नेपाल के राजनीतिज्ञों में राजकीय सोच की कमी

dr udeshworlalनेपाल बहुआयामी देश होते हुए भी देश के निर्माण में यहाँ के राजनीतिज्ञों को किसी भी तरह की राजकीय सोच की आवश्यकता नहीं महसूस हो रही है । यह देश अपने पुराने ऐतिहासिक परिवर्तन से गुजरते हुए राजतन्त्र को दरकिनार करके लोकतन्त्र और गणतन्त्र के समुद्र में फँस गया है और समुद्र से सही ढंग से निकालने वाले नाविक का इतना अभाव है कि यह देश अभी लम्बे समय तक समुद्र की लहरों में फंसा रहेगा ।
आज नेपाल में राजनीतिक दल के बुजुर्गों में राजकीय सोच का नितान्त अभाव होने के कारण वो यह नहीं समझ रहे हैं कि देश बडÞा होता है या पार्टर्ीी नेपाल के सभी राजनीतिक पार्टर्ीीे नेता अपने आप को और अपनी पार्टर्ीीो देश से ऊपर मान रहे हैं । नेताओं की सोच सिर्फअपनी पार्टर्ीीे र्इद-गिर्द और आर्थिक लाभ को केन्द्रबिन्दु मान कर पार्टर्ीीे भीतर और बाहर मौसम की तरह बदलती रहती है । देश आज किसी भी पार्टर्ीीे नेता के ऊपर पूरा विश्वास नहीं कर पा रहा है । वो ये नहीं समझ पा रहे हैं कि नेपाल के अच्छे दिन आने वाले है या बुरे दिन में ही इजाफा होने वाला है । आज जनता किस पर भरोसा करे, किसे महत्व दे, किससे उम्मीद रखे या खुद को समझा ले कि यह देश फिलहाल इसी तरह संकटग्रस्त रहेगा ।
जिस देश के राजनीतिज्ञ महारथी को देश के संविधान बनाने के लिए समय नहीं है, उस देश में लोकतन्त्र या गणतन्त्र को पर्ूण्ाकालिक स्थापना के लिए सोच कहाँ से आएगी – आज इसी राजकीय सोच के अभाव के कारण देश के राजनीतिज्ञों द्वारा संविधान निर्माण मेर्ंर् इमानदरी के साथ समय नहीं लगाया जा रहा है । संविधानसभा के अधिकतम सदस्य देश को संविधान की उपयोगिता के बारे में भी वाकिफ नहीं हैं ।
संविधानसभा के अधिकांश सदस्य अपने पदीय दायित्व और कार्य के प्रति उदासीन दिख रहे हैं । उन्हें जिस कार्य के लिए जनता ने भेजा है, उसे भूल कर वे सरकार के जोडÞ घटाव में लगे रहते हैं । देश की जनता को सरकार से अधिक संविधान की आवश्यकता है परन्तु संविधानसभा के सदस्य को संविधान से अधिक सरकार और सत्ता की आवश्यकता है । इसी संविधान और सरकार की आवश्यकता और महत्व को नेपाल के राजनीतिज्ञों में पहचानने की क्षमता के अभाव के कारण संविधान नहीं बन पा रहा है, जिसका दोष सिर्फराजनीतिक पार्टर्ीीौर उनके महारथी पर जाता है ।
आज देश को कुछ स्वार्थी राजनीतिक व्यक्ति और दलों ने संविधान निर्माण के बहाने बन्धक बना लिया है । देश को न तो विकास की तरफ बढÞने देते है न देश को संविधान बना कर देते हैं । जनता और देश दोनों को झूठे प्रलोभन और चाटुकारिता से भ्रमित किया जा रहा है ।
जनता किस पर भरोसा करे, किस पर विश्वास करे, किससे उम्मीद रखे, या किसे अपनावे जो देश को संविधान दे और देश में जनता के लिए जनता के साथ साथ चिन्तन करे, मनन करे और देश को पहचान दे । देश फिलहाल अन्तर्रर्ाा्रीय गिरोह के चंगुल में फँस कर विकास निर्माण कार्य से पर्ूण्ातया बंचित हो रहा है । नेपाल जलस्रोत में प्राकृतिक रूप से साधन सम्पन्न होने पर भी यहाँ जलविद्युत का उत्पादन निम्न स्तर पर है, जिसका मुख्य कारण राजनीतिक पिछडÞापन है । यहाँ के राजनीतिक व्यक्तियों में देश के निर्माण और विकास के प्रति इतनी इच्छा शक्ति की कमी है कि नेपाल कभी भी विद्युत ऊर्जा में आत्मनिर्भर नहीं हो सकता है । क्योंकि नेपाल अगर विद्युत ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जाता है तो यहाँ र्इनर्भटर, सौर्यऊर्जा या अन्य विद्युतीय उत्पादन उपकरण का अन्तर्रर्ाा्रीय व्यापार बन्द हो जाएगा, जिससे बहुत कमीशनखोरों को हानि होगी । और इसी सोच ने देश को आत्मनिर्भरता के मामले में अपंग बना दिया है ।
नेपाल की संविधानसभा देश को संविधान देने में अर्समर्थ होती जा रही है । जिसका मुख्य कारण संविधानसभा के अधिकांश सदस्य संविधान निर्माण कार्य से अनभिज्ञ और अपरिपक्व हैं । संविधानसभा के अधिकांश सदस्य संविधान निर्माण कार्य में दक्ष नहीं हैं, वे सिर्फअपनी पार्टर्ीीे कार्य और निर्देश को आगे बढÞाते रहते हैं, संविधान निर्माण कार्य में उनका योगदान शून्यके बराबर रहता है । राजनीतिक स्वार्थ के कारण आज देश अपना अस्तित्व बचाने में अर्समर्थ हो रहा है । हमारे नेता आज राजनीतिक परिपक्वता बढÞाने के बदले अपने व्यक्तिगत स्वार्थ में तल्लीन होते जा रहे हैं ।
देश आज अपनी पहचान नहीं बना पा रहा है, दूसरे देशों पर मोहताज होने के लिए राजनीतिक रूप से प्रेरित किया जाता है । देश की जनता को अपने आप में सामर्थ्यवान होने से रोका जाता है क्योंकि नेपाल के हरेक राजनीतिक पार्टर्ीीे नेता और बुजर्ुग व्यक्ति को यह पता है कि अगर देश की जनता कुछ अच्छी सोच बना कर देश के हित के लिए आगे आना चाहती है तो देश के राजनीतिज्ञों का भविष्य बिगडÞने लगेगा और राजनीतिज्ञों का चढÞता ग्राफ गिरने लगेगा ।र्
वर्तमान समय में इस देश के प्रत्येक राजनीतिज्ञ में राजकीय उदार दृष्टिकोण लाना जरूरी है । निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर देशहित के बारे में वे सोचें । नेपाल की राष्ट्रीयता पडÞोसी देश भारत को तिरस्कार, बदनाम और अविश्वास करके ऊपर नहीं उठ सकती । इसके लिए तो उच्च मनोबल के तहत कार्य करते हुए अभी भारत में जो विकास तीव्र गति से हो रहा है । उस पथका अनुसरण करना होगा । नेपाल की मानसिकता में यह बदलाव लाना जरूरी है । आज नेपाल क्या करे, क्या नहीं करे, किसे अपनावे, किसे छोडÞे, यह समझ नहीं पा रहा है । यह देश सबों का साझा है । देश में जब तक सभी धर्म, सम्प्रदाय, जाति और क्षेत्र का र्सवांगीण विकास नहीं होता है, तब तक यह देश अधूरा ही रहेगा । इस देश को मजबूत और विकसित बनाने के लिए इस देश की व्यवस्थापिका के साथ-साथ कार्यपालिका और न्यायपलिका को भी सम्पन्न और मजबूत बनाना होगा ।
राजनीतिक मनोबल ऊँचा होना ठीक है लेकिन राजकीय सोच उतनी ही दृढÞ होनी चाहिए और दोनों में सन्तुलन ठीक रहना चाहिए । बिना राजकीय सोच के या इच्छा शक्ति के किसी भी देश का निर्माण असम्भव है, इसलिए देश में प्रत्येक जनता से लेकर राजकर्मी में राजकीय सोच की भावना प्रवल हो, जिससे देश में अच्छे दिन आए और देश मजबूत बने । J

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