नेपाल के मानव अधिकारवादी डालरवादी हैं : नेता लेखी

काठमाडौं, २६ पुस । आदिवासी जनजाति महासंघ के पूर्व अध्यक्ष तथा थारु नेता राजकुमार लेखी ने नेपाल के मानव अधिकारवादी ‘मानव अधिकारवादी’ न होकर ‘डलरवादी’ हैं कहा है । lekhi

शनिबार राजधानी में ‘मधेशी पत्रकार समाज’ द्वारा आयोजित कार्याक्रम में थारु नेता लेखी ने  नेपाल में रहे  अधिकांश मानव अधिकारवादी संघ÷संस्था ने थारु, मधेशी तथा जनजातियों के साथ विभेद किया है और डालर की खेती करने का आरोप लगाया है । उन्होंने कहा कि इस देश के मानव अधिकारवादी कभी मधेश के उपर हुए विभेद के लिए आवाज नहीं उठाया है । ऐसे में हम उन पर कैसे विश्वास करें । इन्हें निष्पक्ष होना चाहिए परन्तु ऐसा नहीं है । ये विभेदकारी है. जातिवादी हैं । टीकापुर में हुए अन्याय के बारे में ये कुछ नही ं बोल पाए । ये सफेद चमडे वाले मानव अधिकारवादी सिर्फ आन्दोलन भडकाने का काम करते रहे हैं । सरकार ने जो भी  समझौता किया वो आज तक कार्यान्वयन नहीं हुआ है । अब का यह आन्दोलन आर पार का है । जब तक हमारी माँगों को समबोधन नहीं किया जाएगा तब तक यह बन्द नहीं खुलने वाला है । मधेशियों को भारतीय कहने वाले अज खुद दिल्ली दौड में लगे हुए हैं । इसी से पता चलता है कि इस देह के वास्तविक नेपाली कौन हैं । जब तक माँग को नहीं माना जाएगा नाका सहज नहीं होगा यह थारु की उक्ति थी । तराई में जितनी मौत हुई है उसकी जिम्मेदारी राज्य को लेना होगा सच तो यह है कि  ओली, कृष्ण सिटौला, भिम रावल, लेखराज भट्ट और शेरबहादुर देउवा ने यह हत्या कराई है । उक्त कार्यक्रम मधेशी पत्रकार समाज केअध्यक्ष मोहन सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई ।

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