नेपाल को हर सहयोग के लिए भात तैयार

भारतीय वित्तमन्त्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि नेपाल की शान्ति प्रक्रियाको तार्किक निष्कर्षमें पहुँचाने के लिए अल्पकालीन या दघकालीन आवश्यक सहयोग उपलब्ध काने के लिए भात सदैव तत्प है। नेपाली नेताओं को भारत दारा  दिये जाने वाले निन्त सहयोग कने की प्रतिबद्धता मैं सुना पाया हूँ। लोकतान्त्रिक, सम्पन्न, शान्तिपर्ूण्ा औ स् िथ भविष्य निर्माण में नेपाल के लिए भातीय सहयोग हमेशा उच्च प्राथमिकता में हेगा। विबा अपाह्न विभिन्न राजनीतिक दल के नेताओं के साथ बातचीत कते हुए वित्तमन्त्री ने

कहा। उन्होंने कहा कि स् िथ, शान्तिपर्ूण्ा एवं सम्पन्न नेपाल देखने की इच्छा केवल नेपाली जनता की नहीं है, यह इच्छा भात एवं दक्षिण एशिया की है। नेपाली जनता द्वाा अपनायी गई पद्धति को औ सका दोनों को हम हमेशा सहयोग कने के लिए तत्प हैं। नेताओं के साथ बातचीत कते हुए मुखर्जी ने कहा कि शान्ति प्रक्रिया को तार्किक निष्कर्षमें पहुँचाने के लिए दलगत सहमति औ समावेशी प्रक्रिया को अवलम्बन कना उचित होगा।
वार्ता में सहयोगी कांग्रेस पार्टर्ीीे एक नेता के अनुसा वित्तमन्त्री मुखर्जी ने दलगत सहमति में अभी के समान ही आगे बढÞने वाली शान्ति प्रक्रिया जल्द ही समाधान की दिशा में अग्रस होगी ऐसा विश्वास उन्होंने व्यक्त किया। होटल द्वाकिा में दिन के दो बजे से लेक चा घण्टे तक कांग्रेस, एमाले, मधेशी मोर्चा, माओवादी, ाष्ट्रिय जनशक्ति पार्टियों के नेता गणों के साथ दलगत रुप में अलग-अलग रुप में बातचीत हर्ुइ। इन मुलाकातों में भातीय विदेश सचिव ञ्जन मथाई एवं ाजदूत जयन्त प्रसाद भी मौजूद थे। वित्तमंत्री ने कहा नेपाल-भात बीच स् िथत विभिन्न मन्त्रालयों के संयंत्रों को क्रियाशील काने की शुरुवात हो चुकी है। उन्हों ने आगामी फवी में विदेशमन्त्री स् त प द्विपक्षीय बातचीत होने की बात कहा। इस मन्त्रालय में दो देशों के विदेशमन्त्री बीच सन् १९९१ में पहलीबा बातचीत होने के बाद अभी तक दूसी बा बैठक नहीं हर्ुइ।
मुलाकाती सिलसिला
एक दिवसीय भ्रमण में आए वित्तमन्त्री मुखर्जी ने प्रथम चण में कांग्रेस सभापति सुशील कोइाला, पर्ूव प्रधानमन्त्री शेबहादु देउवा, प्रकाशमान सिंह, सुजाता कोइाला, प्रदीप गिी, ामचन्द्र पौडेल, कृष्ण सिटौला, चित्रलेखा यादव एवं अर्जुन नसिंह केसी के समूह के साथ मुलाकात किया था। उन्होंने प्रस् तावित शान्ति प्रक्रिया औ संविधान लेखन की स् िथति के सम्बन्ध में जिज्ञासा प्रकट की। ाष्ट्रिय सका गठन के सर्न्दर्भ में कुछ भी बातें नहीं हर्ुइ। ये बातें सभापति कोइाला ने संचाकर्मियों से कहा। प्रस् तावित शान्ति प्रक्रिया समाधान सर्न्दर्भ में माओवादी को उत्तदायिपर्ूण्ा तीके से लगना चाहिए, जैसी धाणा नेतृ सुजाता कोइाल ने बताई। एमाले पार्टर्ीीे नेता एवं विदेश विभाग प्रमुख केपी ओली के नेतृत्व में भातीय वित्तमंत्री के साथ बातचित कने के लिए एमाले ने एक टोली को भेजा था। भातीय दूतावास ने एमाले अध्यक्ष झलनाथ खनाल, माधव नेपाल को बातचीत कने के लिए बुलाए जाने प भी पार्टर्ीीेन्द्रिय समिति की बैठक की तैयाी की बात कते हुए खनाल औ नेपाल द्वाकिा होटल नहीं आए। मुलाकात कने वाले नेताओं में विद्या भण्डाी, भतमोहन अधिकाी थे।
एमाले पार्टर्ीीम्बद्ध स्रोत के अनुसा विगत में जब स् वयं प्रधानमन्त्री बनने के समय में कूटनीतिक आचासंहिता को आधा बनाक भातीय वित्तमंत्री से मिलने पर्ूवप्रधानमन्त्री की हैसियत के हिसाब से प्रोटोकल नहीं मिलने के काण खनाल औ नेपाल मिलने नहीं गए। मुलाकाती के रुप में सहभागी बने पर्ूव अर्थमन्त्री भातमोहन अधिकाी के अनुसा वित्तमन्त्री मुखर्जी नेपाल में जाी शान्ति प्रक्रिया एवं संविधान लेखन की स् िथति के बो में जानकाी लेना चाहते थे। हम ये पार्टर्ीीवो पार्टर्ीीहक नहीं, नेपाली जनता की आकांक्षा को र्समर्थन केंगे। मुखर्जी की इस उक्ति को उद्धृत अधिकाी ने किया। वित्तमन्त्री से मिलने ाष्ट्रिय जनशक्ति पार्टर्ीीे अध्यक्ष र्सर्ूयबहादु थापा भी द्वाकिा होटल पहुँचे थे।
माओवादी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल अकेले वित्तमन्त्री के संग आधे घण्टे तक मुलाकात किया था। मुलाकात के क्रम में वित्तमन्त्री मुखर्जी ने कहा कि शान्ति प्रक्रिया को निष्कर्षमें पहुँचाक नेपाल में ाजनीतिक स् िथता स् थापित होना भात देखना चाहता है। दाहाल के स् वकीय सचिव समी दाहाल के अनुसा नेपाल में शान्ति प्रक्रिया एवं संविधान निर्माण के सम्बन्ध में मुखर्जी ने जानने कर्ीर् इच्छा व्यक्त किया था। इससे पहले प्रधानमन्त्री बाबुाम भर्ट्टाई औ मुखर्जी बीच सिंहदबा में बातचीत हर्ुइ थी। बातचीत के क्रम में प्रधानमन्त्री के स् वकीय सचिव विश्वदीप पाण्डे के अनुसा मुखर्जी ने वर्तमान सका ही ाष्ट्रिय स् वरुप प्राप्त के, जैसी शुभकामना व्यक्त किया। मुखर्जी ने कहा नेपाल में ाजनीतिक स् थायित्व भात देखना चाहता है। भर्ट्टाई की उक्ति को उद्धृत कते हुए उन्होंने कहा कि आप के नेतृत्व में ाष्ट्रिय स् वरुप की सका बने, ऐसी शुभकामना है। मधेशी मोर्चा का विजय गच्छेदा, जयप्रकाश गुप्ता, महेन्द्र यादव, ाजेन्द्र महतो, महन्थ ठाकु औ मोर्चा से भिन्न संघीय सद्भावना पार्टर्ीीे अनिल झा, सद्भावना आनन्दी देवी की सतिा गिी, मधेशी जनअधिका फोम के ामसहायक यादव सहित अन्य मधेशी नेताओं के साथ मुखर्जी ने अलग-अलग रुप से बातचीत किया था। ाष्ट्रिय सहमति की सका जब तक नहीं बनती है, तब तक शान्ति प्रक्रिया का समाधान नहीं होने वाला है। वित्तमन्त्री मुखर्जी के समक्ष अपनी धाणा व्यक्त कते हुए ाम भोस यादव ने कहा कि मधेश की समस् या समाधान के विषय में आजतक हर्ुइ सहमति कार्यान्वयन काने की चेष्टा किसी भी स् त से नहीं हर्ुइ है। हम शान्ति प्रक्रिया समाधानार्थ कांग्रेस, एमले औ माओवादी की सच्ची इमान्दातिा की अपेक्षा खते है।
उन्होंने शान्ति प्रक्रिया को सहज बनाने के नाम प माओवादी दल द्वाा जोजबदस् ती अनधिकृत रुप से कब्जा किए गए मकान, जमीन वापस देने का निर्ण्र्ााकके भी कार्यान्वयन न होने के काण शंका-उपशंका का आधा अधिक होने से उन्होंने अपनी धाणा वित्तमन्त्री समक्ष खी थी। इसके अतिक्ति समावेशी सका, सेना में मधेशी को प्रवेश काने जैसे विभिन्न विषय गौण होने के बो में भी उन्होंने मुखर्जी अवगत काया था। शान्ति प्रक्रिया औ संविधान निर्माण में भी एकतावद्ध होक जाएँ, ऐसा सुझाव वित्तमन्त्री मुखर्जी ने मधेशवादी दलों को दिया था । मधेशी मोर्चा के नेता गृहमन्त्री गच्छेदा ने कहा। सद्भावना आनन्दी देवी की नेतृ एवं श्रम मन्त्री सतिा गिी ने ाजनीतिक संक्रमण के बो में सम्बोधन कने हेतु मधेश में तीव्र विकास की णनीति अपनाने की जरुत है, ऐसी धाणा उन्होंने व्यक्त की। इस विन्दु प आका शान्ति  प्रक्रिया से पीछे नहीं हटा जा सकता है। सकाी गठबन्धन को भी तोडÞा नहीं जाना चाहिए। अपितु इस गठबन्धन को औ अधिक समावेशी बनाते हुए आगे ले जाना चाहिए। जैसी धाण सतिा गिी ने व्यक्त की।
उन्होंने अब छह महीने तक ही संविधान सभा की अवधि हेगी। इस अवधि में भी यदि संविधान लेखन कार्य नहीं हुआ तो जनमत संग्रह में जाया जा सकता है। सर्वोच्च का इस आदेश में गम्भी संकेत छिपा हुआ है। इस बात का जिक्र भी वित्तमन्त्री मुखर्जी के आगे गि निे किया। ाज्य पर्ुनर्संचना के सर्न्दर्भ में दलगत सहमति औ आधा नहीं बन पाने की स् िथति में सर्वोच्च के द्वाा दिए गए विकल्प को सही संकेत के रुप में मनन कना जरुी है। गिी ने वित्तमन्त्री मुखर्जी के समक्ष खी गई धाणा के बो में बताई। ±±±

 

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