार करेंगे, वह तयशुदा होगा । पराकम्पन धीरे–धीरे कम हो रहा है, परन्तु देश को पटरी पड़ लाने की गति तेज होनी पड़ी । आत्मविश्वास को बढ़ाना होगा और समय की नब्ज और माँग को समझते हुए क्रियाशील होना पड़ेगा । फिनिक्स पुनर्जीवित या पुनर्जीवन लेने वाला एक पक्षी है, जिसकी चर्चा यूनानी साहित्य में मिलती है । फिनिक्स की आयु लम्बी होती है और उसमें, आसमान में बहुत ऊँचाई तक उड़ने की क्षमता भी होती है । माना जाता है कि इसकी मृत्यु इसके पंखों में आग लगने से होती है किन्तु उसी की राख से यह पुनर्जीवन प्राप्त करता है । तात्पर्य यह कि किसी भी चीज का अंत ही एक नई शुरुआत लेकर आता है । विध्वंश के धरातल पर नवनिर्माण की नींव पड़ती है । आज देश को इसी नवनिर्माण की अपेक्षा है और इसके लिए हर मन में आत्मविश्वास का होना आवश्यक है और साथ ही मानसिक शक्ति अपने अन्दर पैदा करनी है,  इसकी सबसे बड़ी शर्त यही है कि दूसरों के साथ सकारात्मक तरीके से विचारों का आदान–प्रदान करें । देश विदेश से मिली सहायता का सही तरीके से उपयोग किया जाय ।  मतभेद और स्वार्थ को तिलांजलि देकर देश हित के लिए सोचें तथा एक सही और दृढ़ निश्चय के साथ नए नेपाल का निर्माण करें । प्रकृति के संग खिलवाड़ और अर्थ की स्वार्थ नीति ने अपना रंग दिखा दिया है । भविष्य सुरक्षित हो इसके लिए नेता ही नहीं जनता को भी सोचना होगा ।
जो पीडि़त हैं उनके विस्थापन की बात चल रही है । समग्र देश एक है, सभी नागरिक एक हैं और सभी को देश के किसी भी कोने में रहने और बसने का अधिकार है किन्तु, इसके लिए अगर फिर से प्रकृति पर प्रहार हुआ तो विनाश किसी भी रूप में सामने आ सकता है । पलायन किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता है, इस बात को सत्ता पक्ष को समझना होगा । केन्द्रीयकरण का दवाब राजधानी भुगत रही है । बढती जनसंख्या, घना होता प्रदूषण और कंकरीट के जंगल में तब्दील होती राजधानी आज जिस विद्रूपता की स्थिति में है उसे कम किया जा सकता था अगर कार्यक्षेत्रों को अन्य जगहों पर भी स्थापित किया गया होता । समय अब भी है, इस विषय पर गहन चर्चा की जाय और एक सही दिशा निर्धारित की जाय । इससे दो फायदे दो निश्चित तौर पर होंगे । काठमान्डू पर दवाब कम होगा, यहाँ का जनघनत्व कम होगा और अगर कार्यक्षेत्र को अन्य जगहों पर स्थापित किया गया तो वहाँ का विकास भी होगा । शिक्षा, चिकित्सा और प्रशासन इन सबका केन्द्र राजधानी है जिसकी वजह से देश के प्रत्येक कोने से यहाँ छात्र, रोगी और सरकारी काम करने वाले आते हैं और आज यह स्थिति है कि किराए पर रहने वालों को यहाँ घर उपलब्ध नहीं होंगे और जो उपलब्ध होंगे उसका किराया आसमान छूएगा । इन समस्याओं पर सरकार को गहनता के साथ सोचना होगा और कोई ना कोई निदान निकालना होगा ।
आनेवाला कल सुखद और समृद्ध हो यही सोच सबकी है और इसके लिए आइए हमसब एकजुट होकर नेपाल के नवनिर्माण में अपना सहयोग प्रदान करेंरु।या का समाधान नहीं होता है, इस बात को सत्ता पक्ष को समझना होगा । केन्द्रीयकरण का दवाब राजधानी भुगत रही है । बढ़ती जनसंख्या, घना होता प्रदूषण और कंकरीट के जंगल में तब्दील होती राजधानी आज जिस विद्रूपता की स्थिति में है उसे कम किया जा सकता था अगर कार्यक्षेत्रों को अन्य जगहों पर भी स्थापित किया गया होता । समय अब भी है, इस विषय पर गहन चर्चा की जाय और एक सही दिशा निर्धारित की जाय । इससे दो फायदे दो निश्चित तौर पर होंगे । काठमान्डू पर दवाब कम होगा, यहाँ का जनघनत्व कम होगा और अगर कार्यक्षेत्र को अन्य जगहों पर स्थापित किया गया तो वहाँ का विकास भी होगा । शिक्षा, चिकित्सा और प्रशासन इन सबका केन्द्र राजधानी है जिसकी वजह से देश के प्रत्येक कोने से यहाँ छात्र, रोगी और सरकारी काम करने वाले आते हैं और आज यह स्थिति है कि किराए पर रहने वालों को यहाँ घर उपलब्ध नहीं होंगे और जो उपलब्ध होंगे उसका किराया आसमान छूएगा । इन समस्याओं पर सरकार को गहनता के साथ सोचना होगा और कोई ना कोई निदान निकालना होगा ।
आनेवाला कल सुखद और समृद्ध हो यही सोच सबकी है और इसके लिए आइए हमसब एकजुट होकर नेपाल के नवनिर्माण में अपना सहयोग प्रदान करें ।
सहयोग पर शंका नहीं,

shwetasign

Loading...
Tagged with

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz
%d bloggers like this: